कोरोना: कोविड सेंटर अनूपपुर बना क्रिकेट स्टेडियम, बच्चों और युवा लगा रहे चौके छक्के

सुबह योगाभ्यास से आरम्भ दिनचर्या, क्रिकेट की उर्जा और मनोरंजन में दे रही जीवन को नई दिशा

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 26 Aug 2020, 06:01 AM IST

अनूपपुर। कोरोना पॉजिटिव बच्चों से लेकर युवाओं और वृद्ध मरीजों की बदली दिनचर्या.. मानो.. कोविड सेंटर नहीं स्टेडियम और योग की क्लास हो। घरों से बैट बॉल लेकर पहुंचे, बच्चे लगा रहे चौके - छक्के। कोविड सेंटर में मरीज बच्चे और युवा क्रिकेट खेल कोरोना को दे रहे मात। कोविड सेंटर बना क्रिकेट स्टेडियम। यह नजारा कहीं और का नहीं, बल्कि अनूपपुर स्थित कोविड केयर सेंटर की है। अनूपपुर कोविड 19 केयर सेंटर जहां जिले भर के कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जिसमें छोटे बच्चे से लेकर युवा, बुजुर्ग व महिलाएं भी हैं। जिनका समुचित देखभाल प्रशासन व मेडिकल स्टाफ द्वारा किया जा रहा है। समाज में जिस करोना के नाम पर लोगों में भय का माहौल बना, शायद सही नहीं है। कोरोना संक्रमण का सबसे बेहतर बचाव स्वयं व अपने परिवार की सावधानी है। अनूपपुर कोरोना केयर सेंटर में वर्तमान में लगभग 181 मरीज हैं, जो यहां अपने घर की तरह रह रहे हैं। लेकिन यहां पर छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवाओं व बुजुर्ग तक की दिनचर्या बदल गई है। सुबह की शुरुआत योग व्यायाम से होता है। योग के समय छोटे-छोटे बच्चे बुजुर्ग महिलाएं सभी जब योग करते हैं तो पूरा परिसर योग मय हो जाता ह।ै ऐसा लगता है कि यह कोविड सेंटर बल्कि कोई योग कार्यशाला हो। लेकिन योगाभ्यास के बाद पूरा परिसर क्रिकेट स्टेडियम सा नजर आने लगता है।छोटे-छोटे बच्चे दिनभर क्रिकेट बैट लेकर खेलते हुए धमाचौकड़ी मचाते हैं। इलाजरत 4 वर्ष से12 वर्र्ष तक के कुछ बच्चे हैं जो अपने लिए अपने-अपने घरों से बैट बॉल लेकर यहां आए हैं। कुछ लोगों ने अपने-अपने घरों से मंगाए हैं। बच्चों व युवाओं को सुबह-शाम जब भी समय मिलता है बैट बॉल की आवाजों के साथ आउट या कैच की शोर से पूरा परिसर गंूज उठता है। इस दौरान परिसर के चारों ओर बने आवासों में ऊपर की मंजिलों में रहने वाले मरीज गैलरी में खड़े होकर बच्चों के खेल का आनंद लेते हुए उनका उत्साहवर्धन भी करते हैं। ऐसा लगता है जैसे यह कोविड सेंटर नहीं कोई क्रिकेट का स्टेडियम है, जहां क्रिकेट का मैच चल रहा हो जब भी कोई बच्चा आउट होता है तो छोटे-छोटे बच्चे तालियां बजाकर खुशी जताते हैं वहीं जब कोई बच्चा अपने बल्ले से बॉल को हवा में उछालता हुआ मारता है तब भी वहां खड़े सारे लोग तालियां बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन करते हैं।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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