script97 schools in the district dilapidated, buildings dilapidated, lack of | जिले के 97 स्कूल जीर्ण शीर्ष, भवन हुए जर्जर, विभाग के पास बजट की कमी | Patrika News

जिले के 97 स्कूल जीर्ण शीर्ष, भवन हुए जर्जर, विभाग के पास बजट की कमी

जर्जर भवनों में खतरे के बीच लग रही नौनिहालों की कक्षाएं

अनूपपुर

Published: March 31, 2022 11:44:40 pm

अनूपपुर । अप्रैल माह से जिले में नए सत्र की कक्षाओं के साथ स्कूल कक्षाएं प्रारंभ होंगी। लेकिन जिले के प्राथमिक तथा माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति काफी खराब स्थिति में है। यहां विद्यालय भवन की छत और दीवारें पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। कुछ भवनों की दीवारें इतनी खोखली हो चुकी है कि वह कभी भी धराशायी हो सकती हैं। इसके बावजूद इन विद्यालयों में कक्षाओं का संचालन खतरे को नजरअंदाज कर पिछले कई वर्षों से लगातार किया जा रहा है। जिससे कभी भी विद्यालयों में अध्ययनरत नौनिहालों के साथ कोई गंभीर हादसा हो सकता है। जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले में सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत 1558 विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। जिनमें 1161 प्राथमिक एवं 397 माध्यमिक विद्यालय विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। जिनमें से पुष्पराजगढ़ विकासखंड में 41 विद्यालय, कोतमा विकासखंड में 26 विद्यालय, जैतहरी विकासखंड में 18 विद्यालय एवं अनूपपुर विकास खंड में 12 विद्यालय पूरी तरह से जर्जर स्थिति में है जो मरम्मत के अभाव में खंडरनुमान हालात में खड़ी है।
बॉक्स: विभाग के पास बजट की कमी
विभाग द्वारा जर्जर भवनों के लिए प्रतिवर्ष राज्य शिक्षा केंद्र से मरम्मत के लिए बजट की मांग की जाती है । जहां सैकड़ों की संख्या में जर्जर विद्यालयों के मरम्मत की मांग पर प्रतिवर्ष विभाग द्वारा मात्र 10 विद्यालय भवनों के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की जाती है। जिसके कारण अभी तक सैकड़ों की संख्या में जर्जर विद्यालय मरम्मत की राह देख रहे हैं। वहीं विभाग का मानना है कि जिस स्थिति में शासन से बजट का आवंटन होता है और दिनोंदिन पुरानी भवनों की जर्जरता बढ़ती जा रही है, इससे इन स्कूलों की पूर्ति करने में दशकों का समय लग जाएगा।
बॉक्स: खतरे के बीच अध्ययन को विवश नौनिहाल
विभाग के द्वारा मरम्मत के अभाव में मजबूरी बनी हुई है, जिसके कारण इन जर्जर विद्यालयों में ही कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके सिवाय अन्य कोई रास्ता भी विभाग के पास नहीं है। ना तो अभी तक इन विद्यालयों के समीप कोई अतिरिक्त भवन बनाया गया है और ना ही इसका कोई अन्य विकल्प उनके पास है। जिसके कारण वह भी जर्जर भवनों में कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं।
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