लापरवाही: तीन दिन तक प्रसूता के गर्भ में था मृत शिशु, हालत बिगड़ी तो कर दिया रेफर

लापरवाही: तीन दिन तक प्रसूता के गर्भ में था मृत शिशु, हालत बिगड़ी तो कर दिया रेफर

Amaresh Singh | Updated: 12 Jun 2019, 11:35:04 AM (IST) Anuppur, Anuppur, Madhya Pradesh, India

मरीज की जान से खिलवाड़

अनूपपुर। जिला अस्पताल अनूपपुर मरीजों के भगवान की जगह अब उसकी जान से खिलवाड़ की जगह बन गई है। डाक्टरों की मनमानी में मरीजों व परिजनों की सांसे अटक रही है, लेकिन डॉक्टर किसी ने किसी बहाने में मरीजों को अन्यत्र रेफर कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसी ही घटना 10 जून की रात 9 बजे जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने दिया, जहां पिछले तीन दिनों से अपनी पेट में 8 माह के मृत बच्चा(भ्रूण) को बाहर कराने की आस में 21 वर्षीय मां पार्वती केवट पति अशोक केवट निवासी ग्राम बकेली अनूपपुर जिला अस्पताल के लेबर वार्ड में भर्ती रही।

परिजन बार बार डॉक्टरों से ऑपरेशन कर बहु की जान बचाने की अपील करते रहे

पेट में मरे बच्चे के शव से मरीज को भी नुकसान होने की आशंका में परिजन बार बार डॉक्टरों से ऑपरेशन कर बहु की जान बचाने की अपील करते रहे। लेकिन इस दौरान जिला अस्पताल सीएमएचओ डीके कोरी से लेकर महिला चिकित्सकों, लेबर वार्ड स्टाफ नर्स व अन्य मेडिकल ऑफिसरों ने बच्चेदानी का मुंह नहीं खुला होने की बात कहते हुए दवाईयों से बिना ऑपरेशन सामान्य प्रसव के माध्यम से मृत बच्चा को बाहर करने परिजनों को ढाढस देते रहे।


महिला के प्लेटलेट्स कम होने का कारण बताते हुए शहडोल के लिए रेफर कर दिया

यहां तक रविवार 9 जून को जिला अस्पताल निरीक्षण करने पहुंचे शहडोल कमिश्नर से शिकायत करने पहुंचे परिजनों को डॉक्टरों द्वारा यह समझाईश देते हुए रोका गया कि इस प्रकार के केस में तीन-चार दिनों का समय लगता है। जिसमें विशेष मेडिकल ट्रीटमेंट के माध्यम से भू्रण को आसानी से बाहर निकाल दिया जाएगा। आपके मरीज को अगर रेफर करना होता तो डॉक्टरों द्वारा भर्ती नहीं किया जाता। ऑपरेशन से मरीज को भविष्य में परेशानी रहेगी। यह पहला डिलेवरी केस है। लेकिन सोमवार 10 जून की रात 9 अचानक महिला के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए सिविल सर्जन सहित महिला चिकित्सकों व अन्य डॉक्टरों ने महिला के प्लेटलेट्स कम होने का कारण बताते हुए शहडोल के लिए रेफर कर दिया। डॉक्टरों द्वारा स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि हमारे पास प्लेटलेट्स नहीं है, हम ऑपरेशन नहीं कर सकते। जिसके बाद परिजनों ने डॉक्टरों की इस लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए घटना की सूचना सीएमएचओ को दी, लेकिन सीएमएचओ ने चुप्पी साध ली।

महिला चिकित्सक ने 10 हजार रुपए देने के बाद ऑपरेशन की बात कही थी
परिजनों का कहना है कि 7 जून को महिला के पेट में दर्द होने पर अस्पताल लाया गया, जहां सोनोग्राफी सेंटर नहीं खुलने पर निजी सेंटर से जांच कराई गई। जांच में मरीज के पेट में बच्चा मरा हुआ बताया गया। इसके बाद परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराकर ऑपरेशन से मृत बच्चे को बाहर किए जाने की अपील डॉक्टरो से की थी। वहीं उनका आरोप है कि एक महिला चिकित्सक ने 10 हजार रूपए देने के बाद ऑपरेशन की बात कही थी, लेकिन अस्पताल में चिकित्सकों ने ऑपरेशन से इंकार कर दिया।


सीनियर-जूनियर का चल रहा खेल
केस के रेफर होने पर खुद अस्पताल कर्मचारी भी हैरान दिखे, उनका कहना था कि मेटरनिटी यूनिट में सीनियर-जूनियर का खेल चल रहा है। जूनियर डॉक्टरों द्वारा लिए गए केस में सीनियर डॉक्टर उसे हाथ नहीं लगाते। यहीं कारण है कि पिछले दो माह में जिला अस्पताल में मात्र 33 केस सिजेरियन होना सामने आया है। इसमें अप्रैल माह में 20 तथा मई में मात्र 13 केस हैं। जबकि पूर्व में इसी जिला अस्पताल में रोजाना 5-6 केस सिजेरियन होते थे।

इनका कहना है
मैं दो दिनों से अवकाश पर था, आने पर महिला डॉक्टरों ने जानकारी दी। मरीज में प्लेटलेट्स की कमी थी, जिसके कारण मरीज को रेफर कर दिया गया।
डॉ. एसआर परस्ते, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, अनूपपुर।


इस प्रकार की लापरवाही के मामले में सिविल सर्जन से जानकारी लेता हूं।
चंद्रमोहन ठाकुर, कलेक्टर, अनूपपुर।

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