Dowry Death India: ट्विशा शर्मा केस के बाद उठा महिलाओं के खिलाफ अपराधों का मुद्गा, NCRB की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, दहेज के कारण हत्या आज भी हो रही है, आज भी मानसिक प्रताड़ना, क्रूरता और हिंसा की शिकार हो रही हैं महिलाएं। जेन Z घबराई, ऐसे हालात में कैसे देखें नए रिश्तों के सपने, शादी का क्रेज कम, नहीं बनना दुल्हन
Dowry Death India: भारत में महिलाओं की तरक्की, उनकी कामयाबी के डंके दुनिया भर में बज रहे हैं, जेन Z उनसे प्रेरणा ले रही है, वो मिसाल बन रही हैं ताकि सदियों से चली आ रहीं सामाजिक अपराधों की बेड़ियों से निकलें और समाज का नया चेहरा सामने आए… लेकिन अफसोस भारतीय समाज की ये औरत आज भी डर रही है… क्योंकि समाज है कि बदल ही नहीं रहा, हां सामाजिक अपराधों का चेहरा जरूर बदल गया है। बेटियों को ब्याह कर अपने घर ले जाने वाले परिवारों के बीच वो अपनेपन और सम्मान के लिए जूझ रही हैं, दहेज के लिए प्रताड़ना का तरीका बदल गया है। जो चुप हैं और जो विरोध पर उतरीं… मर तो आज भी दोनों ही रही हैं… हालात ये कि कामयाबी कम और जेन Z की युवतियों को शादी का खौफ सता रहा है… उनके मां-बाप उन्हें समझा रहे हैं अकेले रहो, नहीं करनी शादी, मत करो…बस सुरक्षित रहो, NCRB की रिपोर्ट जवाब है उन लोगों को चुप करने का जो अकेली औरत को भी जीने नहीं देते…. पढ़ें संजना कुमार की दिल दहला देने वाली रिपोर्ट
रागिनी तन्ना (बदला हुआ नाम) 45 की उम्र पार कर चुकी हैं। शादी नहीं की, परिवार के ताने सुनसुनकर वो इतनी आहत हुई कि दो साल पहले अलग हो गई। छतरपुर से भोपाल ट्रांसफर लिया और यहीं घर भी खरीद लिया। 5 मंजिला बिल्डिंग के 2nd फ्लोर पर रहती हैं। बिल्डिंग के लोगों से अच्छी पटती है। खुश रहती हैं। लेकिन शादी के सवाल पर खफा हो गईं, आइंदा कोई बात मत करना। लेकिन कहती हैं आदमियों पर भरोसा नहीं। कई उदाहरण देती हैं अपने रिश्ते-नातेदारों के कैसे इन परिवारों की बेटियों को ससुराल छोड़़कर अपने माता-पिता के घर लौटना पड़ा। बराबरी की बात करने वाले समाज को दोगला कहकर सवाल उठाती हैं, कौन कहता है भारत बदल रहा है। औरतों के लिए वो आज तक नहीं बदला और कभी नहीं बदलेगा। लोग बातें बनाते हैं, उनके चरित्र पर सवालिया निशान लगाते हैं। कई बार खुद सुन लेती हैं, लेकिन अब इग्नोर करने की आदत पड़ गई है।
भोपाल की रहने वाली सरिता माहिर (बदला हुआ नाम) कहती हैं। पांच साल से वह अपने घर में रह रही हैं। फ्लैट में उनके अलावा कोई नहीं रहता। शादी नहीं की। नौकरी के चक्कर में यहां रह रही हैं। परिवार छिंदवाड़ा में रहता है। परिवार के लोग उनसे मिलने आते हैं, कभी वो परिवार के पास चली जातीं हैं। लेकिन कभी किसी ने सवाल नहीं किया कि शादी क्यों नहीं कर रहीं। वो कहती हैं उनका नेचर ऐसा है कि किसी से उनकी पटरी नहीं खाएगी। इसलिए शादी नहीं करतीं। लेकिन मिलने-जुलने वाले यहां तक कि कई बार ऑफिस के लोग भी उनसे शादी करने की बात कह देते हैं। वह कहती हैं मुस्कुराती हैं, जवाब भी देती हैं। लेकिन फिर पूछती भी हैं कि क्यों शादी करना इतना जरूरी क्यो है? अकेले नहीं रह सकते क्या? एक दिन तो अकेले में रोना भी पड़ा जब किसी से सुना कि उन्हें लेकर चर्चा है कि कई लड़कों से चक्कर है। लेकिन उसी दिन कसम खाई, ऐसे रही तो जी नहीं सकूंगी, इससे तो बेहतर है मस्त रहो।
सागर की रहने वाली और जेन Z में आने वाली 23 साल की रीना पटवर्धन कहती है, ट्विशा का मामला सामने आने के बाद पेरेंट्स इतना डर गए हैं कि अब कहते हैं शादी नहीं करनी है, मत करो, बस खुश रहो और सुरक्षित रहो। रीना कहती हैं परिवार वाले डेढ़ साल से एक रिश्ते को लेकर पीछे पड़े हैं। हम ना, ना करके थक गए। उन्हें लगता है पहला रिश्ता ठुकराना नहीं चाहिए, कोई कमी नहीं है। लेकिन वह खुद सोचती है कि अब डर लगता है किसी पर भरोसा नहीं कर सकते। आए दिन ऐसी खबरों ने शादी का क्रेज ही खत्म कर दिया है। छेड़छाड़ हो या फिर धोखेबाजी... और शादी के बाद ससुराल में जगह बनाने की मशक्कत, दहेज के लिए मानसिक प्रताड़ना या फिर हत्या... आखिर किन-किन मुश्किलों से गुजर रही हैं, लड़कियां, हम तो अकेले ही सही हैं।
जयपुर की रहने वाली गौसिया (बदला हुआ नाम) कहती हैं... शादी को दो साल हुए हैं। घर वालों को मनाकर लव मैरिज की है। वो भी जॉब करती हैं और पति भी। चाहते थे सादगी से शादी हो। हुई भी। प्रेरणा बनना चाहते थे दहेज लेना तो दूर परिवार ने बात तक नहीं की। लेकिन शादी के बाद अक्सर सास कहती हैं, घर जाती हो, क्या तुम्हारी मम्मी तुम्हें सोने का सामान नहीं देतीं। इनडायरेक्ट वे में दहेज की ये मांग मानसिक रूप से प्रताड़ना है। लेकिन समझदारी से हैंडल करती हूं। फिर भी कभी याद आती है तो दो आंसू तो गिर ही जाते हैं। आखिर कब बदलेगा हमारा समाज?
