699 अतिकुपोषित बच्चे का हाल बेहाल, 10 हजार कुपोषित बच्चों तक मैदानी अमले की नहीं पहुंच

699 अतिकुपोषित बच्चे का हाल बेहाल, 10 हजार कुपोषित बच्चों तक मैदानी अमले की नहीं पहुंच

Rajan Kumar | Publish: May, 18 2019 12:22:00 PM (IST) | Updated: May, 18 2019 12:22:01 PM (IST) Anuppur, Anuppur, Madhya Pradesh, India

छोटे कार्यक्रमों से अधिकारियों को बरगला रहे विभाग, कुपोषण के खिलाफ नहीं चल रहा कोई अभियान

अनूपपुर। जिले में १०३९१ कुपोषित तथा ७७० अतिकुपोषित बच्चों के बावजूद विभागीय अमला कुपोषण से सक्रिय नहीं दिख रहा है। जिले में चयनित ७७० अतिकुपोषित बच्चों में ७१ बच्चों को विभिन्न एनआरसी केन्द्रों पर भर्ती कराकर उसे कुपोषण के कुचक्र से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन कुपोषण की दंश में ६९९ अतिकुपोषित बच्चों का हाल बेहाल बना हुआ है। जबकि १०३९१ कुपोषित बच्चों तक विभागीय अमले की पहुंच तक नहीं बन सकी है। इससे बचने विभागीय स्तर पर अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक छोटे-मोटे कार्यक्रम आयोजित कर अफसरों को गलत जानकारी देने के साथ बरगला रहे हैं। हालात यह है कि कुपोषण में जिले के १० हजार से अधिक बच्चे तथा लगभग ७ सैकड़ा अतिकुपोषित बच्चे मौत के साए के नीचे समय गुजार रहे हैं। जानकारों का मानना है कि विभाग की इस प्रकार की सुस्ती जारी रहेगी तो कुपोषण से नौनिहालों को कभी उबारा नहीं जा सकेगा। इसमें एक सैकड़ा तक बच्चे सुपोषित नहीं हो सकेंगे और दो सैकड़ा से अधिक कुपोषण की दंश में मौत से जिदंगी की जंग हार जाएंगे। जबकि कमिश्नर व कलेक्टर द्वारा कुपोषित बच्चों के चिह्नित करने तथा उन्हें एनआरसी केन्द्र तक लाने और अधिकारियों को मॉनीटरिंग के साथ केन्द्र की व्यवस्थाओं को बनाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन इन निर्देशों के बावजूद जिले में पिछले एक माह के दौरान मात्र ९ बच्चे को विभिन्न पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराया जा सका है। जिले में संचालित पांच एनआरसी के लिए निर्धारित ७० सीटों में ७१ बच्चे हैं। जिनमें एनआसी केन्द्र अनूपपुर में २० बिस्तरों में २०, जैतहरी में १० बिस्तर पर ९, कोतमा में १० में १२, राजेन्द्रग्राम में २० में २० तथा करपा पोषण पुनर्वास केन्द्र में १० बिस्तरों के लिए १० बच्चों को भर्ती कराया जा सका है। यानि ३० दिनों में विभागीय अमले द्वारा मात्र ९ बच्चों को खोजा जा सका है।
बॉक्स: कुपोषित बच्चों का हाल बुरा
जिले में कुपोषण को लेकर स्वास्थ्य व महिला बाल विकास विभाग का रवैया बिल्कुल नाममात्र है। अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा मैदानी क्षेत्र में कार्यरत अमले कुपोषित बच्चों को एनआरसी केन्द्र तक पहुंचाने से दूरी बना रहे हैं। वर्तमान में जिले में १०३९१ बच्चे कुपोषित की श्रेणी में चिह्ति है। लेकिन इनमें एक भी उपचार के लिए एनआरसी केन्द्र तक नहीं लगा गए हैं। अगर कुपोषित बच्चों की उपचार तत्काल नहीं कराया गया तो सभी १० हजार बच्चे चंद दिनों में अतिकुपोषित की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे।
बॉक्स: कुपोषण की स्थिति
विकासखंड बच्चों की संख्या
अनूपपुर २२६५
जैतहरी २४५८
कोतमा १४८७
पुष्पराजगढ़ ४१९१
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बॉक्स: अतिकुपोषित बच्चों के हाल
विकासखंड अतिकुपोषित बच्चों की संख्या
अनूपपुर २०९
जैतहरी १२२
कोतमा ११६
पुष्पराजगढ़ ३२३
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बॉक्स: एनआरसी में बच्चों की स्थिति
विस. सीट भर्ती कम
अनूपपुर २० २० ००
जैतहरी १० ०९ ०१
कोतमा १० १२ ००
राजेन्द्रग्राम २० २० ००
करपा १० १० ००
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विस. कुपोषित बालिका बालक कुल अतिकुपोषित बालिका बालक कुल
अनूपपुर ११२६ ११२९ २२५५ १२५ ८४ २०९
जैतहरी १३१७ ११४१ २४५८ ७० ५२ १२२
कोतमा ८०६ ६८१ १४८७ ६८ ४८ ११६
पुष्पराजगढ़ २१८३ २००८ ४१९१ १७७ १४६ ३२३
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