राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को बीच में ही छोडऩी पड़ी पढ़ाई, 10 मौतों के बाद खुल रहीं जिम्मेदारों की आंखें

President Adopted Sons: बीमारी व आर्थिक तंगी से जूझ रहे पंडो जनजाति परिवार (Pando family) के कई बच्चे पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने को विवश

By: rampravesh vishwakarma

Published: 18 Sep 2021, 08:17 PM IST

अंबिकापुर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कुपोषण व खून की कमी के कारण पण्डो जनजाति की मौत का सिलसिला जारी है। पिछले एक महीने में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। कई बच्चे अनाथ हो चुके हैं। इनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। वही कई ऐसे बच्चे हैं जो बाल्यावस्था में ही अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए पढ़ाई छोड़ कर मजदूरी करने को विवश हैं।

जब इसकी जानकारी समाज के प्रदेश अध्यक्ष उदय पण्डो को हुई तो उन्होंने अधिकारियों से बात की। इसके बाद पंडो जनजाति के 4 बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराने की पहल की गई।

इन चारों के छात्रावास व बालक आश्रम में रहने की व्यवस्था भी की गई है। वही पंडो जनजाति के कई ऐसे लोग हैं जो अभी भी कुपोषण जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।


गौरतलब है कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में निवासरत राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पंडो जनजाति के लोग काफी दयनीय स्थिति में रह रहे हंै। शासन द्वारा इनके उत्थान के लिए कई योजनाएं चलाई जा रहीं हैं परंतु उसका लाभ इन तक नहीं पहुंचने के कारण वे आज भी आर्थिक तंगी व भूखमरी का सामना कर रहे हैं।

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आर्थिक तंगी व कुपोषण के कारण पिछले 1 महीने के अंदर बलरामपुर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में लगभग 10 से ज्यादा पंडो जनजाति के लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें एक ही परिवार के कई लोग भी शामिल है। वही कई ऐसे लोग हैं जो अभी भी जीवन और मौत से जूझ रहे हैं। ऐसे संकट के बीच इनके बच्चे शिक्षा से भी वंचित हो रहे हैं।


रामचंद्रपुर ब्लॉक के ग्राम ओरंगा झिल्याहीपारा निवासी 30 वर्षीय कमला पण्डो पति उदय पण्डो भी कुपोषण से जूझ रही है। इसके शरीर में खून की कमी है। यह पण्डो परिवार अति गरीब है। गरीबी के कारण महिला बाहर इलाज नहीं करा पा रही है। परिजन द्वारा लंबे समय से झाडफ़ूंक एवं जड़ी-बूटी से उसका इलाज कराया जा रहा है।

गरीबी और बीमारी के कारण इसका पुत्र 14 वर्षीय अशोक पण्डो ने कक्षा 8 वीं पास करने के बाद आगे का पढ़ाई छोड़ दी, अब घर चलाने के लिए बकरी चराने का काम करता है। वहीं इसकी बहन प्रमिला पण्डो कक्षा 5 वीं पास कर पढ़ाई छोड़कर अपनी बीमार मां की सेवा में लग गई।

इस गरीब परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल सका है और पानी पीने का समस्या भी बताई जा रही है। बीमारी व आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस पंडो परिवार के बारे में प्रदेश अध्यक्ष उदय पण्डो होने पर उन्होंने अधिकारियों से बात की। सहायक आयुक्त ट्राइबल से गरीब पण्डो परिवार के बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए आश्रम-छात्रावास में रहने की व्यवस्था करने अनुरोध किया।

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बच्चों को कराया गया एडमिशन
18 सितंबर को सहायक आयुक्त ट्राइबल के निर्देश पर शिक्षा विभाग के मुल्तान आजाद संकुल समन्वयक बरवाही, सनावल छात्रावास अधीक्षक कैलाश, नीलिमा खलखो आश्रम अधीक्षिका सनावल, अभिमन्यु, हलीम मंसुरी संकुल समन्वयक दोलंगी, सुल्तान अहमद की टीम उदय पण्डो के घर पहुंची।

इसके बच्चों के गरीबी के कारण पढ़ाई छोडऩे की बात सामने आई, जो सही पाई गई। उदय का बेटा अशोक पण्डो बकरी चराने का काम कर रहा था, उसे सनावल छात्रावास में रहने एवं पढ़ाई करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। टीम द्वारा अशोक पण्डो का सनावल हाईस्कूल में कक्षा 9वीं में एडमिशन कराया गया। उसकी बहन प्रमिला पण्डो का भी गांव के मिडिल स्कूल में कक्षा 6 वीं में एडमिशन कराया गया।


पिता की मौत होने पर छोड़ चुके थे पढ़ाई
दोलंगी निवासी लखन पण्डो व इसके 2 बेटे की मौत कुपोषण से लगभग 1 महीने पूर्व हो गई थी। इसके बाद इसका पूरा परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। आर्थिक तंगी से परेशान इसके 2 और बच्चे विरेंद्र पंडो व जितेंद्र पंडो भी पढ़ाई छोड़ चुके थे।

विरेंद्र पण्डो को बालक छात्रावास सनावल में रखा गया और माध्यमिक शाला सनावल में 8वीं में एडमिशन कराया गया। वहीं इसके भाई जितेंद्र पण्डो को कामेश्वरनगर आश्रम में रखा गया है। वह कक्षा चौथी में पढ़ाई करेगा।

rampravesh vishwakarma Desk
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