Lockdown: मजदूरी करने हैदराबाद गया था गरीब राफिया, 80 हजार रुपये में घर पहुंचा शव

Highlights

  • अमरोहा का रहने वाना राफिया भाई के साथ गया था हैदराबाद
  • हैदराबाद में शुक्रवार सुबह हार्ट अटैक से हुई मौत
  • शव लाने के लिए एंबुलेंस चालक ने लिए 80 हजार रुपये

By: sharad asthana

Published: 04 May 2020, 04:54 PM IST

अमरोहा। लॉकडाउन में जहां कई अच्छी तस्वीरें देखने को मिल रही हैं, वहीं कुछ तस्वीरें लोगों को रुला रही हैं। ऐसा ही एक मामला मरोहा में भी सामने आया है। मजदूरी के लिए अमरोहा से हैदराबाद गए राफिया का शव वापस घर लाने के लिए ही उनके भाई को 80 हजार रुपये देने पड़े।

कर्ज लेकर चुकाए 80 हजार रुपये

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से हैदाराबाद गए राफिया के परिजनों को क्या पता था कि एक दिन उसके शव को वापस लाने के लिए उनको 80 हजार रुपये देने होंगे। दरअसल, गरीब राफिया की हैदराबाद में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। लोगों ने शक जताया कि राफिया की मौत कोरोना की वजह से हुई है। ऐसे समय में किसी ने भी राफिया के भाई की मदद नहीं की। अमरोहा शव लाने के लिए राफिया को कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने एक एंबुलेंस चालक से सौदा तय किया। इसके तहत एंबुलेंस चालक ने 80 हजार रुपये देकर राफिया के शव को अमरोहा के घर पर छोड़ा। राफिया के परिजनों ने किसी तरह कर्ज लेकर 80 हजार रुपये के इस कर्ज को चुकाया।

पत्नी और चार बच्चे हैं घर पर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राफिया अमरोहा के देहात थाना क्षेत्र के गांव धनौरी अहीर में रहता था। घर पर उसकी पत्नी और चार बच्चे हैं। वहस अपने भाई इब्ने अली के साथ हैदराबाद में रुई की मशीन पर काम करता था। लॉकडाउन की वजह से सभी कंपनियां व फैक्ट्रियां बंद हैं। राफिय भी घर पर खाली था। राफिया के सीने में शुक्रवार सुबह अचानक तेज दर्द उठा। उसकी हालत देखकर इब्ने ने अपने पड़ोसियों से मदद मांगी। लोगों को शक हुआ कि राफिया कोरोना संक्रमित है।

मालिक से लिए 15 हजार रुपये

इस बीच किसी ने एंबुलेंस को फोन कर दिया। इब्ने एंबुलेंस से राफिया को अस्पताल ले गया। आरोप है कि वहां कोरोना के खौफ से उसका इलाज देर से शुरू हुआ। तब तक राफिया की मौत हो चुकी थी। अस्पताल ने जांच कर हार्ट अटैक को राफिया की मौत की वजह बताया। अब इब्ने के सामने राफिया के शव को अमरोहा लाने का सवाल था। ऐसे माहौल में कोई भी वाहन मालिक इसके लिए राजी नहीं हुआ। ऐसे में एक एंबुलेंस मालिक ने उससे सौदा किया। एक लाख रुपये से शुरू हुई सौदेबाजी 80 हजार रुपये पर रुकी। इसके बाद इब्ने ने उधार के लिए अपने मालिक के सामने हाथ फैलाए। उनसे 15 हजार रुपये लेकर वह अमरोहा आया। करीब 32 घंटे का सफर तय करके वह भाई के शव के साथ शनिवार रात को अमरोहा पहुंचा। वहां पहुंचने पर उसने लोगों से 65 हजार रुपये और उधार लेकर एंबुलेंस चालक को दिए। रविवार को राफिया को सुपुर्दे खाक किया गया।

एसडीमए ने कही मदद की बात

इब्ने का कहना है कि कोरोना महामारी में उस पर दोहरी मार पड़ी है। 65 हजार रुपये के कर्ज के साथ ही राफिया के बच्चों का भरण-पोषण भी है। वहीं, एसडीएम विवेक यादव ने कहा कि टीम भेजकर मामले की जानकारी कराई जाएगी। नियमानुसार परिजनों की हरसंभव मदद की जाएगी।

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