'ट्विशा शर्मा की मौत का रहस्य अब भी बरकरार है। जांच जारी है। पति 7 दिन की पुलिस रिमांड पर है। कई खुलासे होने की उम्मीद है।' लेकिन पिछले कुछ केसेस ने जेन Z की लड़कियों की सोच बदलकर रख दी है। ट्विशा का सही नाम है त्विशा शर्मा, त्विशा यानी रोशनी, चमक, लेकिन दहेज के लिए हो रहे अपराध बताते हैं, हम चांद पर पहुंच चुके हैं, लेकिन उसकी चांदनी की कद्र तब भी नहीं सीख पा रहे।
Crime in India 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में महिलाओं पर अत्याचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। औसतन हर दिन 16-17 बेटियों की मौत के मामले सिर्फ दहेज प्रताड़ना से जुड़े हैं। यानी हर घंटे एक बेटी अपनी जान गंवा रही है।
हमारी सरकारें भले ही महिला सुरक्षा के दावे कर रही हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की बात कर रही हैं। लेकिन NCRB की रिपोर्ट फिर भी डरा ही रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में महिलाओं के खिलाफ कुल 4.48 लाख से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता की कहानी सुनाते हैं। इस श्रेणी में 1,33,676 मामले दर्ज किए गए हैं। यानी महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों मे लगभग 30 फीसदी मामले ऐसे हैं।
NCRB की रिपोर्ट बताती है कि भारत में दहेज प्रताड़ना के मामले कम होने के बजाय बढ़े हैं। 2023 में दहेज निषेध अधिनियम के तहत 15,489 मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले 2022 के मुकाबले 14 प्रतिशत ज्यादा दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति दहेज के लिए बेटियों की हत्या के मामलों के हैं। इस श्रेणी के मामलों में रिपोर्ट में बताया गया है कि देशभर में दहेज के लिए हत्याओं के 2023 में कुल 6,156 मामले दर्ज किए गए हैं। इसका अर्थ ये है कि हर दिन करीब 17 महिलाओं की जान चली जाती है।
देश के राज्यों की बात करें तो रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के इन मामलों में सबसे पहले पायदान पर उत्तर प्रदेश का नाम है। यहां दहेज निषेध कानून के तहत 7,151 मामले दर्ज किए गए हैं और 2122 महिलाओं की मौत दहेज हत्या के मामलों में हुई है। बिहार दूसरे नंबर पर है जहां 1,143 मामले दर्ज हुए। जबकि मध्य प्रदेश का तीसरा स्थान है।
NCRB की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 232 केस IPC और 2018 केस नए BNS कानून के तहत दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा कहता है शादी के बाद दहेज प्रताड़ना के केस आज भी महिलाओं की जान ले रहे हैं। बता दें कि दहेज हत्या के मामलों में एमपी का स्थान देश में तीसरा है।
रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में पति ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के 7514 मामले सामने आए। इनमें 4626 केस IPC और 2888 केस BNS के तहत दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और दहेज के लिए दबाव जैसे अपराध राज्य में बड़ी संख्या में हो रहे हैं। पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के मामलों में एमपी का सातवां स्थान है।
NCRB रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि घरेलू हिंसा केवल छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों तक सीमित रहने वाली समस्या नहीं रह गई। बड़े शहरों में भी महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़े ही हैं। रिपोर्ट कहती है इंदौर, दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में महिलाओं के खिलाफ अपराध का ग्राफ काफी ऊंचा है।
महिलाओं के खिलाफ इस तहर बढ़ते अपराधों के बीच कैसे नए रिश्तों के सपने देखेंगी हमारी पीढ़ियां, चंद मामलों के ये 4 उदाहरण बताते हैं, क्रूरता, हिंसा और हत्याएं जेन Z का रिश्तों से भरोसा तोड़ रही हैं। वो अपने ही माता-पिता, भाई-बहनों के साथ जीना चाहती हैं। छोटी सी जिंदगी को जिंदादिल अंदाज में हंसते-मुस्कुराते जीना चाहती हैं। लेकिन शादी को हां नहीं करना चाहतीं।