सरगुजा यूनिवर्सिटी के परीक्षक ने बिगाड़ा छात्रों का कॅरियर, री-वेल्यूएशन में खुली लापरवाही की पोल

rampravesh vishwakarma

Publish: Feb, 15 2018 02:56:06 (IST)

Ambikapur, Chhattisgarh, India
सरगुजा यूनिवर्सिटी के परीक्षक ने बिगाड़ा छात्रों का कॅरियर, री-वेल्यूएशन में खुली लापरवाही की पोल

प्राचार्य ने परीक्षक पर कार्रवाई के लिए विश्वविद्यालय को लिखा पत्र, पुनर्मूल्यांकन में 32 पूरक विद्यार्थी उत्तीर्ण, अधिकतम 25 अंकों तक दर्ज की गई वृद्

अंबिकापुर. 'कहां तो तय था चरागा हर एक घर के लिये, कहां चराग मयस्सर नहीं शहर के लिये' दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति सरगुजा विश्वविद्यालय प्रबंधन पर सटीक चरितार्थ होती है। विश्वविद्यालय की स्थापना आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के शैक्षिक उन्नयन के लिये हुई थी लेकिन विश्वविद्यालय अब विद्यार्थियों की ही उपेक्षा करने लगा है।


सरगुजा विश्वविद्यालय का ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। सत्र 2016-17 के बीकॉम तृतीय वर्ष आयकर (टैक्सेशन) प्रश्न पत्र में ३२ विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम पूरक घोषित किया गया। विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन कराया तो प्रथम परीक्षक की लापरवाही फलक पर आ गई। प्रथम परीक्षक ने जिन विद्यार्थियों को प्राप्तांक 75 अंक में से 4 अंक से 24 अंक के बीच दिया है, उन्हीं उत्तर पुस्तिकाओं में न्यूनतम 10 अंक से अधिकतम 25 अंक तक वृद्धि दर्ज हुई है।


8 अनुत्तीर्ण विद्यार्थी भी लापरवाह परीक्षक के कोपभाजन का शिकार हुए जो पुनर्मूल्यांकन के उपरांत उत्तीर्ण घोषित हुए। लापरवाही का नमूना गिरधर दास के परिणाम में देखा जा सकता है। उन्हें प्रथम परीक्षक द्वारा 4 अंक प्रदान किया गया था। पुनर्मूल्यांकन के बाद गिरधर को 23 अंक की वृद्धि मिली। इसी तहर नौरीन अंजुम को अधिकतम 25 अंकों की वृद्धि मिली। बीकॉम प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष में श्रेष्ठता की दौड़ में रहे हिमांशु गोयल खराब मूल्यांकन के कारण श्रेष्ठता सूची से वंचित हो गए।

विद्यार्थियों के खराब परीक्षा परिणाम आने के बाद पुनर्मूल्यांकन में सच उजागर होने पर लापरवाह परीक्षक के खिलाफ महाविद्यालय के प्राचार्य ने लिखित शिकायत कर दी है। महाविद्यालय की शिकायत पर सरगुजा विश्वविद्यालय ने लापरवाह परीक्षक के खिलाफ क्या कार्रवाई की है, अभी ये स्पष्ट नहीं हुआ है।


उत्तर पुस्तिकाओं के लिए बाध्यता
सामान्यत: उत्तर पुस्तिकायें गोपनीय विभाग द्वारा केन्द्रीय मूल्यांकन, प्रदेश के भीतर के परीक्षकों से कराई जाती है। गोपनीय विभाग प्रत्येक पाठ्यक्रम के कुछ प्रश्नपत्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को राज्य के भीतर और बाहर भी कराता है। पुनर्मूल्यांकन के लिए बाध्यता होती है कि राज्य से बाहर ही परीक्षक को भेजी जाए। दो परीक्षकों के बाद भी तीसरा परीक्षक भी राज्य के बाहर का ही होगा।


यह है मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन की पद्धति
गोपनीय विभाग की ओएसडी डॉ. नेहा शर्मा ने बताया कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान दो परीक्षकों द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होता है। प्रथम परीक्षक के दिये अंकों को छिपा दिया जाता है। पुनर्मूल्यांकन के दोनों परीक्षकों को अवार्ड शीट दी जाती है। अवार्ड शीट पर दोनों परीक्षक अंक देते हैं। प्रथम परीक्षक के साथ दोनों पुनर्मूल्यांकन परीक्षकों के अंक के साथ तीन परिणाम गोपनीय विभाग के पास होते हैं।

प्रथम परिणाम से पांच फीसदी से कम अंतर आने पर परीक्षा परिणाम में परिवर्तन नहीं किया जाता है। पांच फीसदी से अधिक और 20 फीसदी तक के अंक होने की स्थिति में परीक्षा परिणाम विद्यार्थी का घोषित किया जाता है। यह परिणाम दो नजदीकी (करीबी) अंक के आधार पर दिया जाता है। 20 फीसदी से अधिक अंतर आने की स्थिति में उत्तर पुस्तिका तीसरे परीक्षक के पास भेजी जाती है।

तीसरे परीक्षक द्वारा दिए गए अंक के बाद तीन नजदीकी अंकों के आधार पर परिणाम घोषित किया जाता है। उन्होंने बताया कि गत सत्र से पहले तक सरगुजा विश्वविद्यालय में 10 फीसदी अंक तक होने वाले परिवर्तन को नो चेंज की स्थिति में रखा जाता था, लेकिन वर्तमान में इसे पांच फीसदी कर दिया गया है।

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