कुपोषण के खिलाफ मैदानी अमले घरों में नहीं लगा रहे दस्तक, एनआरसी में बिस्तर खाली

कम निर्धारित सीटे भी नहीं हो रही फुल, अक्टूबर माह में त्योहार और किसानी से कम बच्चों के भर्ती की सम्भावना

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 04 Oct 2021, 11:19 AM IST

अनूपपुर। कोरोना संक्रमण के उपरांत सामान्य हो रहे जनजीवन के बीच सालभर से कुपोषित बच्चों को ढूढने में विभागीय अमला सुस्त नजर आ रही है। घर के भीतर कुपोषित और परेशानियों से जूझ रहे नौनिहाल अब भी शासकी योजना से वंचित है। लेकिन दूसरी ओर कमिश्नर की फटकार के बाद विभागीय और मैदानी अमला गम्भीर कुपोषितों को घरों से पोषण पुनर्वास केन्द्र तक भेज रहे हैं। जिसके कारण जिले में बनाए गए पांच एनआरसी सेंटर अब भी अपनी निर्धारित क्षमताओं से कम में संचालित हो रही है। इनमें कुपोषण से सर्वाधिक प्रभावित पुष्पराजगढ़ विकासखंड की स्थिति और भी बेहाल है, जहां २० बिस्तर की क्षमता वाले एनआरसी सेंटर में मात्र ९ बच्चे भर्ती है। जानकारों का मानना है कि अगर नौनिहालों को एनआरसी केन्द्रों पर भेजने की यही स्थिति बनी रही तो अधिकांश बच्चें पोषण से वंचित रह जाएंगे। जिले में वर्तमान में २७९९ कुपोषित तथा ५०४ अतिकुपोषित नौनिहाल हैं। लेकिन जिले में कुपोषण के खिलाफ जंग लडऩे में महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य अमला लापरवाही बरत रहा है। बार बार जिला प्रशासन द्वारा दिए जा निर्देशों के बाद भी कुपोषित बच्चों को पोषित बनाने की पहल से पिछड़ रहे हैं। यहीं नहीं इससे पूर्व के माह में भी कुपोषित बच्चों को एनआरसी केन्द्रों में भर्ती कराने का आंकड़ा भी काफी कम रहा है। जबकि इन पूरे सेंटर पर माहभर के दौरान लगभग १४० बच्चों की भर्ती किया जा सकता है। लेकिन अब के आंकड़ों में देखा जाए ४२ बच्चे ही हैं।
बॉक्स: पुष्पराजगढ़ और और जैतहरी कमजोर
जिले में कुपोषण को लेकर लड़ी जा रही जंग में कुपोषित मामले में पिछड़े विकासखंड ही पोषित करने में कमजोर साबित हो रहे हैं। यहां मैदानी अमले और विभागीय अधिकारियों की अनेदखी में बच्चों को पोषित करने का आंकड़ा सबसे कम है। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष २०२०-२१ के दौरान अनूपपुर, जैतहरी, कोतमा, पुष्पराजगढ़ और करपा के कुल ७० बिस्तरों के लिए सालभर में मात्र ५४८ बच्चों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो सकी, जो बिस्तरों के अनुपात में मात्र ३३ फीसदी लाभ कहा जा सकता है। वहीं वर्ष २०२१-२२ में अगस्त माह तक ७० बिस्तरों में अब तक २७१ बच्चों की भर्ती है, जो अनुपात में ४८.३९ फीसदी है। इनमें दो माह तक कोरोना महामारी के दौरान सेंटर बंद रखे गए थे। इनमें जैतहरी का प्रदर्शन २७ और ४३ प्रतिशत रहा है, जबकि पुष्पराजगढ़ का १८ और ३५ प्रतिशत है, ये सबसे कमजोर कड़ी हैं।
बॉक्स: त्योहार और किसानी में दो माह तक बच्चों की घटेगी संख्या
महिला बाल विकास विभाग के अनुसार कुपोषित बच्चों को एनआरसी सेंटर भेजने में अब अभिभावक खेती का हवाला देकर बच्चों को सेंटर भेजने से दूरी बना रहे हैं। वैसे भी अक्टूबर माह में त्योहारी सीजन और खेती दोनों पड़ जाएंगे। इसका असर भर्ती पर भी पड़ेगा। यानि अक्टूबर और नवम्बर माह तक बच्चों की संख्या कम रहेगी।
बॉक्स: कहां किन सेंटर पर बच्चों की संख्या
सेंटर क्षमता बच्चों की उपस्थिति
अनूपपुर २० ११
जैतहरी १० ०६
कोतमा १० ०९
राजेन्द्रग्राम २० ०९
करपा १० ०७
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Rajan Kumar Gupta Desk
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