संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में गुरुवार को जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अचानक हुई छापेमारी से हड़कंप मच गया।
बरेली। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में गुरुवार को जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अचानक हुई छापेमारी से हड़कंप मच गया। भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे अधिकारियों को देखते ही वर्षों से परिसर में जमे दलालों में भगदड़ मच गई और कई दलाल मौके से फरार हो गए। डीएम के निर्देश पर बुलडोजर चलाकर परिसर के बाहर लगे दलालों के अस्थायी खोमचे और अड्डे भी हटवा दिए गए।
आरटीओ कार्यालय में लंबे समय से दलालों द्वारा अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही थीं। बताया जाता है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और वाहनों की फिटनेस कराने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली जा रही थी। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गुरुवार को जिला प्रशासन ने अचानक छापा मार दिया।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने सबसे पहले आरटीओ कार्यालय के सभी गेट बंद करवा दिए। इसके बाद परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की गई। जिस काम के लिए लोग आए थे, उनके कागजात भी चेक किए गए। कुछ लोग संदिग्ध नजर आए तो उनसे गहन पूछताछ की गई, हालांकि दस्तावेज सही मिलने पर उन्हें जाने दिया गया।
अचानक हुई कार्रवाई से दलालों में अफरा-तफरी मच गई। पकड़े जाने के डर से कई दलाल दीवार फांदकर भागते नजर आए। जब तक प्रशासन की टीम दलालों के ठिकानों तक पहुंचती, उससे पहले ही अधिकांश दलाल मौके से फरार हो चुके थे।
सूत्रों के मुताबिक, आरटीओ परिसर में सक्रिय दलाल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए करीब 10 हजार रुपये तक वसूल रहे थे, जबकि इसकी सरकारी फीस महज 1350 रुपये है। वहीं वाहनों की फिटनेस कराने के नाम पर भी तीन हजार रुपये तक की वसूली की जा रही थी। इससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
छापेमारी के दौरान डीएम ने आरटीओ कर्मचारियों और बाबुओं को भी सख्त हिदायत दी कि वे केवल आम जनता का काम करें, दलालों का नहीं। साथ ही कार्यालय को दलालों से पूरी तरह मुक्त कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब काम कराने आने वाले लोगों को अपना आधार कार्ड दिखाना होगा।
इस मामले में एआरटीओ पीके सरोज ने बताया कि आरटीओ कार्यालय में दलालों की शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब कार्यालय परिसर में दलालों को किसी भी हालत में जगह नहीं दी जाएगी और जनता के काम पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे।