पुरातत्व संग्रहालय का अस्तित्व संकट में, ऐतिहासिक धरोहर संभालना तो दूर बिल्डिंग भी हो गई बदहाल

Historical Heritage: ऐतिहासिक धरोहरों को संजोकर रखने यहां 2 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था पुरातत्व संग्रहालय (Archaeological museum)

By: rampravesh vishwakarma

Published: 11 Sep 2021, 09:49 PM IST

अंबिकापुर. पुरातात्विक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों से परिपूर्ण सरगुजा जिले का पुरातत्व संग्रहालय इन दिनों अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रहा है। शासन की उदासीनता के कारण पुरातत्व संग्रहालय का अस्तित्व संकट में दिख रहा है। यह बदहाल हो गया है।

डायरेक्टर पुरातत्व संग्रहालय रायपुर द्वारा अंबिकापुर पुरातत्व संग्रहालय की मरम्मत के लिए 37 लाख का फंड प्रशासन को मार्च महीने में ही जारी किया गया है। लेकिन अब तक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए कोई पहल नहीं की गई है।


गौरतलब है कि अंबिकापुर के सरगवां में वर्ष 2013 में जिला पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण करीब 2 करोड़ की लागत से किया गया था। जिला पुरातत्व संग्रहालय निर्माण के पीछे यह मंशा थी कि आसपास के ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर को यहां बेहतर तरीके से संजोकर रखा जाए।

पुरातत्व संग्रहालय में महेशपुर, हर्राटोला और डीपाडीह की करीब 20 पुरानी मूर्तियां रखीं गईं हैं। यहां भोरमदेव और पाली के प्राचीनकाल मंदिर की प्रतिमूर्ति तैयार की गई है। बहरहाल सारी सुविधाएं विकसित होने के बाद भी यहां पुरातात्विक चीजों के संग्रहण पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

History of Surguja
IMAGE CREDIT: Historical places

बजट की कमी से स्थिति आज यह हो गई है कि जिला पुरातत्व संग्रहालय के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। झाडिय़ों और खरपतवार से घिरे संग्रहालय को देख यही लगता है कि करोड़ों की राशि व्यर्थ चली गई।


सरगुजा की लोक संस्कृति को किया गया है प्रदर्शित
जिला पुरातत्व संग्रहालय के भीतर सरगुजा की लोक संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए रजवार कला उसकी संस्कृति, कोरवा और पंडो जनजाति के रहन-सहन और उनके रीति रिवाजों को घरों के रूप में दर्शाया गया है। यह घर उसी तरह हैं, जैसे यह जनजाति अपने इलाकों में बनाकर रहती है।

अब ये घर धीरे-धीरे बदहाल हो रहे हैं। पुरातत्व संग्रहालय में प्राचीन काल की मूर्तियों को संग्रहित कर लोगों के देखने के लिए यहां आठ गैलरी बनाई गई है। लेकिन रखरखाव व मरम्मत के अभाव में यह खराब हो रहे हैं। नियमित सफाई न होने के कारण मूर्तियां व गैलरी धूल से पटी हैं।


कभी-कभी ही पहुंचते हैं लोग
सरगुजा संभाग की लोक संस्कृति को जीवित रखने के लिए शासन द्वारा पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण तो कराया गया पर यहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं दी गई है। हालांकि इसमें करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए हैं।

Historical place
IMAGE CREDIT: Museum

लेकिन आज भी यह संग्रहालय उदासीनता का दंश झेल रहा है। यहां कभी-कभी ही लोगों का आना होता है। जबकि लोगों को रुझान बढ़ाने के लिए यहां निशुल्क टिकट की व्यवस्था भी की है। इसके बावजूद भी लोग नहीं पहुंचते हैं।


37 लाख का फंड जिला प्रशासन को जारी
पुरातत्व संग्रहालय अंबिकापुर में विभिन्न मरम्मत कार्यों हेतु 37 लाख का फंड जिला प्रशासन को जारी किया गया है। कोरोना काल के कारण काम शुरू नहीं किया गया है। कलक्टर द्वारा टेंडर जारी कर मरम्मत कराया जाएगा और उसे विकसित किया जाएगा।
विवेक आचार्य, डायरेक्टर पुरातत्व संग्रहालय, रायपुर

rampravesh vishwakarma Desk
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