उलझनों में जंगल की जमीन, एक ही खसरा पर राजस्व और वनविभाग का कब्जा

कार्रवाई से पूर्व वनविभाग ने ग्राम पंचायत और किसानों को नहीं भेजी नोटिस, वर्ष 2015 से चल रहा जमीनी विवाद

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 27 Jul 2020, 06:02 AM IST

अनूपपुर। राजेन्द्र्रग्राम वनपरिक्षेत्र के बम्हनी बीट अंतर्गत हमरदर के पास वनविभाग द्वारा कब्जा किया गया २५ हेक्टेयर भूमि खसरा नम्बर १८३ राजस्व और वनविभाग की उलझन बन गई है। जंगल की जमीन का दोनों विभाग राजस्व और वनविभाग इसपर अपना कब्जा दिखा रहे हैं। वनविभाग अधिकारी दशकों से काबिज बैगा परिवारों के पास राजस्व विभाग की काटी गई ३५ लोगों का चलान वर्ष २०१७ से बता रहे है। जबकि राजस्व विभाग खसरा नम्बर १८३ की भूमि राजस्व नक्शे में शामिल होने की बात कह उसे अपना कह रही है। ग्राम पंचायत बेंदी सरपंच की माने तो जमीन को लेकर वनविभाग का यह रूख वर्ष २०१६-१७ के दौरान सामने आया। जब दशकों से काबिज बैगा परिवारों द्वारा इस खसरे का वनाधिकार पट्टा दिलाने बेंदी ग्राम पंचायत में दावा आपत्ति लगाई गई थी। किसानों को प्रदेश मुख्यमंत्री द्वारा किए गए आश्वासन पर विश्वास था कि उसे उनका वनाधिकार पट्टा मिल जाएगा। लेकिन इसी दौरान वनविभाग ने स्थानीय ३-४ किसानों को पकड़ उनके खिलाफ अवैध कब्जा और पेड़ कटाई का मामला दर्ज किया था। ग्रामीणों व ग्राम पंचायत जनप्रतिनिधियों ने भी वनविभाग की इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए राजस्व विभाग को सूचना दी। ग्राम पंचायत सरपंच नेपाल सिंह बताते है कि राजस्व विभाग, स्थानीय गांवों के हल्का पटवारी सहित वनविभाग भी मौके पर पहुंचकर जमीनों की जांच पड़ताल की थी। जिसमें सम्बंधित खसरा नम्बर १८३ राजस्व विभाग के नक्शे में शामिल था, राजस्व विभाग ने वनविभाग की इस कार्रवाई से बचने किसानों को लगान(कर) के आधार पर रसीद काटकर दिया था। क्योंकि नक्शे के आधार पर जमीन राजस्व विभाग की थी और खेती के एवज में कर चुकाना था। वनविभाग के नक्शे में सम्बंधित खसरा नम्बर १८३ नहीं दर्शाया हुआ है। वनविभाग के नक्शे में मात्र पीएफ १६२ बम्हनी परिक्षेत्र दर्शा हुआ था। लेकिन राजस्व विभाग के नक्शे में शामिल जमीन पर वनविभाग का मुनारा बना हुआ है।
उपवनमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम मान सिंह मरावी बताया कि खसरा नम्बर १८३ वनविभाग, राजस्व विभाग, आराजी हो सकता है। राजस्व विभाग द्वारा सम्बंधित ३५ किसानों के नाम ३.१४२ हेक्टेयर भूमि का चलान वर्ष २०१७ और १८ से प्रदान की है। जबकि वनविभाग द्वारा वर्ष २०१६ में ही २.२ हेक्टेयर भूमि पर कब्जा को लेकर चार किसानों के खिलाफ अवैध कब्जा और पेड़ कटाई का प्रकरण दर्ज किया जा चुका है। मई २०२० में न्यायालीयन कार्रवाई उपरांत वनमंडलाधिकारी अनूपपुर के बेखदली आदेश के बाद किया गया है। हमारे द्वारा घर पर नोटिस चस्पा किया गया था। लेकिन दूसरी ओर ग्राम पंचायत का कहना है कि वनविभाग अधिकारियों ने कार्रवाई से पूर्व कोई सूचना नहीं दी। यहां तक ग्राम ंपचायत को भी कार्रवाई से अवगत नहीं कराया। यहां तक किसानों के खेतों में कंटीली तारों की फेंसिंग से के दौरान धान की लगी फसल को ट्रैक्टर चलाकर व पशुओं को छोडक़र नष्ट कर दिया। इससे बैगा परिवारों को हजारों का नुकसान हो गया। फिलहाल राजस्व विभाग और वनविभाग अपनी अपनी दलील देकर बचने का प्रयास कर रहे हैं।
वर्सन:
वनविभाग अधिकारी ही बता पाएंगे कि वे किस आधार पर कार्रवाई की, हमारी ओर से सीमांकन करने के बाद जमीन की वास्तविक जानकारी सामने आ पाएगी।
विजय कुमार डहेरिया, एसडीएम पुष्पराजगढ़़।
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पूर्व में भी कुछ लोगों के खिलाफ अवैध कब्जा और पेड़ कटाई को लेकर मामला दर्ज किया गया था, वनमंडलाधिकारी के आदेश पर बेदखली की कार्रवाई की गई है।
मान सिंह मरावी, उप वनमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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