जाति प्रमाण पत्र के लिए लेखपाल ने महिला से मांगी रिश्वत, घूस न देने पर लेखपालों ने की अभद्रता, लीपापोती में जुटे अधिकारी

जाति प्रमाण पत्र के लिए लेखपाल ने महिला से मांगी रिश्वत, घूस न देने पर लेखपालों ने की अभद्रता, लीपापोती में जुटे अधिकारी

Neeraj Patel | Updated: 14 Jun 2019, 04:23:46 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी स्वयं एक महिला हैं, उनके संसदीय क्षेत्र में एक महिला से लेखपालों द्वारा अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया है।

अमेठी. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी स्वयं एक महिला हैं, उनके संसदीय क्षेत्र में एक महिला से लेखपालों द्वारा अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया है। महिला जनवरी माह से जाति प्रमाण बनवाने के लिए लेखपाल आफिस का चक्कर काट रही है और आरोपी लेखपाल ये कहकर उसे टरका रहा है कि चालीस हजार कमाओगी और पांच हजार नहीं दे सकती। बावजूद इस सबके प्रशासनिक अधिकारी इसे विशेष बात नहीं मानते।

जानिए क्या है पूरा मामला

मामला अमेठी तहसील से जुड़ा है। यहां के बहादुरपर गांव से जाति प्रमाण पत्र बनवाने आयी महिला परवीन ज़ेबा पुत्री अकील अहमद ने हल्का लेखपाल अशोक तिवारी पर जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिये पांच हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब रुपये देने से मना किया तो तहसील सभागार में ही बैठी तहसीलदार पल्लवी सिंह के सामने ही मारपीट करने लगे। मामले की पूरी जानकारी के लिये लेखपाल अशोक तिवारी से जब सवाल पूछा गया तो वो कैमरे के सामने आने से बचकर निकल लिया।

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महिला ने बताया कि वो आज जाति प्रमाण पत्र बनवाने आई थी। लेखपाल जनवरी से भटका रहे थे। कहते थे चालीस हजार कमाओगी पांच हजार दे नहीं सकती। फिर जिलाधिकारी को एप्लीकेशन दिया उन्होंने आर्डर किया। हमने तहसीलदार महोदया को सारा मामला बताया उन्होंने कहा झूठ है। उस लेखपाल की एक फोटो हमने खींची थी जब उसे दिखाया तो सारे लेखपाल हमारे ऊपर टूट पड़े। हमारे भाई को भी मारा। इस मामले में एसडीएम अमेठी भी उक्त लेखपाल को बचाने के लिये लीपापोती कर मामले को दबाने में लग गए हैं।

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एसडीएम अमेठी रामशंकर का इस पूरे मामले पर कहना है कि कोई विशेष बात नहीं। महिला तहसीलदार के पास आई थी उसका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था। तहसीलदार लेखपालों के साथ मीटिंग ले रही थी उन्होंने कहा आप जाइए इस पर महिला और उसके साथ आए एक पुरुष बाहर नहीं जा रहे थे। इस पर लेखपालों ने उन्हें बाहर निकाला।

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