छत्तीसगढ़ के इस जिले में दो दशक से औसत बारिश में भारी गिरावट, इसे माना जा रहा जिम्मेदार

Weather Update: दो दशकों में 125 मिलीमीटर बारिश (Raining) की हुई है गिरावट, बिगड़ गया है वर्षा का गणित (Maths of Rainfall)

By: rampravesh vishwakarma

Published: 21 Aug 2021, 09:20 PM IST

अंबिकापुर. मौसम विभाग द्वारा जारी औसत वर्षा के बीते पांच दशकों के आंकड़ों को देखकर हर कोई घबरा जाएगा। क्योंकि दो दशकों से अंबिकापुर में लगातार औसत वर्षा में भारी गिरावट आई है और यह गिरावट 125 मिलीमीटर है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया गया है। इससे लगातार औसत वर्षा में कमी आ रही है।


छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मौसम के बदले मिजाज से वर्षा चक्र की तस्वीर भी बदल रही है। आंकड़ों को देखें तो सालभर होने वाली वर्षा का गणित बिगड़ गया है। इस वर्ष मानसून ने समय से पहले दस्तक दे दिया था, लेकिन 1 जून से 20 अगस्त तक सामान्य से कम वर्षा हुई है।

इस अंतराल में नगर में हुई वर्षा 870 मिलीमीटर दर्ज की गई है। जबकि औसत वर्षा 1000 मिलीमीटर होती है। हालांकि मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी 5 से 6 दिन का वक्त बचा हुआ है। ऐसे में अगस्त महीने के अंत तक औसत वर्षा हो सकती है।

लेकिन बात करें पिछले पांच दशक की तो अंबिकापुर में लगातार औसत वर्षा में गिरावट आई है। पिछले दो दशक में औसतन वर्षा के बदलते गणित के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार माना जा रहा है।

मौसम विभाग के वैज्ञानिकों की मानें तो प्रकृति के साथ किए जा रहे छेड़छाड़ की वजह से औसत वर्षा में लगातार हो रही गिरावट हो रही है। वही दूसरी बड़ी वजह वैज्ञानिक मानते हैं कि पिछले 50 सालों में वनस्पति में भारी कमी आई है।

शहर के विकास के साथ साथ वनों का क्षेत्रफल भी घटा है। इस वजह से वर्षा की मात्रा में भी कमी आ रही है। बीते कुछ सालों में प्रकृति के साथ किए गए खिलवाड़ का व्यापक असर भी दिखने लगा है।


भूमिगत जल स्तर में भी तेजी से गिरावट
औसत वर्षा में लगातार हो रही कमी की वजह से भूमिगत जल स्तर में भी काफी तेजी से गिरावट आई है। यही नही जल स्रोत यानी नदी तालाबों में भी पिछले कुछ वर्षों से पानी की कमी देखने को मिली है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में भी औसतन वर्षा में गिरावट होने से प्रभाव पड़ रहा है। सरगुजा जिला एक कृषि प्रधान जिला है।

ऐसे में लगातार हो रही वर्षा में कमी की वजह से किसानों को भी खेतों की सिंचाई के लिए पानी की कमी पडऩे लगी है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ रहा है। बहरहाल पांच दशकों के इन आंकड़ों को देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते कुछ वर्षों में प्रकृति के साथ किये गए खिलवाड़ की वजह से इसका बुरा असर भी अब देखने को रहा है।


सालों से ऐसा रहा है औसत बारिश का आंकड़ा
सन 1971 से 1980 तक औसत वर्षा 1101.4 मिमी दर्ज की गई। सन 1981 से 1990 तक औसत वर्षा 1009.9, सन 1991 से 2000 तक औसत वर्षा 1118.1, सन 2001 से 2010 तक औसत वर्षा 860.5, वहीं सन 2011 से 2020 तक औसत वर्षा 940.6 दर्ज की गई है। इन आंकड़ों पर नजर डाले तो बीते दो दशकों में औसत वर्षा में भारी गिरावट आई है। यह गिरावट लगभग 125 मिलीमीटर है।

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