ग्वालियर

MP News: ‘राशन सूची’ से 9000 से ज्यादा परिवार बाहर, नोटिस जारी

MP News: केंद्र सरकार ने डेटा शेयरिंग के माध्यम से उन अपात्र लोगों को चिन्हित किया था, जो एक तरफ तो आयकर रिटर्न भर रहे थे और दूसरी तरफ बीपीएल या प्राथमिकता श्रेणी का राशन उठा रहे थे।

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Ration List
Ration List (Photo Source: AI Image)

MP News: एक तरफ देश में लाखों गरीब परिवार दो वक्त की रोटी के लिए सरकारी राशन पर निर्भर है, वहीं दूसरी ओर ग्वालियर में हजारों ऐसे समृद्ध परिवार हैं जो गरीबों का हक डकार रहे थे, ये खुद आयकर भरते हैं या लाखों का व्यापार करते हैं। आयकर विभाग के डेटा मिलान ने ऐसे 9 हजार परिवारों (करीब 27 हजार लोग) की पोल खोल दी है, जिन्हें अब राशन सूची से बाहर कर दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि ये संपन्न लोग अब अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं और ऐसे-ऐसे अजीबोगरीब तर्क दे रहे हैं, जिन्हें सुनकर अफसर भी हैरान है।

आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले परिवारों के नाम पोर्टल से हट गए हैं। पक्ष रखने के लिए लोग आ रहे हैं, लेकिन दोबारा नाम जोड़ने का निर्णय शासन स्तर से होगा। - अरविंद भदौरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक, ग्वालियर

आधार और आइटीआर ने पकड़ी धोखाधड़ी

केंद्र सरकार ने डेटा शेयरिंग के माध्यम से उन अपात्र लोगों को चिन्हित किया था, जो एक तरफ तो आयकर रिटर्न भर रहे थे और दूसरी तरफ बीपीएल या प्राथमिकता श्रेणी का राशन उठा रहे थे। विभाग ने इन 9 हजार परिवारों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा था. लेकिन हकीकत सामने आने के डर से अधिकांश लोग जवाब देने ही नहीं पहुंचे। जिला आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि हितग्राही आधार से लिंक हैं, इसलिए फर्जीवाड़े का कोई रास्ता नहीं है।

बहानों का अजीबोगरीब पुलिंदा

राशन बंद होने के बाद अब ये लोग अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और ऐसे तर्क दे रहे हैं जिन्हें सुनकर कोई भी हंसे बिना नहीं रह पाएगा…

बेटी ने भरा टैक्स, सजा हमें क्यों?: एक हितग्राही का तर्क था कि उसकी बेटी की शादी हो चुकी है और उसने अपने ससुराल में रिटर्न दाखिल किया है, तो मायके का राशन क्यों बंद किया गया?

लोन के लिए भरा था आइटीआर: कई लोगों का कहना है कि उन्होंने वास्तव में कोई कमाई नहीं की, बल्कि बैंक से भारी-भरकम लोन लेने के लिए दिखावे का आइटीआर भरा था।

तीन श्रेणियों में पकड़े गए अमीर चोर

विभाग ने जिन श्रेणियों के तहत इन अपात्रों को पकड़ा है, वे चौंकाने वाली हैं:

  1. जीएसटी टर्नओवर: 25

लाख से अधिक का सालाना कारोबार करने वाले। इनमें कई लोग कंपनियों में डायरेक्टर व स्व-सहायता समूहों के संचालक भी मिले।

  1. आयकर (आइटीआर): 6 लाख से अधिक की

सालाना आय दर्शाने वाले लोग। इनमें कई ऐसे थे जिन्होंने बैंक लोन की पात्रता बनाने के लिए आइटीआर भरा था।

  1. कॉर्पोरेट पदः किसी बड़ी

कंपनी या संस्था में डायरेक्टर या बड़े पदों पर आसीन रसूखदार, जिन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर राशन कार्ड की सूची में नाम जुड़वा रखा था।

Published on:
14 May 2026 03:25 pm