नदी की धार में बिना मजबूत बेस ढूढें ढाल दिया 1.27 करोड़ का पुल, पानी के बहाव में कटा पुल का बेस

नदी की धार में बिना मजबूत बेस ढूढें ढाल दिया 1.27 करोड़ का पुल, पानी के बहाव में कटा पुल का बेस
नदी की धार में बिना मजबूत बेस ढूढें ढाल दिया 1.27 करोड़ का पुल, पानी के बहाव में कटा पुल का बेस

Rajan Kumar | Updated: 09 Oct 2019, 08:27:10 PM (IST) Anuppur, Anuppur, Madhya Pradesh, India

नदी की धार मोडऩे नदी में उतारा जेसीबी, प्रशासन ने नहीं दिखाई गम्भीरता वाहनों की आवाजाही बरकरार

अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर से फुनगा के दर्जनों गांव को जोडऩे वाला तिपान नदी पर बना 60 मीटर लम्बा पुल इंजीनियरों की लापरवाही में ७ अक्टूबर की दोपहर अचानक धंसककर क्षतिग्रस्त हो गई। पुल का लगभग ४० फीट हिस्सा तथा ८ खम्भे दरारों में तब्दील होकर १ फीट नीचे बैठ गया है। वहीं नदी की बहाव में पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा लगातार नीचे ही धंसकता ही जा रहा है। आशंका है कि पानी की तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास के सहित अन्य खम्भें व पुल का हिस्सा क्षतिग्रस्त होगा। फिलहाल पुल के क्षतिग्रस्त होने से बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। वहीं दर्जनों गांव की आवाजाही लगभग बंद सी हो गई है। लेकिन जिला मुख्यालय तक पहुंच का एक मात्र रास्ता होने के कारण लोग जान हथेली पर लेकर अब भी क्षतिग्रस्त पुल के उपर से आवाजाही कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिला मुख्यालय अनूपपुर को जोडऩे के लिए शॉटकट रास्ते में यह मार्ग बहुपयोगी है। जिससे हर्री, बर्री, भगताबांध, पसला, बिजौड़ी, चातरहिया, रक्शा, कोलमी, अमगंवा, छुलकारी से लेकर फुनगा तक के हजारों ग्रामीणों की आवाजाही होती है। लेकिन अब इस पुल के क्षतिग्रस्त से हजारों ग्रामीणों की यातायात प्रभावित होगी, और अन्य वैकल्पिक मार्ग से अधिक समय और खर्च के बाद अनूपपुर मुख्यालय तक पहुंच सम्भव हो सकेगा। वहीं पुल के क्षतिग्रस्त की सूचना पर आनन फानन में जलसंसाधन विभाग ने मौके पहुंचकर पुल का निरीक्षण किया तथा पानी बहाव के कम करने तथा पुल के अन्य हिस्से से पानी की निकासी की व्यवस्था में जुट गए। विभागीय जानकारी के अनुसार जलसंसाधन विभाग द्वारा वर्ष २००९ में १ करोड़ २७ लाख की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था। जिसकी लम्बाई लगभग ५५-६० मीटर थी। पुल आम व्यक्तियों के लिए वर्ष २०१० में खोले गए। लेकिन अपने निर्माण के मात्र ९ वर्ष मेें ही १.२७ करोड़ का पुल नदी के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण में विभागीय इंजीनियरों ने जमकर लापरवाही बरती। ठेकेदार के भरोसे कराए गए काम में नदी की धार में बिना हार्ड रॉक(मजबूत धरती) की तलाश किए नदी के रेत पर ही लगभग ४ फीट गहराई तक तार का जाल डाला गया। जिसमें पत्थरों को रखकर पुल की चौड़ाई में दोनों किनारों पर डाल बीच के हिस्से में बिना ढ़लाई रेत को भर उपर से मसालों की ढलाई कर दी। यहीं नहीं उसी कमजोर बेस पर पुल के खम्भों को खड़ा कर लगभग ६० मीटर लम्बी पुल का निर्माण कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ सालों के बाद बेस के अधिकांश हिस्से नदी के बहाव में कटकर अलग हो गए थे। शेष पुल का हिस्सा भी आज धंसक गया।
बॉक्स: प्रशासन ने नहीं दिखाई गम्भीरता, आवाजाही बरकरार
पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी प्रशासन ने गम्भीरता नहीं दिखाई। ग्रामीणों की आवाजाही पुल पर अब भी बनी हुई है। जबकि पुल के हालात देखकर उसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों में रोष बना हुआ है। उनके अनुसार वर्षो से रेलवे पगडंडी और नदी की धार के बीच आवाजाही किया, पुल के निर्माण के बाद राहत मिली थी, लेकिन विभागीय इंजीनियरों की लापरवाही में फिर से पूर्ववत स्थिति बन गई है।
वर्सन:
इस सम्बंध में मैंने जलसंसाधन विभाग को पत्र लिखकर बेरिकेट लगाकर मार्ग बंद करने की अपील की है। पुल धीरे-धीरे नीचे धंसक रहा है, कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
रामखेलावन राठौर, अध्यक्ष नगरपालिका अनूपपुर।

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