एक डॉक्टर के भरोसे 36 हजार की आबादी,विधायक के आश्वासन भी मरीजों का दु:ख नहीं कर रहा कम

एक डॉक्टर के भरोसे 36 हजार की आबादी,विधायक के आश्वासन भी मरीजों का दु:ख नहीं कर रहा कम
एक डॉक्टर के भरोसे 36 हजार की आबादी,विधायक के आश्वासन भी मरीजों का दु:ख नहीं कर रहा कम

Rajan Kumar | Updated: 13 Sep 2019, 03:19:10 PM (IST) Anuppur, Anuppur, Madhya Pradesh, India

भगवान भरोसे स्वास्थ्य केन्द्र के मरीज, रोजना दो सैकड़ा मरीज व दो थानों की एमएलसी, पीएम केसेस से मरीजों की बढ़ रही परेशानी

अनूपपुर। जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर 36 हजार की आबादी वाला बिजुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चिकित्सकों की कमी का दंश झेल रहा है। रोजाना १५०-२०० ओपीडी आनेवाले मरीजों के साथ दो थानों रामनगर और बिजली की एमएलसी केसेस और पीएम केस के साथ स्थानीय स्तर पर प्रसव की व्यवस्थाओं में मरीजों के लिए बेहतर साबित नहीं हो रहा है। डॉक्टरों की कमी में लगातार नगरवासियों द्वारा की जा रही मांग और स्थानीय विधायक द्वारा दिए जा रहे आश्वासन भी मरीजों की पीड़ा कम नहीं कर रही है। क्षेत्र भ्रमण में विधायक द्वारा हर बार डॉक्टरों की उपलब्धता की बात कही जाती है। बावजूद वर्षो से एक डॉक्टर के भरोसे पूरा स्वास्थ्य केन्द्र संचालित हो रहा है। हालांकि यहां पदस्थ तीन डॉक्टरों में प्रत्येक १ डॉक्टर की तैनाती तीन शिफ्टों में कराई गई है। जिसमें प्रत्येक डॉक्टर के उपर ८ घंटे की ड्यूटी और पूरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी बनी रहती है। कभी कभी पीएम केसेस के कारण मरीजों को घंटों उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बिजुरी वासियों के लिए इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि कोतमा अनुविभाग के अंतर्गत आनेवाले प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्र में एक डॉक्टर के अलावा अन्य की पदस्थापना ही नहीं है। डॉक्टरों की कमी के कारण बिजुरी क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में घायल होने या अन्य बीमारियों से ग्रस्ति होकर आने वाले गम्भीर मरीजों को तत्काल उपचार के बिना उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोतमा या जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। इस प्रकरण में कभी कभी रेफरल केस रास्ते में उपचार के अभाव में दम तोड़ जाते हैं। लेकिन आश्चर्य जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग ने इन असुविधाओं पर गम्भीरता नहीं दिखाई है। नगरवासियों का कहना है कि वर्तमान में बारिश का मौसम है, जहां वनीय क्षेत्र होने के कारण रोजना सर्पदंस, सडक़ दुर्घाटन या संक्रमण बीमारियों से पीडि़त मरीजों के आने का सिलसिला बना रहता है। इस अव्यवस्था में मरीजों के साथ साथ परिजनों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्टाफ का कहना है कि गम्भीर मामलों में बिना डॉक्टरी सलाह हम उपचार नहीं कर सकते। इस सम्बंध में पूर्व भी बीएमओ पुष्पराजगढ़ को जानकारी दी गई थी। लेकिन अबतक किसी डॉक्टर की पदस्थापना के लिए ठोस पहल नहीं की गई है।
बॉक्स: दो थानों की जिम्मेदारियों में लिखा-पढ़ी में गुजर जाता आधा समय
बिजुरी स्वास्थ्य केन्द्र के स्टाफों का कहना है कि बिजुरी स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत रामनगर और बिजुरी थाना क्षेत्र आता है। इसके अलावा बिजुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के परिधि में आधा सैकड़ा गांव भी आते हैं। जिसके कारण यहां रोजाना १५०-२०० ओपीडी मरीज, पीएम के लिए प्रतिमाह १८-२० केस, एमएलसी की रोजाना १५ केसेज, सहित प्रसव के रोजाना ५-६ केसेस व अन्य गम्भीर बीमारियों से पीडि़त मरीज आते हैं। इनमें थानों की पीएम और एमएलसी रिपोर्ट में डॉक्टरों का आधा वक्त गुजर जाता है। शेष समय में सैकड़ों मरीजों की जांच पड़ताल के कारण स्टाफ सहित मरीजों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वर्सन:
हमने इस सम्बंध में भोपाल में स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा है तथा उनमें स्वास्थ्य केन्द्र के उन्नयन और व्यवस्थाओं की मांग की है।
सुनील सराफ, विधायक कोतमा।

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