US President Election 2020: माइक्रोसॉफ्ट का दावा, चीन, रूस, ईरान के हैकर्स चुनाव प्रभावित करने की कर रहे हैं कोशिश

HIGHLIGHTS

  • US Presidential Election 2020: दिग्गज अमरीकी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी दावा किया है कि रूस, चीन और ईरान के हैकर्स अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए साजिश कर रहे हैं और इस चुनाव से जुड़े लोगों व समूहों की जासूसी करने की कोशिश कर रहे हैं।
  • बीते सप्ताह अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन ने चीन, रूस और ईरान पर अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए साजिश रचने का आरोप लगा चुके हैं।

By: Anil Kumar

Updated: 11 Sep 2020, 04:49 PM IST

वाशिंगटन। अमरीका में आगामी 3 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव ( America Presidential Eelection 2020 ) होने वाले हैं और इसको लेकर दोनों में मुख्य उम्मीदवारों के की तरफ से जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। दोनों ही मुख्य पार्टियों की तरफ से आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में अब एक बार फिर से अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने का मुद्दा गरम हो गया है। दरअसल, बीते सप्ताह अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन ने चीन, रूस और ईरान पर अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया तो वहीं अब दिग्गज अमरीकी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी दावा किया है कि रूस, चीन और ईरान के हैकर्स अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए साजिश कर रहे हैं और इस चुनाव से जुड़े लोगों व समूहों की जासूसी करने की कोशिश कर रहे हैं।

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कंपनी ने कहा है कि जिस तरह से 2016 के चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रचार को प्रभावित करने के लिए जो रूसी हैकर्स शामिल थे, वही लोग इस बार भी कोशिश कर रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने आगे कहा है कि यह बहुत साफ़ है कि विदेशी समूहों ने चुनाव को निशाना बनाने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।

200 से अधिक संगठनों को बनाया निशाना

माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से एक बयान जारी किया गया है, जिसमें ये कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी जो बिडेन के चुनाव प्रचार पर हैकरों की नजर बनी हुई है। बयान में आगे कहा गया है कि स्ट्रॉन्टियम समूह से संबंधित रूसी हैकरों ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स से जुड़े हुए 200 से अधिक संगठनों को निशाना बनाया है।

स्ट्रॉन्टियम समूह को फैन्सी बियर के नाम से भी जाना जाता है, जो कि साइबर हमला करने वाली एक यूनिट है। यह समूह कथित तौर पर रूसी सेना के खुफिया एजेंसी जीआरयू से जुड़ी है। कंपनी के मुताबिक चीनी हैकरों ने जो बिडेन के चुनाव प्रचार को प्रभावित करने की कोशिश शुरू कर दी है, तो वहीं ईरानी हैकर्स ने ट्रंप के चुनाव प्रचार को प्रभावित करने के लिए उनसे जुड़े लोगों को निशाना बनाना शुर कर दिया है।

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कंपना ने यह भी दावा किया है कि अभी तक ज्यादातर हमले कामयाब नहीं हुए हैं और हैकरों ने मतदान करने वाले अधिकारियों को अभी तक निशाना नहीं बनाया है। चीनी हैकरों ने बिडेन के प्रचार से जुड़े लोगों के निजी ई-मेल अकाउंट और ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक पूर्व प्रमुख अधिकारी के अकाउंट को निशाना बनाया है। इससे पहले मई-जून में ईरानी हैकरों के समूह ने व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारियों और ट्रंप के चुनाव प्रचार से जुड़े कुछ अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट को ये समझ नहीं आ रहा है कि रूसी, चीनी और ईरानी हैकरों का इसके पीछे क्या मकसद है।

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