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Dholpur: कछुआ चाल…एक माह में एक किमी ही नाला हुआ साफ

धौलपुर. नेशनल हाइवे ऑफ अथॉरिटी अपनी पिछली गलतियों से सीख नहीं ले रहा है। यही कारण है कि अभी तक एनएचएआई के नालों की सफाई कार्य अधर में है, जबकि मानसून सिर पर है। विभाग ने नालों की सफाई कार्य शुरू कर तो दिया है, लेकिन कार्य इतनी धीमी गति से किया जा रहा है कि एक माह में केवल एक किमी ही एक तरफ का नाला साफ हो पाया है।

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धौलपुर. नेशनल हाइवे ऑफ अथॉरिटी अपनी पिछली गलतियों से सीख नहीं ले रहा है। यही कारण है कि अभी तक एनएचएआई के नालों की सफाई कार्य अधर में है, जबकि मानसून सिर पर है। विभाग ने नालों की सफाई कार्य शुरू कर तो दिया है, लेकिन कार्य इतनी धीमी गति से किया जा रहा है कि एक माह में केवल एक किमी ही एक तरफ का नाला साफ हो पाया है। जिससे मानसून तक हाइवे के दोनों तरफ (12 किमी) के नालों की सफाई हो पाना मुश्किल लगता है।

एनएचएआई के नालों की सफाई सालों से नहीं होने के कारण नाले चौक हैं। जिसके चलते गत वर्ष शहर में होने वाले जलभराव में इन नालों ने भी महती भूमिका अदा की थी। नाले साफ नहीं होने और जलभराव के कारण प्रशासन और मीडिया के मामला उठाने के बाद एनएचएआई को इन नालों की सुध आई और नाले साफ किए गए, लेकिन उस वक्त भी नाला सफाई का कार्य केवल खानापूर्ति तक ही सीमित रहा। एनएचएआई ने नाले साफ तो किए लेकिन कुछ-कुछ जगह और अधिकतर जगहों पर नाले यूं ही छोड़ दिए गए। इस दौरान वाटर वक्र्स स्थित पेट्रोल पंप से गुलाब बाग तक नालों की सफाई की गई, जबकि अन्य जगहों पर कोई ध्यान नहीं दिया। तो वहीं इस सीजन भी ऐसा ही दृश्य फिर दिखाई दे रहा है। विभाग इन दिनों नालों की सफाई करा रहा है। यह सफाई नारायण ढाबे से प्रारंभ हुई है जो कि सागरपाड़ा तक होगी। सफाई कार्य को प्रारंभ हुए एक माह का समय तक हो चुका है, लेकिन इस एक माह में अभी तक केवल एक किलोमीटर यानी सुंदर कालोनी तक ही नाला साफ हो पाया है। यानी देखा जाए तो अभी सागर पाड़ा तक नालों की सफाई शेष है और उसके बाद दूसरे ओर के नालों की सफाई की जानी है। वहीं मानूसन अपने आगमन की तैयारियों में है। ऐसी स्थिति में मानसून से पहले एनएचएआई के नालों की सफाई होना मुश्किल ही दिखता है।

सुंदर कालोनी तक ही नाला हुआ साफ

एनएचएआई नेशनल हाइवे 44 के नालों की सफाई करा रहा है। सफाई कार्य विगत 10 दिनों से जारी है इन दिनों में अभी तक एक किलोमीटर ही नालों की सफाई कार्य किया गया है, लेकिन इस एक किलोमीटर के सफाई कार्य में यह बात सामने आ चुकी है कि नालों की हालात क्या है और इनकी सफाई सालों से नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक सुंदर कालोनी तक इस एक किलोमीटर की दूरी में एक तरफ के नाले से ही 250 ट्रॉलियां सिल्ट की निकली हैं, जो यह बयां करती है कि नालों की सफाई को लेकर एनएचएआई अभी तक कितना संवेदनशील थी।

सफाई के दौरान तोड़ा फुटपाथ, मलबा नाले में भरा

एनएचएआई नालों पर बने फुटपाथ या अतिक्रमण को हटा उनकी सफाई तो करा रहा है, लेकिन पुन: नालों का कवर नहीं किया जा रहा। जिससे लोगों सहित निराश्रित गोवंशों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। गत वर्ष वाटर वक्र्स क्षेत्र में कराई गई सफाई के दौरान भी ऐसा ही किया गया, और नालों के ऊपर बने पक्के फुटपाथ को ध्वस्त कर उन्हें ऐसा ही छोड़ दिया गया। जिससे खुले नाले में आए दिन गोवंश गिरकर घायल हो रहा है। एक-दो जगह तो नाले से हटाए फुटपाथ का मलबा नाले में ही पड़े हुए छोड़ दिए गए जिससे नाले सफाई के बाद भी दोबारा वहां नाला चौक हो रहे हैं। इसके अलावा गत वर्ष नाला सफाई के दौरान नालों से निकाली गई सिल्ट को भी वहीं नाले किनारे छोड़ दिया गया है, जिसे अभी तक भरा ही नहीं गया। यह सिल्ट आज भी यथा स्थिति में नाले किनारे पड़ी और धीरे-धीरे नाले में ही समाहित हो रही है। एक दो बारिश में यह सिल्ट पूर्ण रूप से नाले में ही भर जाएगी। अब ऐसी स्थिति में एनएचएआई के नाला साफ करने का क्या औचित्य रह जाएगा।

बाड़ी हाइवे के चौक नाले हाइवे के समतल आए

धौलपुर-बाड़ी हाइवे की भी कहानी एक समान है। यहां के भी नालों का उद्धार सालों से नहीं हुआ। गुलाब बाग से लेकर हाउसिंग बोर्ड तक नाले मिट्टी से भरे पड़े हैं जो हाइवे के समतल हो चुके हैं। इन नालों के सालों से साफ नहीं होने के कारण बारिश के पानी की जलनिकासी और आसपास के क्षेत्रों की जलनिकासी नहीं हो पाती। जिसका परिणाम लोगों को जलभराव के रूप में देखने को मिलता है। हालांकि कुछ जगहों पर नालों की सफाई कार्य किया गया है, लेकिन यहां भी कार्य सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित है।

Published on:
24 May 2026 07:30 pm
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