एक-दूसरे से खुफिया जानकारियां साझा करेंगे भारत और अमरीका, दोनों सेनाओं ने तैयार किया खाका

एक-दूसरे से खुफिया जानकारियां साझा करेंगे भारत और अमरीका, दोनों सेनाओं ने तैयार किया खाका

Anil Kumar | Publish: Jul, 12 2019 08:55:16 PM (IST) | Updated: Jul, 13 2019 10:40:00 AM (IST) अमरीका

  • Indian Armed Forces के साथ अमरीका सूचनाओं के साझा करने और अंतर-क्षमता बढाने को प्राथमिकता देगा
  • अमरीकी जनरल मार्क ए मिले ने काननू निर्माताओं को इस संबंध में दी जानकारी

वाशिंगटन। भारत और अमरीका के बीच बिगड़ते संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, अमरीका भारतीय सुरक्षा बलों के साथ सूचनाओं को साझा करने और अंतर क्षमता बढ़ाने को लेकर काफी उत्सुक है।

इस संबंध में एक शीर्ष अमरीकी जनरल ने कानून निर्माताओं को बताया कि पेंटागन भारतीय सशस्त्र बलों के साथ सूचना-साझाकरण और अंतर-क्षमताओं को बढ़ाने को प्राथमिकता देगा।

जनरल मार्क ए मिले (जिन्हें संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है) ने ये बातें सीनेट सशस्त्र सेवा समिति की उनकी पुष्टि की सुनवाई के लिए लिखित प्रश्नों के जवाब में कही।

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मिले ने गुरुवार को कहा कि यदि पुष्टि की जाती है, तो मेरी रणनीति है कि हमारे मौजूदा द्विपक्षीय सैन्य-से-सैन्य संवादों के साथ-साथ 2 + 2 मंत्रिस्तरीय जैसे वरिष्ठ स्तर की बैठकों में भागीदारी के माध्यम से भारत के साथ रक्षा संबंधों की निरंतरता को बनाए रखा जाए।

भारत अमरीका संबंध

भारत अमरीका का 'एक प्रमुख रक्षा साझेदार’ है

जनरल मार्क ए मिले ( General Mark A Milley ) ने आगे यह भी कहा 'विशेष रूप से, मैं भारतीय सशस्त्र बलों के साथ हमारी अंतर-क्षमता और सूचना-साझा करने की क्षमताओं को बढ़ाने को प्राथमिकता दूंगा।'

बता दें कि यदि सीनेट की ओर से पुष्टि की जाती है, तो मिले ( Milley ) अमरीकी संयुक्त प्रमुखों के अध्यक्ष के रूप में जनरल जोसेफ डनफोर्ड की जगह लेंगे। अमरीकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मिले अफगानिस्तान, इराक, सोमालिया और कोलंबिया में सेवा दे चुके हैं।

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जनरल मार्क ए मिले अफगानिस्तान में कमांडिंग जनरल, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल संयुक्त कमान और उप-कमांडिंग जनरल, अमरीकी बलों के रूप में कार्य किया है।

मालूम हो कि अमरीका ने 2016 में भारत को 'एक प्रमुख रक्षा साझेदार’ के रूप में मान्यता दी है। यह भारत को अमरीका और उनके निकटतम सहयोगियों के साथ अधिक उन्नत और संवेदनशील तकनीक खरीदने की अनुमति देता है। साथ ही रक्षा क्षेत्र में सहयोग सुनिश्चित करता है।

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