पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम और डीजल संकट से ट्रकों की आवक आधी रह गई है, जिससे बाजारों में सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है। ढुलाई महंगी होने से दाल, तेल, चीनी, फल और सब्जियों समेत रोजमर्रा की चीजों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। महंगाई का सीधा असर आम लोगों की रसोई और घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
उदयपुर. पेट्रोल-डीजल के दामों में एक बार फिर हुई बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पहले से महंगाई की मार झेल रहे शहरवासियों के लिए अब रसोई चलाना और मुश्किल होता जा रहा है। डीजल की कीमत बढ़ने और कई राज्यों में किल्लत के कारण ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर मंडियों में खाद्यान्न, फल-सब्जी और रोजमर्रा के सामान की आवक पर पड़ा है।
रोजाना 50 से 60 ट्रकों से आने वाला माल घटकर 20 से 30 ट्रकों तक सिमट गया है। लंबी दूरी के ट्रक या तो देरी से पहुंच रहे हैं या फिर माल लेकर आने से कतरा रहे हैं। इसका असर अब हर घर की रसोई और हर बाजार की कीमतों में दिखाई देने लगा है।शनिवार सुबह छह बजे से पेट्रोल 93 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। पेट्रोल अब 110.66 रुपए और डीजल 95.80 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। साथ ही परिवहन लागत बढ़ने से दाल, चावल, तेल, शक्कर, फल और सब्जियों तक के दाम तेजी से ऊपर जाने लगे हैं।
ट्रांसपोर्टरों ने बढ़ाया भाड़ा
व्यापारियों का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमत और कई राज्यों में सीमित सप्लाई के कारण ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा 15 से 25 हजार रुपए तक बढ़ा दिया है। इसका असर सीधे बाजार पर पड़ रहा है।
तेल व्यापारी अनिल जैन ने बताया कि गुजरात से आने वाली गाड़ियां अब 7 से 8 दिन में पहुंच रही हैं। बढ़े हुए भाड़े के कारण तेल के प्रति टीन पर 100 से 150 रुपए तक का असर पड़ा है।
चीनी व्यापारी हंसराज पोखरना ने कहा कि सूरत और नवसारी से आने वाली गाड़ियों की संख्या में भारी कमी आई है। भाड़ा बढ़ने से चीनी के भाव में करीब 150 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है।
श्री उदयपुर दाल-चावल व्यापार संघ के महामंत्री राजकुमार चित्तौड़ा ने बताया कि जयपुर और जोधपुर से आने वाले ट्रक अब पूरा लोड नहीं मिलने तक रवाना नहीं हो रहे। पहले 24 घंटे में माल पहुंच जाता था, अब आठ से दस दिन लग रहे हैं। इससे दाल और चावल के दाम 5 से 7 रुपए किलो तक बढ़ गए हैं।
खाद्यान्न व्यापारी गणेशलाल अग्रवाल ने कहा कि किसानों से पहले ही कम माल आ रहा था, अब ट्रकों की कमी ने स्थिति और बिगाड़ दी है। गेहूं में भी करीब 150 रुपए प्रति क्विंटल तक तेजी आ चुकी है।
आम से आलू तक सब महंगे
फल व्यापारियों के अनुसार सबसे ज्यादा असर फलों और बाहर से आने वाली सब्जियों पर पड़ा है। फ्रूट व्यापारी हेमंत अछवानी ने बताया कि इस समय आम का सीजन होने के बावजूद पर्याप्त आवक नहीं हो पा रही। हैदराबाद, विजयवाड़ा और तिरुपति से आने वाले आम पर 20 से 25 हजार रुपए अतिरिक्त भाड़ा लग रहा है। गुजरात और महाराष्ट्र से आवक लगभग ठप है। हर साल इस समय आम सस्ते हो जाते थे, लेकिन इस बार लगातार तेजी बनी हुई है।
श्री सब्जी फ्रूट व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश खिलवानी ने बताया कि पहले आलू, प्याज और लहसुन की 12 से 15 गाड़ियां आती थी, जो अब घटकर 7 से 8 रह गई हैं। होलसेल में 2 से 3 रुपए और रिटेल में 4 से 5 रुपए किलो तक बढ़ोतरी हुई है। नासिक और यूपी से आने वाले आलू-प्याज की आवक कम हुई है।
पेट्रोल-डीजल के नए भाव
ईंधन 22 मई 23 मई बढ़ोतरी
पेट्रोल 109.73 110.66 0.93
डीजल 94.89 95.80 0.91
स्पीड/पावर पेट्रोल 119.37 120.31 0.93--
असर एक नजर में
मंडियों में ट्रकों की संख्या आधी हुई
दाल-चावल 5 से 7 रुपए किलो महंगे- तेल के टिन पर 100 से 150 रुपए असर
चीनी में 150 रुपए प्रति क्विंटल तेजी- फल-सब्जियों के दामों में लगातार उछाल
रसोई का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित
महिलाओं की पीड़ाहर हफ्ते कीमतें बदल रही हैं। तेल, दाल और सब्जियों के बढ़ते दामों ने घर का पूरा हिसाब बिगाड़ दिया है। बच्चों की जरूरत और रसोई के खर्च में संतुलन बैठाना मुश्किल हो गया है।
तरुणा नागदा, गृहिणी
बच्चों की पढ़ाई, बिजली बिल और रसोई के खर्च के बाद बचत खत्म हो गई है। महंगाई अब सीधे मध्यमवर्गीय परिवारों की जिंदगी और भविष्य की योजनाओं पर असर डाल रही है।
पिंकी चित्तौड़ा, कामकाजी महिला
हर बार पेट्रोल-डीजल महंगा होता है तो बाजार में हर चीज के दाम बढ़ जाते हैं। अब फल और अच्छी सब्जियां खरीदने से पहले कई बार सोचना पड़ता है।
हीना जैन, गृहिणी