लॉकडाउन में फँसे 193 पाकिस्तानी रवाना हुए पाकिस्तान, दिलों में ले गए हिन्दुस्तान

-सुरक्षा जांच और स्क्रीनिंग के बाद अटारी-वाघा के रास्ते वापस भेजे गए

-हिन्दुस्तानियों की मेहमाननवाजी ने दिल जीता, करते रहे तारीफ

By: Bhanu Pratap

Updated: 05 May 2020, 03:09 PM IST

अमृतसर। कोरोना वायरस के कारण भारत में लॉकडाउन हो गया। इसके चलते देश के विभिन्न राज्यों में 193 नागरिक फँस गए। पाकिस्तान ने इन्हें वापस भेजने का अनुरोध किया। इसके बाद अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया। पाकिस्तान जाने से पहले वाघा सीमा पर सभी पाकिस्तानी अलग-अलग राज्यों से यहां पहुंचे। सभी अपनी-अपनी गाड़ियों बसों में बैठे रहे। बीएसएफ अधिकारियों ने पूरी एहतियात के साथ इनकी पूछताछ की। फिर इनकी स्क्रीनिंग की। आईसीपी में दाखिल करवाया गया, जहां से सभी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद इन्हें वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान भेज दिया गया। पाकिस्तान जाने से पहले कुछ पाकिस्तानी नागरिकों ने बताया कि इन 40 दिनों में जिस तरह से वह भारत में सुरक्षित रहे, उस तरह से वह पाकिस्तान में शायद ही सुरक्षित रह पाते।

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भारतीयों के दिलों को जाना

कराची से 3 मार्च को कोलकाता अपने रिश्तेदारों के पास रहने गए सईद अहमद ने बताया- दो महीने के लॉक डाउन में भारत में रहकर भारतीयों के दिलों को जाना। हम लोग पाकिस्तान में रहकर न कर पाते। यहां हर इंसान अपने से ज्यादा दूसरे की फिक्र करता है। मजहब से कोई लेना-देना नहीं है। इंसानियत सबके दिलों में बसती है।

पाकिस्तान में होते तो कोरोना की चपेट में आ गए होते

पाकिस्तान के कराची से ही अपनी ससुराल इंदौर में 20 फरवरी से रह रहे वसीम अपनी पत्नी आरिफा के साथ पाकिस्तान जाते हुए कहते हैं- अगर अब तक पाकिस्तान में होते तो शायद कोरोना की चपेट में आ चुके होते। यह हिन्दुस्तान ही, था जहां के प्रधानमंत्री के दिशा-निर्देश पर चलने वाली जनता के कारण भारत देश कोरोना महामारी पर विजय हासिल करने नहीं जुटा हुआ है। लोग लॉक डाउन की पूरी तरह से पालन कर रहे हैं। हमने भी लॉक डाउन की पूरी पालना की। दो महीने भारत में रहने पर मजा आया।

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पाकिस्तान में यह माहौल नहीं

पाकिस्तान से ही भारत के जलगांव में दो महीने पहले घूमने आए दीपक कुमार बताते हैं- वह यहां घूमने आए थे और लॉक डाउन में फंस गए। फिर भी अच्छा रहा। लोगों ने बहुत सेवा की। कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं हुई। अगर हम पाकिस्तान में होते तो शायद इस तरह का कोई माहौल नहीं दिखाई देता जो यहां हमने देखा। लोग लॉक डाउन की पूरी तरह पालना कर रहे हैं. जिससे इस बीमारी से बचने में सहायता मिल रही है। सुनने में आया है कि पाकिस्तान में लॉक डाउन की कोई पालना नहीं करता और वहां दिन-ब-दिन यह बीमारी फैलती जा रही है।

घर बैठे खाना मिल रहा था

पाकिस्तान के सिंध प्रांत से मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में रहकर आए इनायत हुसैन बताते हैं - भारत सरकार द्वारा किया गया लॉकडाउन ही सही मायने में लॉकडाउन है। मुझे यहां दो महीने हो गए। कभी यह महसूस नहीं हुआ कि हम किसी पराए देश में हैं। जैसे लोग पाकिस्तान में वैसे ही हिन्दुस्तान में हैं। मगर सुख यह था कि घर बैठे खाना मिल रहा था और लोग सेवा के लिए किसी चीज की कमी नहीं आने दे रहे थे। मन खुश हो गया हिन्दुस्तानियों की मेहमाननवाजी से।

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