UNSC में भारतः आतंक के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं

UNSC में भारतः आतंक के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं

Abhishek Tiwari | Publish: May, 13 2016 03:22:00 PM (IST) अमरीका

अकबरुद्दीन ने इस बात को रेखांकित किया कि कट्टरपंथी एवं निहित स्वार्थ प्रेरित व्याख्याओं को चुनौती देने के लिए स्थानीय समुदायों, धार्मिक नेताओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी हो सकती है ताकि अधिक उदारवादी शिक्षा का प्रसार किया जा सके

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, किसी धर्म से टकराव नहीं है। उन्होंने ये बातें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कही।

आतंकवाद निपटने के लिए गहरे वैश्विक सहयोग की जरूरत
अकबरुद्दीन ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा को सर्वाधिक गंभीर खतरा बनकर उभरी इस चुनौती से निपटने के लिए गहरे वैश्विक सहयोग की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि कोई खास विचारधारा आतंकवादी समूहों के लिए मार्गदर्शक का काम करती है और यह उनकी असली ताकत है।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म से टकराव नहीं
उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि संकीर्ण हित उन प्रतिबंधों को लागू करने के मार्ग में बाधा पैदा करते हैं जो संभावित आतंकी खतरों को सीमित कर सकते हैं। आतंकवाद के विमर्श और उसकी विचारधाराओं से मुकाबला विषय पर सुरक्षा परिषद में खुली बहस में अकबरुद्दीन ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी धर्म से टकराव नहीं है। यह मानवतावादी मूल्यों और बर्बर ताकतों के बीच संघर्ष है। यह एक ऐसी लड़ाई भी है जिसे हमारे मूल्यों की ताकत और धर्मों के वास्तविक संदेशों के जरिए जीता जाना चाहिए।

संकीर्ण हितों न अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कानूनी प्रारूप को तय करने में रुकावट पैदा की
आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सर्वाधिक गंभीर खतरों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विमर्शों से मुकाबला एक दीर्घकालिक एहतियाती प्रयास है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जतायी कि संकीर्ण हितों ने भी अक्सर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कानूनी प्रारूप को तय करने में रुकावट पैदा की है। इसने उन प्रतिबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन को भी बाधित किया है जिनसे संभावित खतरों को रोका जा सकता था।

आतंकी समूहों की असली ताकत वैचारिक प्रारुप
अकबरुद्दीन ने कहा कि इसके साथ ही निगरानी और हस्तक्षेप के जरिए आतंकवाद का प्रभावी मुकाबला भी उतना ही महत्वपूर्ण है और इसके लिए गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। भारतीय दूत ने इस बात पर जोर दिया कि वैचारिक प्रारूप इन आतंकी समूहों की असली ताकत है और अतिवादी विचारधाराओं के प्रसार को रोकने के लिए उन्हें कोई मौका या स्थान नहीं मिलना चाहिए।

अकबरुद्दीन ने इस बात को रेखांकित किया कि कट्टरपंथी और निहित स्वार्थ प्रेरित व्याख्याओं को चुनौती देने के लिए स्थानीय समुदायों और धार्मिक नेताओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी हो सकती है ताकि अधिक उदारवादी शिक्षा का प्रसार किया जा सके।
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