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महिलाओं में स्तन पान को बढ़ावा देने जिला अस्पताल सहित कलेक्ट्रेट कार्यालय में भी ब्रेस्ट फीडिंग कार्नर

विश्व स्तनपान दिवस: प्रसव से पूर्व और बाद प्रसूताओं को नवजात को घंटे भर बाद पहला पीला गाढा दूध पिलाने कर रहे काउंसलिंग

अनूपपुर

Published: August 01, 2022 10:55:02 pm

अनूपपुर। मां का दूध अमृत के सामान होता है। इसके नियमित सेवन से नवजात शिशु के शरीर में बाहरी संक्रमण का प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही मां का दूध बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण माना जाता है। ये कई मायने में रोग प्रतिरोधक क्षमता व प्राकृतिक वैक्सीन का काम करता है। आधुनिक जीवनशैली के खान पान ने मां के पेट में पल रहे नौनिहाल और स्तन की ग्रंथियों को भी प्रभावित किया है। जिसके कारण जन्म लेने वाले अधिकांश बच्चे एनीमिक और अविकसित हो रहे हैं। वहीं माताओं के स्तन से दूध की अमृतधारा भी सूखती जान पडऩे लगी है। अनूपपुर में प्रतिवर्ष १६ हजार शिशुओं का जन्म होता है, जिसमें अधिकांश नौनिहाल एनीमिक होते हैं। इनमें कुछ की जन्म के उपरांत मौत हो जाती है। इससे निपटने जिला अस्पताल अनूपपुर सहित डिलेवरी सेंटरों में आने वाले प्रसूताओं की काउंसलिंग कराया जा रहा है। जिसमें प्रसूताओं को प्रसव के बाद अपने नौनिहाल को अपने स्तन से पहला पीला गाढ़ा युक्त दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। साथ ही महिलाओं को यह भी बताया जाता है कि मां के स्तन से निकलने वाला पहला पीलायुक्त गाढ़ा दूध नवजात के लिए कितना महत्वपूर्ण और उसके स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी है। यहीं पीलायुक्त गाढ़ा दूध बच्चों को किन भयानक बीमारी से बचा सकता है। इसे पूर्व सामाजिक भ्रांतियों में बाहर नहीं फेंककर अपने नौनिहाल के मुंह में पिलाएं। इसके अलावा कम पढ़ी लिखी या अनपढ महिलाओं को दीवारों पर लगी पोस्टरों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि बच्चों को स्तनपान कराए।
सीएमएचओ डॉ. एससी राय बताते हैं कि अमूनन जन्म से लेकर दो या ढाई साल तक बच्चों को नियमित फीडिंग की आवश्यकता होती है। इसके लिए जिला अस्पताल में काउंसलिंग सेंटर बनाए गए हैं। साथ ही मेटरनिटी वार्ड की सभी स्टाफ नर्सो को इसकी नियमित ट्रेंनिंग भी कराई जाती है। बच्चे के जन्म लेने के बाद केयर सेंटर में स्टाफ नर्स स्वयं ही माताओं के पास पहुंचकर उसे पहला गाढ़ा युक्त दूध पिलाने का प्रयास करती है। जरूरत पडऩे पर सहायक स्टाफ की निगरानी भी लगाती है। अगर इस दौरान किसी माता को दूध नहीं उतरता है तो उसके लिए उसे दवा देकर दूध उतारने का प्रयास कराया जाता है। साथ ही बच्चों को किस एंगल में, कब और कितनी मात्रा में दूध पिलाना है, बताया जाता है।
४२ दिनों तक फॉलोअप, मैदानी अमला माताओं को देती है जानकारी
सीएमएचओ बताते हैं कि अगर नवजात घंटाभर बाद दूध नहीं लेता है तो तत्काल जच्चा और बच्चा को एसएनसीयू वार्ड में चाइल्ड स्पेशलिस्ट से जांच कराई जाती है। यहां चिकित्सकीय सलाह में आगे की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में आशा कार्यकर्ता, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं नियमित फॉलोअप भी कराया जाता है। जिसमें ४२ दिनों तक ऐसे प्रसूताओं का फॉलोअप होता है। डिलेवरी सेंटर पर प्रसव के बाद माताओं को पौष्टिक आहार सम्बंधित जानकारी और खान-पान के सुझाव दिए जाते हैं। ताकि पौष्टिक आहार से दूध की मात्रा अधिक तैयार होगी तो नौनिहालों को भरपेट दूध मिल पाएगा।
पीला गाढ़ा युक्त मां का दूध के फायदे:
प्रसव के सात दिनों तक मां के दूध में कोलेस्ट्रम एंजाइम निकलता है, जो बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता व आईक्यू विकसित करता है। प्रथम छह माह तक मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वाधिक सुपाच्य होता है। मां के दूध में एंटी एलर्जिक, एंटी बैक्टीरियल व ग्रोथ फैक्टर होते हैं जो बच्चे को बीमारियों से बचाते हैं। यहीं नहीं स्तनपान से माताओं को भी फायदा पहुंचता है। ब्रेस्ट व डिम्ब ग्रंथि के कैंसर की संभावनाओं को कम करता है, प्रसव के बाद शेप में आने में मदद करता है और मोटापे से बचाता है। प्रसव के बाद माताओं में होने वाली एनीमिया की शिकायत को कम करता है। खून के बनने की दर को बढ़ाता है।
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