-हाल ही जर्मनी में इंडियन एम्बेसी ने वकील को सम्मानित किया है-इसी महीने मुंबई में मेहंदी हसन की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में किया परफॉर्म
जयपुर। गजल मैस्ट्रो उस्ताद अहमद हुसैन-उस्ताद मोहम्मद हुसैन के शागिर्द और भांजे मोहम्मद वकील को हाल ही इंडियन एम्बेसी, बर्मिंघम (यूनाइटेड किंगडम) में सम्मानित किया गया। आजादी का अमृत महोत्सव और जी-20 के तहत एम्बेसी की ओर से भारत सरकार के सलाहकार जरनल डॉ. शाशांक विक्रम ने वकील को सम्मानित किया। इसी महीने मुंबई में 13 जून को मेहंदी हसन की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में भी वकील ने उनकी गजलें सुनाकर स्वाराजंली दी। बीते 25 वर्षों से भारतीय संगीत और गजल गायकी को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने वाले वीकल कई बड़े सम्मान से नवाजे जा चुके हैं। एकेडेमी अवॉर्ड, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, सा रे गा मा मेगा फाइनल के विजेता रह चुके वकील कहते हैं कि जब वे भारत को अपनी गायकी के जरिए अन्य देशों में रिप्रेजेंट करते हैं, तो उन्हें बहुत गर्व महसूस होता है। पत्रिका प्लस से बातचीत में उन्होंने संगीत, गजल गायकी और नई पीढ़ी के इस जॉनर में आने पर चर्चा की।
गजल को सुनने वाले पहले से बढ़े हैं
मोहम्मद वकील ने बताया, 'मेहंदी हसन साहब ने सबसे पहले गजल गायकी को बुलंदियों पर पहुंचाया। उन्हीं को खिराज-ए-अकीदत पेश करने के लिए मुझे मुंबई में आमंत्रित किया गया था, जो मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। मुझे हाल ही संगीत की इबादत करते हुए 25 साल पूर हुए हैं, इसलिए भी मुझे इस कार्यक्रम में बुलाया गया था। रही बात गजल गायकी की, तो मैं एक संगीत परिवार से आता हूं और मैं अपने खानदान की सातवीं पीढ़ी हूं। हमारे बुजुर्ग राजगायक थे और हमारे नाना मरहूम उस्ताद अफजल हुसैन साहब और दादा उस्ताह मोहम्मद इस्माइल साहब का नाम संगीत जगत में बहुत सम्मान से लिया जाता है। मैंने 6 साल की उम्र में मंच पर गाने की शुरूआत की थी और अवॉर्ड जीता। सारेगामा फाइनल को जीते भी 25 साल हो गए। गजल एक ऐसी संगीत विधा है, जो हमेशा बरकरार रहेगी। हां, यह मैं जरूर मानता हूं कि पहुंचना है, तो हमें यूथ को वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स और गजल गायकी की शास्त्रीयता का मिश्रण पेश करना होगा। क्लासिकल संगीत आधारित गजल गायकी हमारा स्टाइल रहा है, इसलिए उससे अलग हम नहीं हो सकते। हालांकि अब नए लाग भी काफी गजल गायक आ रहे हैं और इसे यूथ पसंद भी कर रहा है। मैं अपने चैनल के जरिए भी युवाओं को गजल गायकी से जोडऩे का प्रयास कर रहा हूं।
लोग मुझे प्यार करते हैं, यही मेरे लिए काफी है
'वीर जारा' फिल्म के अलावा मैंने दो धारावाहिकों के लिए भी अपनी आवाज दी है। जगजीत सिंह साहब ने अपनी कम्पोजिशन में 'महाराजा रणजीत सिंह' में मुझसे एक क्लासिकल बंदिश 'बलमा रे चुनरिया' गवाई थी। खैयाम साहब के साथ मैंने धारावाहिक 'बिखरी आस निखरी प्रीत' में अलका याज्ञनिक के साथ गाया है। मैंने जगजीत जी के साथ पांच बार काम किया है। अनूप जलोटा, पंकज उधास, तलत अजीज, सोनू निगम, श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान, कविता कृष्णमूर्ति जैसे बड़े कलाकारों के साथ गाया है। संगीत के सुनने वाले मुझे बहुत पसंद करते हैं। मेरा मानना है कि गजल को लेकर बेकार का माहौल बनाया हुआ हे। अगर आपके पास अच्छी पोएट्री है, तो उसे गजल के रूप में आज भी लोग बहुत पसंद करते हैं। फिल्मों में आएगी तो और पॉपुलैरिटी मिलेगी।