
सतना. सतना-बेला फोर लेन बाईपास का प्रस्ताव 2010 में सामने आया था तब जिले वासियों को सतना से रीवा तक बेहतर और सुगम यातायात मिलने की उम्मीद जागी थी। 48 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के प्रस्ताव को सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति ने 10 अगस्त 2011 को अनुमोदित कर दिया था। तब माना गया कि शीघ्र काम प्रारंभ होगा और दो-तीन साल में इस फोर लेन में आवागमन प्रारंभ हो जाएगा। लेकिन अब वर्ष 2022 के अंतिम पड़ाव में चल रहे हैं लेकिन अभी भी यह राजमार्ग पूरा नहीं हो सका है। विभाग के अफसरों की नजर में अब थोड़ा बहुत ही काम बचा हुआ है लेकिन जनता की नजर में 11 साल बाद भी थोड़ा बहुत शेष काम इसके अधूरे होने गवाही माना जा रहा है। अब इसी अधूरे फोरलेन का लोकार्पण 10 दिसंबर को केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी मुख्यमंत्री की मौजूदगी में करने जा रहे है।
शुरुआत ही विलंब से हुई
सतना बेला फोर लेन राजमार्ग में विलंब का साया इसकी शुरुआत से ही जुड़ गया था। जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट के अनुमोदन के बाद काम की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। प्रोजेक्ट का टेंडर टाप वर्थ कंपनी को दिया गया था। टाप वर्थ ने खुद इस काम को न करते हुए पेटी में इसका ठेका दिलीप बिल्डकॉन को दे दिया था। जब 50 फीसदी काम पूरा हो गया तो दोनों कंपनियों में पैसे को लेकर विवाद हो गया। विवाद के बाद पेटी कंपनी ने काम छोड़ दिया। इस दौरान लगभग 3 साल तक विवाद के चलते काम बंद जैसा ही रहा। बंद काम को लेकर जब शासन प्रशासन सहित सरकार की किरकिरी होने लगी तो राज्य और केन्द्र सरकार की मध्यस्थता के बाद दिलीप बिल्डकान ने काम शुरू किया। 3 से 4 माह के बाद दोनों कंपनियों में फिर से विवाद प्रारंभ हो गया जिससे 2018 तक कार्य रुका रहा। इसके बाद बैलेंस वर्क का नया टेंडर दिया गया।
दिसंबर 2019 तक पूरा होना था काम
बैलेंस वर्क का टेंडर श्रीजी कन्स्ट्रक्शन को दिया गया। जुलाई 2018 में बैलेंस वर्क का वर्क आर्डर जारी किया गया और जिसकी आखिरी डेड लाइन दिसंबर 2019 रखी गई। लेकिन समय पर यह एजेंसी भी काम नहीं पूरा कर सकी। लिहाजा इसे 3 माह का एक्सटेंशन दिया गया। फिर मार्च 2020 में कोरोना का लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन का हवाला देते हुए फिर से 3 माह का एक्सटेंशन ले लिया गया। फिर एजेंसी ने काम पूरा नहीं होने पर 6 माह का एक्सटेंशन ले लिया। तब कहा गया कि मार्च 2021 में काम पूरा हो जाएगा। लेकिन काम पूरा नहीं होने पर नवंबर तक का फिर एक्सटेंशन लिया। लेकिन अभी तक यह काम पूरा नहीं हो सका है।
यह सब अधूरा
दो गुनी हो गई लागत
विभागीय जानकारों का कहना है कि जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तब इसकी लागत 175 करोड़ रुपये के आस पास थी। अब लेट लतीफी के कारण इसकी लागत 358 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो गई है। इसमें से भी बड़े पैमाने पर गड़बडझाला करते हुए ठेकेदार, नेता और अधिकारियों ने अपनी झोली भरी है। इसी ठेकेदार अपनी लीड का पैसा बचाने के लिए मटेहना इंडस्ट्रियल एरिया की जमीन खोद डाली। जिससे यहां अब एक दर्जन के लगभग करोड़ों के प्लाट खत्म हो गए।