गांवों में सर्दी-खांसी से बेहाल मरीज, कोरोना जांच के डर से झोलाछाप चिकित्सकों से करा रहे इलाज

प्रशासकीय बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं हुए निजी प्रैक्ट्सिनर

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 11 May 2021, 12:27 PM IST

अनूपपुर। ग्रामीण क्षेत्र में बदलते समय और कोरोना संक्रमण के बीच ज्यादातर ग्रामीण आबादी सर्दी-खांसी और बुखार जैसी मौसमी बीमारी से जूझ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कोरोना संक्रमण ने भी सर्दी-खांसी की आड़ में अपना प्रभाव बना रखा है। लेकिन इसके बाद भी लोग शासकीय चिकित्सालयों में कोरोना जांच किए जाने के डर से स्वास्थ्य केन्द्र नहीं पहुंच रहे हैं। कोरोना जांच और खुद को संक्रमित साबित न हो के डर से आसपास के झोलाछाप चिकित्सकों से अपना इलाज करा रहे हैं। जिसमें कोरोना संक्रमण के बदलते स्वरूपों में झोलाछाप चिकित्सक मौसमी बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। इससे कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ते जा रहा है। यहीं नहीं ग्रामीण क्षेत्र में इस समस्या को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किल कोरोना अभियान चलाते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई गई है, जो घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। लेकिन यहां भी ग्रामीण जन बीमारी की जानकारी देने में डर रहे हैं।
बॉक्स: प्रशाासन ने निजी प्रैक्टिशनर की बुलाई बैठक, नहीं पहुंचे लोग
बताया जाता है कि कोरोना संक्रमण और निजी प्रैक्टिशनरों की ओर से किए जा रहे इलाज के सम्बंध में कोतमा एसडीएम की अध्यक्षता में बीएमओ द्वारा गांव में इलाज कार्य कर रहे निजी प्रैक्टिशनर की बैठक बुलाई गई थी। जिसमें प्रशासन का उद्देश्य यह निर्देशित किया जाना था कि सर्दी-खांसी व कोरोना के लक्षण वाले मरीजों का इलाज वह स्वयं नहीं करते हुए उन्हें चिकित्सालय जाने के लिए कहें। लेकिन इस बैठक में कोई भी नहीं निजी प्रैक्टिशनर नहीं पहुंचे। बताया जाता है कि इसी का परिणाम रहा कि ९ मई को कोतमा बीएमओ ने प्रशासन के निर्देश में कटकोना में मेडिकल स्टोर की आड़ में संचालित क्लीनिक पर छापामार कार्रवाई की थी, जहां लगभग दो दर्जन ग्रामीणों की भीड़ कोविड गाइडलाइन के विपरीत मौजूद पाए गए थे।
बॉक्स: बढ़ा संक्रमण फैलने का खतरा
स्वास्थ्य विभाग भी इस बात को मान रहा है कि शहरों के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। इसका मुख्य कारण वर्तमान मौसम में हो रहे बदलाव को ग्रामीणों द्वारा सहजता से लेते हुए कोरोना संक्रमण सम्बंधित जांच से दूरी बना लिया। वहीं किसी शासकीय चिकित्सीय जांच व सलाह बगैर स्थानीय मेडिकल स्टोर्स से भी सर्दी-खांसी और बुखार की दवा ले लिया। जिसमें बाद में वह गम्भीर बन गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दी-खांसी तथा बुखार की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को सामान्य मरीज मानकर इलाज करने वाले निजी प्रैक्टिशनर संक्रमण की संभावना को और भी ज्यादा बढ़ाते जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस वजह से अधिकांश घरों में एक ही घर के सभी सदस्य बीमारियों से ग्रसित हैं। पीडि़त व्यक्ति द्वारा कोरोना जांच कराने से दूरी बनाने से अन्य सदस्यों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बनता जा रहा है।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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