आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टर व स्टाफो का ड्यटी रोस्टर तैयार नहीं, ऑक्सीजन की नहीं समुचित व्यवस्था

कोरोना के बढ़े मरीज: पूर्व में बंद आइसोलेशन वार्ड का अब तक नहीं खुला दरवाजा, कैसे होगा मरीजों का इलाज

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 14 Sep 2021, 11:19 AM IST

अनूपपुर। देश के अन्य राज्यों में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर ने अपना प्रभाव दिखाना आरम्भ कर दिया है। इसमें अनूपपुर जिला भी अछूता नहीं रहा, जहां पिछले एक सप्ताह के दौरान पांच लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। बावजूद कोरोना की तीसरी लहर से निपटने स्वास्थ्य विभाग बेसुध पड़ा है। जिले की सीएचसी क्या जिला अस्पताल में भी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। यहां तक मई जून माह में बंद हुए जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड के दरवाजे भी नहीं खोले जा सके हैं। यहीं नहीं मरीजों के लिए ऑक्सीजन जैसी आवश्यक सुविधाओं की भी तैयारी नहीं है। वहीं कोरोना मरीजों के इलाज में सहयोग देने वाले चिकित्सीय दल का भी ड्यूटी रोस्टर तैयार नहीं किया गया है। सब कुछ भगवान भरोसे पड़ा हुआ है। आश्चर्य स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार सीएमएचओ और जिला अस्पताल प्रबंधक ऐसे बेखबर है कि अगर वर्तमान में कोई मरीज गम्भीर होकर इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचता है तो उसका इलाज जिला अस्पताल आइसोलेशन वार्ड में नहीं हो सकता, मरीज को गम्भीर हालत में ही शहडोल या बिलासपुर रेफर करना होगा। विदित हो कि जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बने विशेष आइसोलेशन वार्ड में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ५० बिस्तरों की व्यवस्था बनाई गई थी। इसके अलावा मरीजों की अधिक संख्या से निपटने १० बिस्तरों का स्टॉप वन सेंटर को विशेष कक्ष बनाया गया था, जिसमें सामान्य स्तर के मरीजों को रखा जा सके। इसके अलावा शासकीय कन्या शिक्षा परिसर में ५०० बिस्तरों की कोविड वार्ड बनाए गए थे, इनमें २५० बिस्तर ऑक्सीजन युक्त तथा २५० बिस्तर सामान्य मरीजों के लिए तैयार रखा गया था।
बॉक्स: कोविड विशेष आइसोलेशन वार्ड में ऑक्सीजन पहुंचाने नहीं सुविधा
जिला अस्पताल सूत्रों की जानकारी के अनुसार ट्रामा सेंटर में स्थापित विशेष आइसोलेशन कोविड वार्ड में फिलहाल आपातकालीन सेवा के दौरान मरीजों को पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं कराई जा सकेगी। उन्हें सामान्य रूप में ऑक्सीजन सिलेंडर पर इलाज करना होगा। बताया जाता है कि जून-जुलाई माह के दौरान अज्ञात व्यक्तियों द्वारा ऑक्सीजन सप्लाय के लिए लगी कॉपर कीट की चोरी कर ली गई थी। जिसमें सीएस जिला अस्पताल द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराया गया था। लेकिन इसके बाद अस्पताल प्रबंधक द्वारा अब तक कॉपर पाइप लाइन को नहीं लगाया गया है।
बॉक्स: खाली पड़े ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कांसंटे्रटर का भी नहीं अता पता
बताया जाता है कि जिले में आपातकालीन सेवाओं के लिए १८३ बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर ९० छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर तथा २२८ ऑक्सीजन कांसंटे्रटर मशीन उपलब्ध हैं। लेकिन इतनी तादाद में उपलब्ध सिलेंडरों में कोरोना संक्रमण की तैयारियों के लिए एक भी सिलेंडर नहीं भरे जा सके हैं। वहीं २३८ ऑक्सीजन कांसंटे्रटर मशीनों का कहीं अता पता नहीं। इन मशीनों की अब तक जांच पड़ताल या उसकी सफाई तक नहीं की गई है।
बॉक्स: बिना व्यवस्थाओं के सीएचसी आइसोलेशन वार्ड
जहां जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमण की तैयारियों को लेकर लापरवाही बरती जा रही है, ठीक उसी तरह सीएचसी सेंटर भी बदहाल हालत में पड़े हैं। इनमें फुनगा, जैतहरी, कोतमा, वेंकटनगर, राजेन्द्रग्राम और परासी सीएचसी में १० बिस्तरों का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने के निर्देश हैं। जबकि कॉलरी द्वारा एसईसीएल जमुना और हसदेव क्षेत्र में दो स्थानों पर विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार रखा गया था। लेकिन फिलहाल जिले के किसी भी स्वास्थ्य केन्द्र और जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है।
बॉक्स: ऑक्सीजन प्लांट भी अधूरे
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट के दो यूनिट स्थापित करने की योजना अब भी अधर में अटकी पड़ी है। शेड तैयार किए जा चुके हैं, लेकिन ऑक्सीजन तैयार करने वाले उपकरण अब तक नहीं लगाए जा सके हैं। ऐसे में फिर से मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर के भरोसे जिंदगी और मौत के बीच इलाज की जद्दोजहद करनी पड़ेगी।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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