Rajasthan Oil Crisis : राजस्थान में पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। राजस्थान में महंगे पेट्रोल-डीजल का सस्ता उपाय मिला। जानिए क्या?
Rajasthan Oil Crisis : इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को लेकर लोगों की सोच अब तेजी से बदल रही है। लंबे समय तक सरकार की सब्सिडी, पर्यावरण संरक्षण के संदेश और जागरूकता अभियानों के बावजूद जिस बदलाव की रफ्तार धीमी थी, उसे अब महंगे पेट्रोल ने अचानक तेज कर दिया है। पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। ऐसे में अब लोग रोजमर्रा के सफर के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर और ईवी को बेहतर और सस्ता विकल्प मानने लगे हैं।
भरतपुर शहर में अब ईवी केवल पर्यावरण बचाने का माध्यम नहीं रह गया, बल्कि यह खर्च कम करने का व्यावहारिक उपाय बनता जा रहा है। खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों में एक पेट्रोल वाहन के साथ कम से कम एक इलेक्ट्रिक वाहन रखने की सोच तेजी से बढ़ रही है।
चौपहिया ईवी एजेंसी संचालक सचिन गर्ग ने बताया कि पहले लोग पेट्रोल वाहन को ही जरूरत मानते थे, लेकिन अब ग्राहक ईवी के फायदे समझने लगे है। कम रनिंग कॉस्ट और कम मेंटेनेंस खर्च के कारण लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। हालांकि ईवी के बढ़ते क्रेज के बीच चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। बड़े शहरों और हाउसिंग सोसायटियों में होम चार्जर लगाने, पार्किंग में अलग बिजली कनेक्शन लेने और सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन की कमी जैसी समस्याएं लोगों के सामने आ रही है। यही वजह है कि मांग बढ़ने के बावजूद कई लोग अभी पूरी तरह ईवी अपनाने से हिचक रहे है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार सीएनजी की तर्ज पर पेट्रोल पंपों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराए तो आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग और तेजी से बढ़ सकता है।
वर्ष - दोपहिया - चौपहिया
2022-23 - 666 - 820
2023-24 - 473 - 3620
2024-25 - 939 - 5720
2025-26 - 1038 - 121
(नोट: आंकड़े परिवहन विभाग अनुसार)
पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने लोगों का रुझान ईवी वाहनों की ओर किया है। गत तीन वर्ष से लगातार ईवी दोपहिया और चौपहिया वाहनों में लगातार वृद्धि हो रही है। पर्यावरण संरक्षण की ओर ये लोगों का अच्छा रुझान है।
अभय मुद्गल, डीटीओ, भरतपुर