UNGA में पेश हुआ मृत्युदंड और यातना के सामान का व्यापार रोकने का प्रस्ताव, भारत ने वोटिंग से किया इनकार

  • भारत ने UNGA में एक प्रस्ताव पर वोटिंग करने से किया इनकार
  • मृत्युदंड और यातना में इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों के व्यापार को खत्म करने का था प्रस्ताव

By: Shweta Singh

Updated: 01 Jul 2019, 07:36 AM IST

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा ( United Nations General Assembly ) में एक प्रस्ताव पर वोटिंग करने से इनकार कर दिया। unga में मृत्युदंड और यातना में इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों के व्यापार को खत्म करने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया था। भारत ने इस मामले में वोटिंग ( voting ) न करने का फैसला किया। भारत का कहना है कि यातना की मृत्युदंड से बराबरी नहीं की सकती है।

इस कारण भारत ने नहीं की वोटिंग

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस प्रस्ताव के पक्ष में 83 देशों ने और इसके खिलाफ 20 देशों ने वोट किया। जबकि भारत समेत 44 देशों ने इस पर वोट देने से इनकार कर दिया। भारत प्रस्ताव से बचता नजर आया। UN में भारत के स्थाई मिशन में प्रथम सचिव पॉलोमी त्रिपाठी ने वोटिंग करने पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें मृत्युदंड को यातना के बराबर माना जा रहा है।

Paulomi Tripathi At UNGA (File Pic)

यातना देना एक जुर्म, गैरकानूनी: पॉलोमी त्रिपाठी

पॉलोमी ने कहा कि,'भारत यातना और सजा के दूसरे क्रूर और अमानवीय तरीकों को पूरी तरह से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। हम मानते हैं कि यातना से मुक्ति एक मानवाधिकार है और इसका हर परिस्थिति में सम्मान किया जाना चाहिए। इसे हर परिस्थिति में संरक्षित किया जाना चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि भारत इस बात पर मजबूती से समर्थन देता है कि यातना देना एक जुर्म है और इसलिए गैरकानूनी है।

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यातना को मृत्युदंड के समान बताने का समर्थन नहीं

पॉलोमी ने कहा,'वहीं, दूसरी तरफ मृत्युदंड का एक वैधानिक प्रावधान है। यह सजा सभी कानूनी प्रक्रियाओं के पालन करने के बाद दी जाती है।' उन्होंने कहा, 'हर राष्ट्र और राज्य के पास अपनी एक न्यायिक व्यवस्था है। इसके साथ ही सबके पास वैधानिक सजा को निर्धारित करने का संप्रभु अधिकार है। इसलिए ऐसा कोई भी निहितार्थ जिसके अंतर्गत यातना को मृत्युदंड के समान बताया जा रहा है, वो हमें स्वीकार नहीं है। क्योंकि भारत में मृत्युदंड एक वैधानिक प्रावधान है। और इसका इस्तेमाल भी दुर्लभ मामलों में किया जाता है।'

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