जैसलमेर के लिए भजनलाल कैबिनेट ने सीमेंट और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को मंजूरी दी है। रामगढ़ में 3047 करोड़ रुपए के निवेश से सीमेंट प्लांट लगेगा, जबकि फतेहगढ़ और घोटारू में ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू होंगे। रेलवे लाइन के लिए भूमि आवंटन से परिवहन सुविधा बढ़ेगी और 800 से अधिक रोजगार के अवसर खुलेंगे।
जैसलमेर: मरुस्थलीय जिले जैसलमेर के दिन अब बहुरने वाले हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जैसलमेर के औद्योगिक विकास को लेकर कई ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगी है। सरकार के इस कदम से सीमावर्ती जिले में न केवल अरबों रुपए का भारी-भरकम निवेश आएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बंपर अवसर भी खुलेंगे।
जैसलमेर जो अब तक मुख्य रूप से पर्यटन और मरुस्थल के लिए जाना जाता था, वह अब राजस्थान का नया इंडस्ट्रियल और ग्रीन एनर्जी हब बनने की राह पर है। आइए जानते हैं कैबिनेट के इन फैसलों से जैसलमेर में क्या-क्या बदलने वाला है।
कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला सीमेंट संयंत्र को लेकर किया गया है। सरकार ने रामगढ़ तहसील में प्लांट लगाने के लिए 121.42 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। इस प्लांट पर करीब 3,047 करोड़ रुपए का भारी-भरकम पूंजी निवेश किया जाएगा। यहां 3.6 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाला अत्याधुनिक सीमेंट संयंत्र (क्लिंकराइजेशन यूनिट) स्थापित किया जाएगा।
इस विशाल प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरते ही क्षेत्र के 800 से 1,000 युवाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। जैसलमेर में जेके और वंडर सीमेंट फैक्ट्री का काम पहले ही शुरू हो चुका है। अब डालमिया, स्टार और अल्ट्राटेक जैसी कंपनियों के आने से आने वाले दिनों में यहां 5 से 7 बड़ी सीमेंट फैक्ट्रियों का संचालन शुरू हो जाएगा।
औद्योगिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कैबिनेट ने एक और अनोखा फैसला लिया है। मैसर्स जेके सीमेंट लिमिटेड को अपनी प्रस्तावित निजी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए 71.37 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक प्रयोजन के लिए आवंटित की गई है। यह जमीन जैसलमेर के सेलता, मोकला, हरचंदराम की ढाणी, खींवसर, पारेवर और ग्रामदानी ग्राम लाणेला क्षेत्र में आवंटित की जाएगी।
इस रेलवे लाइन के बनने से फैक्ट्रियों तक कच्चे माल को लाने और तैयार सीमेंट को देश के दूसरे हिस्सों में भेजने में बड़ी आसानी होगी, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में पंख लग जाएंगे।
सीमेंट के साथ-साथ जैसलमेर देश के नक्शे पर सौर और पवन ऊर्जा के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां पहले ही लगभग 10,000 मेगावाट के सोलर प्रोजेक्ट लग चुके हैं और इतने ही पाइपलाइन में हैं। अब कैबिनेट ने नए रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए भी भूमि आवंटन को हरी झंडी दे दी है। फतेहगढ़ तहसील के मगरा और बासड़ा गांव में जमीन दी जाएगी।
जैसलमेर तहसील के ऐतिहासिक घोटारू क्षेत्र में भी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए भूमि आवंटित होगी। इससे राजस्थान में 'ग्रीन एनर्जी' को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर तकनीकी व गैर-तकनीकी रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।