जिले की 23 सौ तालाबों में मछली पालन, प्रतिवर्ष 7 हजार मीट्रिक टन उत्पादन

मत्स्य पालन को बढ़ावा देने बन रही कार्ययोजना, रोजगार के साथ में होगी वृद्धि

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 10 Jun 2021, 11:08 AM IST

अनूपपुर। जिले की तालाबों को मत्स्य उत्पादन के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने अब विभागीय स्तर पर तैयारियां की जा रही है। जिसमें अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराते हुए आय में वृद्धि भी कराई जा सके। इसके लिए शासन स्तर पर भी मत्स्य पालन को बढ़ावा देने समय समय पर योजनाओं को संचालित कर प्रशासन द्वारा पालकों को लाभांवित करने का प्रयास कराया जाता है। जिसे देखते हुए अब जिले के सभी तालाबों में मछली पालन की योजना बनाई गई है। हालांकि इस सम्बंध में शहडोल कमिश्नर ने भी पूर्व में जिला प्रशासनों को जिले की तालाबों में मत्स्य पालन कराने के निर्देश दिए थे। मत्स्य सहायक संचालक अनूपपुर शिवेन्द्र सिंह परिहार बताते हैं कि अनूपपुर जिला छत्तीसगढ़ प्रदेश की सीमावर्ती जिला है, जिसके कारण जिले की निचले इलाकों में बनी तालाबों का जलस्तर बेहतर बना रहता है और यहां बने अधिकांश तालाबों में सालोंभर पानी भरा रहता है। इसके अलावा यहां से गुजरी नर्मदा, सोन, जोहिला, गोहांड्रा, गोडारू, अलान, तिपान, केवई , केनई जैसी नदियों के कारण यह मत्स्य पालकों के लिए बेहतर वातावरण भी तैयार करता है। इन नदियों से भी जगह जगह समितियों द्वारा मछली का उत्पादन किया जाता है। मत्स्य सहायक संचालक बताते हैं कि जिले में २३०० तालाबें हैं। ये तालाबें ग्राम पंचायत और निजी हैं। इसके अलावा सिंचाई विभाग की ४८ तालाबें हैं। जिन्हें लीज के माध्यम से मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया गया है। इनमें मत्स्य पालकों द्वारा मछली का उत्पादन किया जाता है। इसके अलावा ये पालक उन तालाबों में कमल और मखाना जैसे खाद्य पदार्थो का उगाते हैं। इसमें मत्स्य पालक समितियों को इन तालाबों से दोहरा लाभ भी मिलता है। इनमें राजेन्द्रग्राम, जैतहरी और कोतमा क्षेत्र में सर्वाधिक मत्स्य पालन का कार्य किया जाता है। मत्स्य सहायक संचालक का कहना है कि शहरी क्षेत्रों के भी अधिकांश तालाबों को लीज पर मत्स्य पालन के लिए उपलब्ध कराया गया है और प्रतिवर्ष यहां मत्स्य उत्पादन के कार्य कराए जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी तालाब हैं, जहां पानी के स्त्रोत या पालकों की अनिच्छा के कारण वे बेकार पड़े हैं।
बॉक्स: ७ हजार मीट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पादन
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले की २३०० तालाबों के साथ सिंचाई विभाग की ४८ तालाबा और नदियों से प्रतिवर्ष मछली का उत्पादन लगभग ७ हजार मीट्रिक टन माना गया है। इन आंकड़ों में प्रतिवर्ष बढोत्तरी ही हो रही है। सहायक संचालक मत्स्य शिवेन्द्र सिंह परिहार का कहना है कि जैसे जैसे तालाबों की संख्या और पालकों की संख्या बढ़ती जाएगी उत्पादन भी बढ़ता जाएगा। इनमें राजेन्द्रग्राम में सर्वाधिक मत्स्य पालन होता है। उन्होंने बताया कि जिले में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष लगभग ५०० करोड़ बीज(स्पाम) तैयार किए गए हैं।
बॉक्स: मत्स्य पालकों को मिलेगा रोजगार, आय में होगी वृद्धि
सहायक संचालक ने बताया कि जिले में बड़े उद्योगों की कमी है, पिछड़े इलाकों में भी रोजगार के साधन नहीं हैं। जिले में कृषि और मत्स्य पालन ही मुख्य आय का साधन है। वहीं मछली पालन के प्रति पुरूषों के साथ महिला समितियां भी आगे आ रही है। जिसके कारण अब मत्स्य पालन रोजगार बन गया है और इसमें काम करने वाले समिति के सदस्यों के साथ अन्य सहयोगी लोगों को भी रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं। इससे जहां पालकों की आय में वृृद्धि हो रही है वहीं रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
वर्सन:
अभी २३०० तालाबों को लीज पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराया गया है। इनमें ग्राम पंचायत और निजी तालाब भी है। शहरी क्षेत्रों के तालाबों को भी लीज पर दिया गया है। इससे रोजगार के साथ आय में वृद्धि हुई है। वहीं मत्स्य उत्पादन भी बढ़े हैं।
शिवेन्द्र सिंह परिहार, सहायक संचालक मत्स्य विभाग अनूपपुर।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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