America: लोगों की जान बचाने के लिए Florida में छोड़े जाएंगे 75 करोड़ मच्छर, सरकारी एजेंसियों ने दी मंजूरी

HIGHLIGHTS

  • अमरीका ( America ) के फ्लोरिडा ( Florida ) में अगले साल आनुवंशिक रूप से संशोधित करोड़ों मच्छरों ( Genetically Modified Mosquitoes ) को डेंगू बुखार और जीका वायरस ( Zika Virus ) जैसी बीमारियों को फैलाने वाले मच्छरों को रोकने के लिए पर्यावरण में छोड़ा जाएगा।
  • फ्लोरिडा कीज मॉस्किटो कंट्रोल डिस्ट्रिक्ट ( Florida Keys Mosquito Control District ) ने इस सप्ताह 2021 में 75 करोड़ एडीज इजेप्टाई मच्छर को दो साल की अवधि के लिए पर्यावरण में छोड़ने की मंजूरी भी दे दी है।

By: Anil Kumar

Updated: 22 Aug 2020, 09:06 PM IST

फ्लोरिडा। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारी मच्छरों ( Mosquito ) के काटने से होते हैं। ये जानलेवा भी साबित होता है। लिहाजा, डॉक्टर हमेशा ये सलाह देते हैं कि मच्छरों से बचें। लेकिन अब मच्छर ही लोगों की जान बचाएंगे।

दरअसल, आनुवंशिक रूप से संशोधित ( Genetically Modified Mosquitoes ) करोड़ों मच्छरों को डेंगू बुखार और जीका वायरस जैसी बीमारियों को फैलाने वाले मच्छरों को रोकने के लिए पर्यावरण में छोड़ा जाएगा। इन मच्छरों को अमरीका के फ्लोरिडा में अगले साल छोड़ा जाएगा।

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फ्लोरिडा कीज मॉस्किटो कंट्रोल डिस्ट्रिक्ट ( Florida Keys Mosquito Control District ) ने इस सप्ताह 2021 में पायलट प्रोजेक्ट के लिए धारीदार पैर वाले 75 करोड़ एडीज इजेप्टाई मच्छर को दो साल की अवधि के लिए पर्यावरण में छोड़ने की मंजूरी भी दे दी है। एडीज इजेप्टाई मच्छर मूल रूप से फ्लोरिडा के नहीं है, उन्हें OX5034 के नाम से भी जाना जाता है। ये मच्छर इंसानों में डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीला बुखार जैसी जानलेवा बीमारियों को फैलाता है।

केमैन द्वीप और ब्राजील में सफल रही है परियोजना

बता दें कि मच्छरों को छोड़ने का काम ब्रिटेन स्थित ऑक्सिटेक बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ( Oxitec Biotechnology Company ) अंजाम दे रही है। कंपनी ने करोड़ों की संख्या में आनुवांशिक रूप से परिवर्तित नर मच्छरों को पर्यावरण में छोड़ने की योजना बनाई है। यह नर मच्छर मादा मच्छरों के साथ मेट करेगा।

चूंकि मादा मच्छर को अंडे देने के लिए खून की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि वो इंसानों को काटती हैं। कंपनी का कहना है कि आनुवांशिक रूप से परिवर्तित नर मच्छर, जो काटते नहीं हैं, वो मादा के साथ मेट करेंगे और इस दौरान उनमें से प्रोटीन निकलेगा जो आनुवंशिक तौर पर परिवर्तित है और वो मादा मच्छर को उसके काटने की उम्र से पहले ही मार देगा।

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ऑक्सिटेक वैज्ञानिक केविन गोर्मन ने गुरुवार को बताया है कि केमैन द्वीप और ब्राजील ( Cayman Islands and Brazil ) में इस तरह की परियोजनाएं सफलतापूर्वक की गई हैं। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में एक अरब से अधिक मच्छरों को छोड़ा गया है जो पर्यावरण और इंसानों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करते हैं।

हालांकि इस तरह के प्रयोग को लेकर कई तरह के सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कई वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह से आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों या जीएमओ का उपयोग से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही प्राकृतिक संतुलन को भी बदल सकते हैं।

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