यहां भालू व ग्रामीणों के बीच बन गया है अनोखा रिश्ता, साथ रह रहे पर नहीं पहुंचा रहे एक-दूसरे को नुकसान

Unique news: लखनपुर ब्लॉक के ग्राम लटोरी में मादा भालू (Bear) ने 3 दिन पूर्व दिया है 2 शावकों को जन्म, गांव में ही जमा लिया है डेरा, एहतियातन निगरानी कर रहा वन अमला (Forest team)

By: rampravesh vishwakarma

Updated: 13 Nov 2020, 10:57 PM IST

अंबिकापुर. अक्सर देखने को मिलता है कि यदि किसी गांव में भालू (Bear) पहुंच जाए तो हडक़ंप मच जाता है और ग्रामीण उसे भगाते हैं या फिर वन अमले को इसकी जानकारी देते हैं। लेकिन सरगुजा जिले का एक ऐसा गांव है जहां एक मादा भालू और ग्रामीणों (Human and bears) के बीच रिश्ता सा बन गया है।

दरअसल तीन दिन पूर्व मादा भालू ने 2 शावकों को जन्म दिया है, तब से भालू व शावकों का गांव में ही डेरा है। हालांकि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए डीएफओ सरगुजा (Surguja DFO) ने वन अमले की टीम को लगा दिया है और टीम द्वारा लोगों को समझाइश भी दी गई है।


सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक में एक छोटे से बस्ती लटोरी में 3 दिन पूर्व मादा भालू ने 2 शावकों को जन्म दिया है। इसके बाद से वह दोनों शावकों को साथ उसी गांव में डेरा जमाई हुई है।

भालुओं का भोजन-पानी की भी व्यवस्था उसी गांव में हो रही है। लेकिन मादा भालू और ग्रामीणों के बीच गजब का तालमेल (Unique) देखने को मिल रहा है। जिसे शायद ही आपने कभी देखा और सुना होगा। अक्सर इस क्षेत्र में सुनने को मिलता है कि भालू के हमले से किसी ग्रामीण की मौत हो गई या कोई बुरी तरह जख्मी हो गया।

लेकिन इस गांव के ग्रामीण और भालू के बीच एक रिश्ता सा बन गया है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि न तो भालू ने कभी किसी ग्रामीण को नुकसान पहुंचाया और न ग्रामीणों ने भालू और उसके शावकों को कभी परेशान किया।


वन विभाग की टीम तैनात
हालांकि वन अमले को इस पूरे वाकये की जानकारी जैसे ही लगी, डीएफओ सरगुजा के निर्देश पर वन विभाग की टीम को गांव में लगा दिया गया है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश दी है कि ग्रामीण भालू से दूरी बनाकर रखें और उसे बेवजह परेशान करने से बचें।

वहीं रात के अंधेरे में शौच के लिए बाहर निकले पर मना कर दिया गया है। ग्रामीण भी वन विभाग के आदेश का पूरा पालन कर रहे हंै। अपनी सुरक्षा के साथ-साथ भालुओं का भी ध्यान दे रहे हैं। (Unique news)


शावक को हटाने पर हिंसक हो सकती है मादा भालू
डीएफओ (DFO) पंकज कमल ने बताया कि तीन दिन पूर्व मादा भालू ने दो शावकों को जन्म दिया है, तब से नर व मादा दोनों उसी गांव के आस-पास में डटे हुए हैं। दोनों बच्चे भी कमजोर हैं।

अगर शावकों को दूसरी जगह जंगल (Forest) में शिफ्ट करा दिया जाता है तो इस स्थिति में नर व मादा भालू हिंसक हो सकते हैं और ग्रामीणों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। शावक कुछ बड़े हो जाने पर स्वयं भालू अपने शावकों के साथ चले जाएंगे।

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rampravesh vishwakarma Desk
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