
Bandhavgarh Tiger Reserve news: उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ का शव मिलने के बाद से वहां खामोशी छाई हुई है। वन विभाग ही नहीं टूरिस्ट भी उस बाघ के जाने से बेहद दुःखी हैं। यह बाघ टूरिस्ट का फेवरेट। नाम था 'पुजारी'।
जब भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की बात होती है तो 'पुजारी' नाम के इस बाघ की जरूर चर्चा होती थी। इसे पूरे क्षेत्र की आत्मा भी कहा जाता था। यह टाइगर फोटो खिंचाने का शौकीन था। काफी देर तक वो पर्यटकों के सामने खड़ा हो जाता था। दुखद यह है कि एक अन्य बाघ से संघर्ष में 'पुजारी' की मौत हो गई।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सोमवार को सुबह 6.30 बजे के आसपास खेतौली वन परिक्षेत्र के पश्चिमी बगदरी बीट के ढमढमा कैंप के वनकर्मियों को बांघों के लड़ने की आवाज सुनाई दी थी। श्रमिक बताते हैं कि दोनों ही बाघों की दहाड़ की आवाजें काफी तेज थी, जो दूर-दूर तक गूंज रही थीं। इसी आवाज को सुनकर गश्ती दल ढमढमा क्षेत्र की छानबीन करने पहुंच गया। इतने में बाघों की दहाड़ खामोश हो चुकी थी। वर्चस्व की लड़ाई (territorial fight) के बाद गश्ती दल को एक बाघ मृत अवस्था में मिला था।
बांधवगढ़ की शान माने जाने वाले इस बाघ का उपनाम 'पुजारी' था। 8 साल का यह बाघ दूसरे जंगल के बी-1 नामक बाघ से डरता था। यह बाघ ऐसा था जो पर्यटकों के आसपास तक आ जाता था। इस दौरान पर्यटकों को फोटो खींचने का काफी मौका देता था। पर्यटक उसकी रॉयल वॉक के दीवाने थे।
फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय ने मीडिया को बताया कि ढमढमा कैंप में मौजूद वनकर्मियों ने रविवार रात को भी दो बाघों के बीच दहाड़ने और लड़ने की आवाज़ें सुनीं थी। उन्होंने निगरानी जारी रखी और सोमवार सुबह तक तलाशी अभियान शुरू कर दिया था। इसी इलाके में एक बाघ का शव मिला, जिसका नाम 'पुजारी' था। शुरुआती जांच में लग रहा है कि बाघ की मौत अपने इलाके को लेकर हुए संघर्ष के कारण हुई है और उसके शरीर पर हमले के निशान भी मिले हैं।
मृत बाघ पुजारी की मौत गर्दन की हड्डी टूटने से बताई जाती है। उसके शरीर पर कई घाव के निशान थे, जिससे अधिक खून बहने की आशंका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बाघ के शरीर पर हमले के निशान थे, लेकिन उसके सभी अंग सुरक्षित थे। फारेस्ट के अधिकारी कहते हं कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत इस मामले की जांच चल रही है।
सोशल मीडिया पर भी बाघ पुजारी की मौत से शोक की लहर है। कई यूट्यूबर और फोटोग्राफर भी उसके जाने से बेहद दुखी हैं। उनका कहना है कि जंगल सफारी के दौरान पुजारी की जब साइटिंग होती थी तो वो अक्सर जिप्सी के सामने आ जाता था। और काफी देर तक फोटो खींचने का मौका देता था। ऐसा लगता था कि वो खुद ही फोटो खिंचाने आया हो। वाइल्ड लाइफ लवर्स के लिए यह बेहद दुख की घड़ी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अलविदा, जेंटलमैन, तुम्हारी वो 'रॉयल वॉक' हमेशा याद आएगी।
पुजारी की मौत के बाद मध्यप्रदेश में एक साल में 33 बाघों की मौत हो चुकी है। देश के टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में इस प्रकार बाघों की संख्या कम होने से चिंता का भी विषय है। क्योंकि ऐसे ही बाघों की संख्या कम होती रही तो मध्यप्रदेश का 'टाइगर स्टेट' का दर्जा खत्म न हो जाए।