किसान आंदोलन: अमरीकी सांसदों ने माइक पोम्पियो को लिखा पत्र, कहा- भारतीय विदेश मंत्री के सामने उठाएं मुद्दा

HIGHLIGHTS

  • Farmers Protest In India: सात अमरीकी सांसदों ने विदेश मंत्री माइक पोम्पियो को पत्र लिख है और इस मुद्दे को उठाने की मांग की है।
  • सात सांसदों के इस समूह में भारतीय मूल की अमरीकी सीनेटर प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं।

By: Anil Kumar

Updated: 25 Dec 2020, 04:47 PM IST

वाशिंगटन। तीनों कृषि कानूनों ( New Agricultural Law ) के खिलाफ विरोध करते हुए बीते एक महीने से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हैं और लगातार इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इन सबके बीच अब इस आंदोलन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलने लगा है।

अमरीका के सांसदों ने भारतीय किसानों ( Farmers Protest ) के आंदोलन को लेकर विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ( US Foreign Minister Mike Pompeo ) को पत्र लिखा है और मांग की है कि वे अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकर से बात करें और इस मुद्दे को उठाएं। अमरीका के सात प्रभावशाली सांसदों ने यह खत लिखा है।

पीएम मोदी ने जारी की किसान सम्मान निधि की अगली किस्त, कॉंन्ट्रैक्ट फार्मिंग को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

भारतीय मूल की अमरीकी सांसद प्रमिला जयपाल समेत सात सांसदों ने माइक पोम्पियो को खत लिखकर अनुरोध किया है कि वे इस मुद्दे को अपने भारतीय समकक्ष के सामने उठाएं। बता दें कि इससे पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भी टिप्पणी की थी।

भारत ने कहा- किसानों का प्रदर्शन हमारा आंतरिक मामला

इधर, भारत ने साफ कर दिया है कि किसानों का यह प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामलों का मुद्दा है, इसलिए शीर्ष विदेशी नेताओं को इसपर बोलने से बचना चाहिए। विदेशी नेताओं की टिप्पणियां भ्रामक सूचनाओं पर आधारित है। यह बिल्कुल अनुचित है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्त ने इसी महीने के शुरुआत में कहा था कि हमने इस किसान आंदोलन से संबंधित कुछ विदेशी टिप्पणियों को सुना और देखा है, जो कि भ्रामक सूचनाओं पर आधारित है। इस तरह की टिप्पणी करना अनुचित है, खासकर तब जब किसी लोकतांत्रिक देश के आंतरिक मामले का मुद्दा हो।

12 से अधिक अमरीकी सांसदों ने जताई है चिंता

आपको बता दें कि अमरीकी सांसदों ने बीते 23 दिसंबर को पत्र लिखकर अपनी बात कही है। इस पत्र पर प्रमिला जयपाल, डोनाल्ड नोरक्रॉस, ब्रेनडान एफ बॉयल, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, मेरी गे स्कानलोन, डेबी डिंगेल और डेविड ट्रोन के हस्ताक्षर हैं।

पत्र में सांसदों ने कहा है कि पंजाब से जुड़ा यह मुद्दा अमरीकी सिखों के लिए चिंता का एक कारण है, लेकिन यह भारत के अन्य राज्यों के नागरिकों को भी प्रभावित करता है। इस आंदोलन से अमरीका में कुछ भारतंवशी सी तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उनके पंजाब में उनके परिवार व पैतृक जमीन है। अब आंदोलन से स्थिति बिगड़ रही है, ऐसे में हमारा आपसे अनुरोध है कि आप अमरीका की विदेशों में राजनीतिक अभिव्यक्ति की आजादी की प्रतिबद्धता को कायम रखने के लिए अपने भारतीय समकक्ष के साथ बात करें।

किसान आंदोलन: धरने पर बैठे हो गया 1 महीना, अब सरकार को खून से पत्र लिखकर भेजने को मजबूर अन्नदाता

पत्र में आगे कहा गया है कि भारत में समाजिक अशांति के वर्तमान स्थिति को देखते हुए अमरीका सलाह दे सकता है। सांसदों ने कहा, 'हम मौजूदा कानून के अनुपालन में राष्ट्रीय नीति निर्धारण के लिए भारत सरकार के अधिकार का सम्मान करते हैं। हम उन लोगों के अधिकारों को भी स्वीकार करते हैं, जो शांतिपूर्ण तरीके से भारत और विदेशों में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।'

आपको बता दें कि आंदोलन शुरू होने के बाद बीते कुछ हफ्तों में अमरीका के 12 सांसदों ने किसान आंदोलन पर चिंता जाहिर की है। इसके अलावा, कानाडा, ब्रिटेन, अमरीका के कई जगहों पर लोगों ने आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसके अलावा भारतीय दूतावासों के बाहर भी प्रदर्शन कर अपना समर्थन जताया।

Show More
Anil Kumar
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned