वनाधिकार पट्टा और धान की फसल को नुकसान नहीं पहुंचाने की मांग लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे बैगा परिवार

आधा सैकड़ा बैगा परिवारों ने आत्महत्या करने की चेतावनी, 22 जुलाई को वनविभाग ने 25 हेक्टेयर भूमि किया था खाली

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 24 Jul 2020, 06:00 AM IST

अनूपपुर। वनपरिक्षेत्र के राजेन्द्रग्राम बम्हनी बीट कक्ष क्रमांक पीएफ १६२ के अंतर्गत २५ हेक्टेयर वनभूमि पर २२ जुलाई को वनविभाग द्वारा अतिक्रमण हटाकर किए गए कब्जे के विरोध में २३ जुलाई को आधा सैकड़ा बैगा परिवार कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। जहां अपर कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। जिसमें राष्ट्रीय जायस के बैनर तले बेंदी, डूमरटोला के आधा सैकड़ा बैगा परिवारों ने वन अधिकार पट्टा दिलाने और वनविभाग द्वारा धान की फसल को नुकसान नहीं पहुंचाने की अपील की है। अपर कलेक्टर सरोधन सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में बताया है कि समस्त बैगा आदिवासी परिवार ग्राम पंचायत बेंदी, डूमरटोला के निवासी है। हमारा जीवन इसी भूमि पर निर्भर है और अब इसमें धान की फसल लगी है। २२ जुलाई को वनविभाग द्वारा अचानक आकर उस जमीन को वनविभाग का बताकर वहां खड़ी फसल में ट्रैक्टर चलवाने लगे और आवारा पशुओं को धान के फसलों में चरने छोड़ दिया गया। इसके बाद वहां पर चारो ओर से बाउंड्री करवाने लगे। हम बैगा परिवार ने वनविभाग के अधिकारियों से निवेदन किया कि हमारी फसल को नष्ट न किया जाए, लेकिन उन लोगों ने हमारी एक बात भी नहीं सुनी और बल पूर्वक हमें वहां से भगा दिया। बैगा परिवारों ने अपर कलेक्टर से कहा फसल को नष्ट न किया जाए क्योंकि हमारा जीवन यापन इसी से चलता है। अगर वनविभाग हमारे साथ ऐसा करता है तो हम आत्महत्या करने के कगार पर आ जाएंगे।
उप वनमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम मान सिंह मरावी का कहना है कि ने पीएफ.162 के ग्राम थमरदर के डूमरटोला निवासी बिरसू पिता पंचम बैगा, पंचम बैगा का पुत्र, फागू पिता चरकू बैगा एवं दरवारी पिता संचू बैगा द्वारा वर्ष 2018 में पौधारोपण के लिए किए गए तैयारी एवं गड्ढो को पाटकर 25 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती कर लिया था। इसकी सूचना पर न्यायालयीन कार्रवाई किए जाने के बाद भी भूमि न छोडऩे पर मुख्य वन संरक्षक शहडोल पीके वर्मा के निर्देश पर शहडोल, अनूपपुर की टीम ने वन मंडलाधिकारी अनूपपुर अधर गुप्ता के नेतत्व में बुधवार की सुबह सम्बंधित वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। सुरक्षा घेरा के साथ पौधारोपण किया गया है। इस दौरान कुछ युवको एवं बैगा समाज के व्यक्तियों, महिलाओं ने इस कार्रवाई का विरोध किया था। फिलहाल एक ओर जहां बैगा परिवार जमीन पर वर्षो से काबिज होकर खेती की बात कह रहे हैं वहीं वनविभाग इसे दो साल पूर्व का मामला बताकर अतिक्रमण हटाने की बात कह रही है।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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