Breaking : लाइट नहीं जल रही थी तो पहुंचा था पड़ोसी के घर, यहां खौफनाक नजारा देख उड़ गए होश

हो-हल्ला सुनकर मौके पर जुट गई लोगों की भीड़, पुलिस भी मौके पर पहुंची और शुरु कर दी गई जांच

By: rampravesh vishwakarma

Published: 16 May 2018, 08:22 PM IST

अंबिकापुर. मानिक प्रकाशपुर में मंगलवार की रात अज्ञात लोगों ने धारदार हथियार से एक ग्रामीण की हत्या कर दी। मृतक पहाड़ी कोरवा घर में अकेले रहता था। इसकी जानकारी तब हुई जब पड़ोस का ही एक व्यक्ति सुबह उसके घर पहुंचा। उसने देखा तो खून से सना उसका शव पड़ा हुआ था। उसने तत्काल इसकी जानकारी गांव के चौकीदार को दी।

चौकीदार ने घटना की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा पश्चात शव को पीएम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरु कर दी है।


शहर से लगे मानिक प्रकाशपुर के मृगाडांड़ निवासी ४५ वर्षीय सोन साय पहाड़ी कोरवा पिता बदरा कोरवा लगभग २० वर्षों से यहां रहता था। उसकी पत्नी की मौत 10 वर्ष पूर्व ही हो गई थी। शासन द्वारा वन भूमि पर उसे पीएम आवास का लाभ दिया गया था। वह अटल आवास में अकेले रहता था। वह जीवन-यापन के लिए 50 से 60 बकरा-बकरी पाल रखा था।

वह मंगलवार की रात घर के बाहर दरवाजे के पास जमीन पर सोया था। उसी दौरान अज्ञात लोगों ने धारदार टांगी से उसके सिर पर तीन से चार बार हमला कर दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसकी जानकारी बुधवार की सुबह जब पड़ोस के ही सुखन कोरवा उसके घर पहुंचा तब हुई।

सुखन कोरवा के घर का बिजली कनेक्शन सोन साय के घर से ही गुजरा है। सुखन के घर की बिजली नहीं जल रही थी तो वह इसकी जांच करने वह बुधवार की सुबह सोन साय के घर पहुंचा था। उसने देखा कि सोन साय मृत पड़ा है और उसका शव खून से सना हुआ था। सुखन ने इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी।

फिर चौकीदार ने कोतवाली पहुंच कर घटना की जानकारी दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पंचनामा कराकर पीएम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भिजवाया। पुलिस अज्ञात के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।


30-40 बकरियों को लोगों ने कर दिया पार
सोन साय जीविका के लिए बकरी पालन करता था। उसके पास लगभग 50 से 60 बकरा-बकरी थीं। घटना के बाद 30 से 40 बकरियों का कोई पता नहीं है। संभवत: किसी ने बकरियों की चोरी कर ली है या आरोपी ही बकरियों को अपने साथ ले गए हैं।

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