विश्वविद्यालय ने 2 बार निकाली भर्ती, युवाओं से लाखों रुपए फीस लेकर नहीं दी नौकरी, जनप्रतिनिधियों ने भी साध रखी है चुप्पी

Recruitment: तत्कालीन सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तृतीय व चतुर्थ वर्ग कर्मचारी पद के लिए निकाली थी भर्ती

By: rampravesh vishwakarma

Updated: 01 Mar 2020, 08:16 PM IST

अंबिकापुर. संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय प्रबंधन स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ सालों से खिलवाड़ करता आ रहा है। राज्य सरकार द्वारा एक आदेश जारी किया गया था। इसमें सरगुजा व बस्तर जिले में तृतीय व चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों की भर्ती स्थानीय युवाओं से किए जाने का जिक्र था।

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तृतीय व चतुर्थ वर्ग की नियमित भर्ती के लिए 2 बार परीक्षा भी आयोजित की। इसके बाद भी अब तक परीक्षा परिणाम जारी नहीं किया गया है।

पूर्व में हुई परीक्षा को गलत तरीके से आयोजित कराए जाने की बात कहकर प्रबंधन इसे निरस्त करने की बात कर रहा है, लेकिन जिन लोगों ने इसके लिए परीक्षा फीस दी थी, उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है।


संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में अब तक जो भी कुलपति पहुंचे वे किसी न किसी कारण से विवादों में रहे। विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति एसके वर्मा ने तृतीय व चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों की नियमित भर्ती के लिए 10 फरवरी 2013 को परीक्षा आयोजित की थी।

तत्कालीन कुलपति के स्थानांतरण के बाद नए कुलपति डॉ. बीएल शर्मा ने पदभार ग्रहण करते ही सीधी भर्ती परीक्षा को नियम विरूद्ध बताते हुए इसे निरस्त करने के लिए कार्यपरिषद के समक्ष प्रस्ताव पेश किया था। कार्यपरिषद द्वारा इस संबंध मे कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसकी जांच के जरूर निर्देश दिए गए थे, लेकिन जांच की जानकारी परीक्षा में शामिल किसी भी प्रतिभागी को नहीं दी गई।

एकतरफा निर्णय लेते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जबकि इस परीक्षा में रोजगार प्राप्त करने के लिए 1200 से अधिक संख्या में अभ्यार्थियों ने फार्म जमा किए थे। अब विश्वविद्यालय प्रबंधन वर्ष 2013 में आयोजित परीक्षा को निरस्त किए जाने की बात कह रहा है।

यह सीधे-सीधे सरगुजा के शिक्षित बेरोजगारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, लेकिन इस संबंध में जिले का कोई भी जनप्रतिनिधि आवाज नहीं उठा रहा है।


दूसरी बार आयोजित परीक्षा भी अटकी
दूसरी बार विश्वविद्यालय के तीसरे कुलपति प्रो. रोहणी प्रसाद द्वारा 9 अगस्त 2018 को विश्वविद्यालय व इंजीनियरिंग कॉलेज में 103 पदों पर सीधी भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित किए जाने हेतु विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें राज्य शासन की गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया था।

विश्वविद्यालय में कार्यरत संविदा कर्मचारियों द्वारा इसके खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका प्रस्तुत की गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। इसमें 8000 से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन जमा किए थे।


परीक्षा फीस में मिले थे लाखों रुपए
वर्ष 2013 में आयोजित परीक्षा में 1200 से अधिक अभ्यर्थियों ने सीधी भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन जमा किए थे। परीक्षा हेतु विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सामान्य व ओबीसी वर्ग से 400 रुपए व एसटी-एससी वर्ग से 300 रुपए का शुल्क लिया था।

परीक्षा तो निरस्त कर दी गई, लेकिन अभ्यर्थियों द्वारा जमा शुल्क को न तो लौटाया गया और न ही बैंक में जमा राशि के ब्याज की कोई जानकारी दी गई। अब इस शुल्क को वापस लौटाने की बात विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही है।


8000 से अधिक ने भरा था दूसरी बार फार्म
पहली बार आयोजित परीक्षा का विश्वविद्यालय द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया था और न ही जांच रिपोर्ट की जानकारी किसी को दी गई, बल्कि दूसरी बार परीक्षा आयोजित करने हेतु वर्ष 2018 में विज्ञापन जारी कर दिया गया। इसमें लगभग 8000 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इस परीक्षा के लिए सामान्य व ओबीसी वर्ग से 500 रुपए व एसटी-एससी से 400 रुपए का शुल्क लिया गया था।

इसकी कोई जानकारी न तो कार्यपरिषद के समक्ष प्रस्तुत की गई और न ही अभ्यर्थियों को इस संबंध में कोई सूचना दी गई। ब्याज की राशि की भी जानकारी किसी के पास नहीं है। विश्वविद्यालय प्रबंधन बार-बार सरगुजा के युवाओं के सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी कर रहा है। दूसरी तरफ किसी न किसी कारण से भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।


हाईकोर्ट में याचिका पेश होने के कारण दूसरी बार भी परीक्षा की गई निरस्त
इसकी जानकारी सभी अभ्यर्थियों को सीधे उनके घर भेजी जाएगी। इसके साथ ही हाईकोर्ट में याचिका पेश होने की वजह से दूसरी बार आयोजित परीक्षा भी निरस्त कर दी गई है।
विनोद एक्का, कुलसचिव, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय

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