सतना

satna: स्कूल मरम्मत के नाम पर मिले साढ़े 7 करोड़ रुपये में हेराफेरी

स्कूलों में आधा अधूरा काम करवा कर रकम गटकने का खेल शुरू जिला पंचायत शिक्षा समिति की अध्यक्ष ने पकड़ा गड़बड़झाला

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Jan 09, 2023
satna: स्कूल मरम्मत के नाम पर मिले साढ़े 7 करोड़ रुपये में हेराफेरी
Satna: Rs 7.5 crore found rigged in the name of school repair

सतना. स्कूल शिक्षा विभाग ने सतना जिले की 255 हायर सेकण्डरी एवं हाईस्कूलों की मरम्मत के लिये 7.65 करोड़ रुपये का आवंटन जारी किया है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को 3-3 लाख रुपये दिए गए हैं। लेकिन स्थिति यह है कि संस्था प्रमुख तय प्रक्रिया और नियमों का पालन न करते हुए ठेकेदारों से सांठगांठ कर राशि को खुर्द बुर्द करने में जुट गए हैं। कई विद्यालयों में नाम मात्र की मरम्मत का काम कराते हुए पूरी राशि के आहरण के लिये सौदेबाजी कर रहे हैं। इस तरह की तमाम शिकायतें आनी शुरू हो गई हैं तो जिला पंचायत की उपाध्यक्ष और शिक्षा समिति की अध्यक्ष सुष्मिता सिंह ने खुद इस तरह की गड़बड़ी पकड़ते हुए इसकी वृहद जांच की मांग कलेक्टर और जिपं सीईओ से की हैं।

उपाध्यक्ष की जुबानी

जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुष्मिता सिंह ने पत्रिका को बताया कि महिदल स्कूल के प्राचार्य ठेकेदार के साथ सौदेबाजी का खेल कर रहे हैं। उनका कहना है कि सिर्फ एक लाख रुपए खर्च करना है बाकी राशि हमें चाहिए। यही स्थिति महुड़र की है। यहां भी इसी तरह आधा अधूरा काम करवा कर पूरी राशि चाही जा रही है। स्कूलों से ठेकेदारों को यह बताया जा रहा है कि 10 फीसदी राशि तो उपर ही पहुंचानी है। उपाध्यक्ष ने कहा कि यह राशि शासन ने खस्ताहाल हो रही स्कूलों की मरम्मत के लिये दी गई है लेकिन जिस तरीके का जिले में खेल चल रहा है उससे स्कूलों में अपेक्षित मरम्मत के काम तो नहीं हो रहे बल्कि यह राशि चारागाह बन गई है।

यह है नियम

विद्यालयों को मरम्मत के लिये जो राशि जारी हुई है वह जिला शिक्षाधिकारी के डीडीओ कोड में आवंटित होगी। यहां से मरम्मत के उपरांत राशि ठेकेदार के खाते में दी जाएगी। इसके लिये पहले विद्यालय की शाला प्रबंध समिति (एसएमसी) की बैठक आयोजित करके विद्यालय में क्या-क्या काम होने हैं उसका निर्धारण किया जाना है। उसके बाद काम के अनुसार आम सूचना जाहिर करते हुए ठेकेदारों से कोटेशन आमंत्रित करना है। इसकी आम सूचना संबंधित पंचायत भवन में भी चस्पा करना है। काम होने के बाद एसएमसी से इसका प्रमाणीकरण करवाने के बाद काम के पहले और बाद के फोटोग्राफ सहित उपयोगिता प्रमाण पत्र बिल प्रस्तुत करना है। इसके बाद भुगतान होगा।

यह नहीं हो रहा है

ज्यादातर विद्यालयों में एसएमसी की न तो बैठक आयोजित की गई और न ही काम का निर्धारण करवाया गया। पंचायत भवन में काम की सूचना भी चस्पा नहीं की गई। इस वजह से गांव के सरपंच सचिव सहित कई लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। गुपचुप तरीके से प्राचार्य ही ठेकेदारों से संपर्क कर अपने स्तर पर मरम्मत के नाम पर लीपापोती कर रहे हैं।

'' हम इस पूरे मामले की जांच करवाएंगे। जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय से किए गए काम और भुगतान की जानकारी ली जाकर परीक्षण भी करवाया जाएगा। '' - डॉ परीक्षित झाड़े, जिपं सीईओ

Published on:
09 Jan 2023 01:11 pm