Cancer Treatment: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में उदयपुर के वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है।
उदयपुर। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में उदयपुर के वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मोहनलाल सुखाड़िया विवि के फिजिक्स डिपार्टमेंट की मैग्नेटिज्म लेबोरेटरी के रिसर्चर्स ने एक इंटरनेशनल टीम के साथ मिलकर गन्ने के रस की मदद से विशेष जिंक-कैल्शियम फेराइट नैनो-पार्टिकल्स तैयार किए है, जो कैंसर सेल्स को नष्ट कर सकते है। यह रिसर्च प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ फिजिक्स डीः एप्लाइड फिजिक्स में प्रकाशित हुई है।
इस शोध में उदयपुर के वैज्ञानिकों के साथ-साथ अमरीका, जर्मनी, इस्त्राइल और भारत के अन्य प्रमुख संस्थानों (जैसे एनआईटी तिरुचिरापल्ली, जेएसएस ऊटी और डी.वाई. पाटिल यूनिवर्सिटी कोल्हापुर) के विशेषज्ञों ने भी सहयोग किया है। वर्तमान में कैंसर के इलाज के लिए मैग्नेटिक हाइपरथर्मिया तकनीक पर काफी काम हो रहा है।
इस तकनीक में कैंसर प्रभावित हिस्से में चुंबकीय नैनो कणों को डालकर एक बाहरी अल्टरनेटिंग चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाता है, जिससे ये कण गर्म होते हैं और कैसर कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने ग्रीन सिंथेसिस यानी पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक तरीके को चुना, जिसमें ईंधन और कोटिंग एजेंट के रूप में ताजे गन्ने के रस का इस्तेमाल किया गया।
मानव शरीर के लिए 100% सुरक्षितः इंसानी फेफड़ों की कोशिकाओं पर किए गए परीक्षण में यह सामने आया कि गन्ने के रस से बने यह कण बेहद सुरक्षित है। इन नैनोकणों की मदद से कैंसर की दवाओं को सीधे प्रभावित अंगों तक सुरक्षित रूप से कैप्सूल की तरह ले जाया जा सकता है, जिससे शरीर के बाकी हिस्सों पर कीमोथेरेपी जैसा बुरा असर नहीं पड़ता।
कैंसर थेरेपी में सटीक हीटिंगः इन नैनोकणों को मुख्य रूप से कैंसर थैरेपी (चिकित्सा) के लिए विकसित किया जा रहा है। जब इन कणों को शरीर के अंदर कैंसर ट्यूमर के पास पहुंचाकर बाहर से एक अल्टरनेटिंग चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाता है, तो ये कण तेजी से गर्म होने लगते हैं। इनका तापमान 41 से 15 डिग्री तक पहुंच जाता है, जो स्वस्थ कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हुए कैंसर कोशिकाओं को मारकर नष्ट कर देता है।
आमतौर पर नैनोकणों को बनाने के लिए महंगे और हानिकारक रसायनों (जैसे सिट्रिक एसिड आदि) का उपयोग होता है। रिसर्च में पाया कि ताजे गन्ने के रस में मौजूद प्राकृतिक ग्लूकोज, सुक्रोज और कार्बनिक अम्ल न केवल धातुओं को बेहद कम तापमान 50 डिग्री से. पर नैनो रूप में बदलने में मदद करते हैं, बल्कि वे इन नैनोकणों के ऊपर एक प्राकृतिक रक्षात्मक परत (कैपिंग) भी बना देते हैं।
अध्ययन से स्पष्ट हुआ कि यह प्रक्रिया कैंसर कोशिकाओं के लिए अत्यंत प्रभावी है, क्योंकि यह कोशिकीय तनाव उत्पन्न कर प्रोग्राम सेल्स को नष्ट करती है। 45 डिग्र सेंटीग्रेड पर 30 मिनट के उपचार के बाद इन नैनोहीटरों ने लंग कैंसर सेल् लाइन की जीवितता को लगभग 55% तक कम कर दिया, जबकि स्वस्थ् मानव किडनी सेल लाइन पर कोड उल्लेखनीय प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। शोध अभी प्रयोगशाला स्तन पर है, लेकिन भविष्य में मरीजों क बहुत ही कम कीमत में इसके महत्वपूर्ण फायदे मिल सकते हैं।
विवि के साइंस कॉलेज के भौतिकी विभाग के प्रो. सुधीश कुमार ने बताया कि यह रिसर्च बुनियादी भौतिकी और चिकित्सा विज्ञान का एक खूबसूरत मेल है। हालांकि चुंबकीय खिंचाव के कारण कणों की हीटिंग क्षमता थोड़ी प्रभावित होती है, लेकिन लो-टेंपरेचर मैग्नेटिज्म के क्षेत्र में यह एक बड़ी खोज है। भविष्य में इसके आकार-कोटिंग को सुधार कर कैंसर के अचूक और सस्ते इलाज के रूप में स्थापित कर सकेंगे।