चीन-रूस सैन्‍य ताकत में अमरीका की बराबरी कर सकते हैं, चीन बढ़ा सकता है भारत की मुश्किलें!

चीन-रूस सैन्‍य ताकत में अमरीका की बराबरी कर सकते हैं, चीन बढ़ा सकता है भारत की मुश्किलें!

Mazkoor Alam | Publish: Feb, 14 2018 10:55:51 PM (IST) अमरीका

एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि चीन का नेतृत्व किस तरह शक्तिशाली हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है।

वाशिंगटन : अमरीका समेत दुनिया के कई देशों में काम करने वाली रक्षा थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ स्‍ट्रैटजिक स्टडीज (IISS) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन और रूस की सैन्‍य शक्ति में जिस प्रकार इजाफा हो रहा है, उससे आने वाले दिनों में ये दोनों देश अमरीका व उसके सहयोगियों के सैन्य वर्चस्व को चुनौती दे सकते हैं, खासकर चीन।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की सैन्‍य ताकत भारत के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि चीन का नेतृत्व किस तरह शक्तिशाली हथियारों का जखीरा बढ़ा रहा है। इंटरनेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ स्‍ट्रैटजिक स्टडीज (IISS) की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट- मिलिट्री बैलेंस, 2018 में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि इन ताकतवर देशों के बीच युद्ध की आशंका निश्चित तो नहीं है, इसके बावजूद रूस और चीन किसी भी तरह के संभाव्‍य संघर्ष से निपटने की तैयारियों में लगे हैं।

चीन हर क्षेत्र में कर रहा तैयारी
चीन जमीन, हवा और जल तीनों क्षेत्रों में लगातार अपनी ताकत बढ़ा रहा है। चीन जल्‍द ही J-20 लड़ाकू विमान को अपने बेड़े में शामिल करने जा रहा है। J-20 ऐसा स्‍टेल्‍थ विमान है, जो राडार की पकड़ में नहीं आता। मालूम हो कि अभी तक स्टेल्थ विमानें सिर्फ अमरीका के पास हैं। इसके अलावा चीन का एयर-टू-एयर PL-15 मिसाइल सिस्टम भी इलेक्ट्रॉनिक स्‍कैंड राडार से लैस होने जा रहा है। यह तकनीक भी कुछ ही देशों के पास है।
इतना ही नहीं चीन नौसेनिक क्षमता भी बढ़ा रहा है। इस दिशा में चीन की आक्रामकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 15 सालों में उसने इतने लड़ाकू जलपोत, युद्ध-पोत और पनडुब्बियों का निर्माण किया है कि अगर जापान, भारत और साउथ कोरिया के निर्माणों को मिला भी दिया जाए, तब भी चीन का आंकड़ा ज्यादा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर युद्ध-पोतों और सहायक-सेना को चीन ने पिछले चार सालों के दौरान लॉन्च किया है, जो फ्रांस की पूरी नेवी से कहीं ज्यादा है। इसके अलावा चीन अफ्रीकी महाद्वीप स्थित जिबूती में अपनी नौसेना का बेस तैयार कर चुका है।

रूस भी कम नहीं
रूस के सैन्यीकरण का काम भले कुछ धीमा है, लेकिन सीरिया व यूक्रेन में युद्ध से मिल रहे अनुभव का उसे पूरा लाभ मिल रहा है। इसके अलावा हाल-फिलहाल में रूस ने साइबर हमलों से निपटने की क्षमता भी काफी बढ़ाई है।

तकनीक पर अब पश्चिमी देशों का एकाधिकार नहीं रहा
चीन जिस तरह तकनीक के जरिए हथियारों को बढ़ा रहा है इसके जरिए वह ग्लोबल डिफेंस इनोवेटर बनकर पश्चिमी देशों की बराबरी कर सकता है। IISS के डायरेक्टर जनरल डॉ. जॉन चिपमैन ने कहा कि रक्षा तकनीक और निर्माण में अब पश्चिमी देशों का पहले की तरह एकाधिकार नहीं रहा। ब होड़ है, इसमें चीन भी आगे निकल सकता है। हालांकि अपनी क्षमताओं का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल के लिए चीन को प्रशिक्षण, शिक्षा और युद्धनीति में भी सुधार करना होगा।

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