अजमेर

वार्डपंच ने लगाई फर्जी हाजिरी अपने रिश्तेदारों के खाते में डलवाया नरेगा का भुगतान

वसूली के आदेश जारी 1.41 लाख रुपए का मामला ग्राम पंचायत राजगढ़

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Apr 05, 2021
poor facilities in narega

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर. महात्मा गांधी नरेगा के कार्याे में किस हद तक फर्जीवाड़ा होता है इसकी बानगी ग्राम पंचायत राजगढ़ के नरेगा कार्यों में देखी जा सकती है। यहां के वर्तमान वार्डपंच Wardpanch सोनू सिंह ने बतौर मेट रहते नरेगा काम में फर्जी fake हाजिरी attendanceदर्ज करवाने के साथ अपने रिश्तेदारोंrelatives के खातें account में राशि भी ट्रांसफर NREGA payment करवा ली। मामला तब खुला जब अनियमितता की शिकायत के बाद जांच हुई। जांच मेें सामने आया कि फर्जी हाजिरी चलाकर राशि भुगतान अपने रिश्तेदारों के खाते में प्राप्त करने में वार्ड पंच की संलिप्तता है। फर्जी हाजिरी के चलते 1 लाख 41 हजार 861 रुपए का फर्जी भुगतान भी उठा लिया गया। जांच अधिकारी ने इसके लिए सरदारपुरा निवासी वार्ड पंच को उत्तरदायी ठहराया है। विकास अधिकारी श्रीनगर ने नरेगा कार्यस्थल पर लापरवाही बरतने एंव कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही के कारण ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था। विकास अधिकारी ने वार्ड पंच को 1 लाख 41 हजार 861 रूपए की राशि ग्राम पंचायत को जमा करवाने के लिए पत्र जारी किया है।

नाड़ा निर्माण कार्य की हाजिरी में हुआ था फर्जीवाड़ा

सरदारपुरा के ग्रामीणों नें जिला कलक्टर को संभागीाय आयुक्त के नाम शिकायत देकर जांच की मांग की गई थी। शिकायत के अनुसार खापरी रोड पर नाड़ा निर्माण कार्य में फर्जी मस्टररोल भरकर फर्जी खाते जोड़कर मेट ने पेंमेंट अपने व रिश्तेदारों के नाम उठा लिए। 18 फरवरी 2020 से 2 मार्च 2020 तक मस्टर रोल,फर्जी हाजिरी व फर्जी जॉबकार्ड बनाकर मरे हुए तथा गांव से बाहर रहने वाले व्यक्तियों के नाम जॉबकार्ड फर्जी नाम जोड़कर बना लिए गए। कई ऐसे लोगों के नाम भी शामिल कर लिए गए जो उस गांव में रहते ही नही है। ग्रामीणों ने मामले की जांच करवाने तथा इसके लिए जिम्मेदारों को दंडित करने की मांग की।

पर्यवेक्षणीय उदासीनता

नरेगा में इतनी बड़ी राशि का भुगातान बड़े काम पर हुआ है। जबकि नरेगा श्रमिकों को आधार आधारित भुगतान होता है। खाते आधार से लिंक है। ऐसे में फर्जी भुगतान सिर्फ मेट को उत्तरदायी ठहराना गले नहीं उतर रहा है। जेटीए, सहायक अभियंता नरेगा, भुगतान के लिए विकास अधिकरी भुगतान व पर्यवेक्षणीय उदासीनता के लिए जिम्मेदार है। प्रकरण की जांच लेखाधिकारी से करवाने के बजाय सहायक विकास अधिकारी के स्तर से करवाई गई है। इन सबकी पर्यवेक्षणीय उदासीनता नजर आ रही है।

इनका कहना है

यह सब फ्रॉड है, सभी की संलिप्तता है। मुझे जो मस्टररोल दिया गया वही मैने जारी किया है। मुझे वसूली का पत्र नहीं मिला है।

सोनू सिंह रावत,वार्ड पंच ग्राम सरदारपुरा, ग्राम पंचायत राजगढ़

Published on:
05 Apr 2021 07:41 pm
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