मनरेगा के तालाबों में भी होगा मछली पालन, मत्स्य विभाग ने उपयोगी तालाबों की मांगी जानकारी

खदानों के तालाब भी बन रहे रोजगार व आय के साधन, जिले में 7 हजार मीट्रिक टन मछली का हो रहा उत्पादन

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 15 Jun 2021, 11:58 AM IST

अनूपपुर। जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अब मत्स्य विभाग मनरेगा योजना से तैयार हो रही ग्रामीण अंचल की तालाबों में भी उत्पादन की योजना तैयार कर रहा है। इनमें ऐसे तालाबों को चिह्नित किया जाएगा जिनकी जलभराव क्षमता अच्छी हो और गर्मी के दिनों में भी इनमें पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। अगर ऐसा हुआ तो जिले में सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण अंचलों में तैयार किए जा रहे या हो चुके तालाब स्थानीय ग्रामीणों के लिए जलस्त्रोत, जलसरंक्षण के साथ साथ रोजगार व आय के साधन बन जाएंगे। साथ ही मत्स्य पालन के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। तालाबों की संख्या अधिक होने पर स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक किसान भी इस रोजगार से जुड़ सकेंगे। जबकि वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों सहित निजी स्वामित्व के २३०० तालाबों में मछली पालन का कार्य कर रही है। इसके अलावा इनमें सिंचाई विभाग की ४८ तालाबों को भी मत्स्य विभाग द्वारा लीज पर मत्स्य पालकों को उपलब्ध कराकर मछली का उत्पादन कर रही है। लेकिन अब मत्स्य विभाग ग्रामीण अंचलों में मनरेगा योजना के तहत बन रहे तालाबों को भी मत्स्य पालन के उपयोग में लाने की तैयारी में जुटा हुआ है। बताया जाता है कि कोरोना काल में वर्ष २०२०-२१ में मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण अंचलों में स्थानीय मजदूरों को अधिक से अधिक कार्य उपलब्ध कराते हुए रोजगार उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें जिला पंचायत द्वारा ग्रामीण अंचलों में पानी की समस्या को दूर करने और जलसंरक्षण को लेकर तालाबों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। जिसके कारण पंचायत स्तर पर जिले के चारो विकासखंड अनूपपुर, जैतहरी, कोतमा और पुष्पराजगढ़ में सैकड़ों तालाब निर्मित और निर्माणाधीन है। सहायक संचालक शिवेन्द्र सिंह परिहार ने बताया कि जिले में बड़े उद्योगों की कमी है, पिछड़े इलाकों में भी रोजगार के साधन नहीं हैं। जिले में कृषि और मत्स्य पालन ही मुख्य आय का साधन है। वहीं मछली पालन के प्रति पुरूषों के साथ महिला समितियां भी आगे आ रही है। जिसके कारण अब मत्स्य पालन रोजगार बन गया है और इसमें काम करने वाले समिति के सदस्यों के साथ अन्य सहयोगी लोगों को भी रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं। इससे जहां पालकों की आय में वृृद्धि हो रही है वहीं रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
बॉक्स: कमिश्नर ने मत्स्य पालन पर जोर के दिए थे निर्देश
कमिश्नर ने हाल के दिनों में सम्भागीय अधिकारियों की बैठक बुलाते हुए शहडोल संभाग के सभी तालाबों में मत्स्य पालन होना चाहिए पर जोर देते हुए निर्देशित किया था। साथ ही मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को मत्स्य पालन के लिए तालाबों को चिन्हित करने के भी निर्देश दिए थे। इसके अलावा मत्स्य पालकों एवं मत्स्य पालन समितियों के सदस्यों से संपर्क स्थापित कर उन्हें मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित करने, और संभाग का कोई भी तालाब बिना मत्स्य बीज के नहीं रहना चाहिए के निर्देश दिए थे। जिसे देखते हुए अब विभागों ने तालाबों की जांच परख आरम्भ कर दी है।
बॉक्स: ७ खदानों की तालाब भी मत्स्य पालन के लिए उपयोगी
मत्स्य सहायक संचालक अनूपपुर शिवेन्द्र सिंह परिहार के अनुसार मत्स्य पालन के लिए अब विभाग ने कोयला खदानों की तालाबों को भी उपयोगी माना है। जिसमें जिले में वर्तमान में खदानों के ७ तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य किया जा रहा है। खदान की तालाबों को पिछले २-३ सालों से मछली पालन के उपयोग में लाया गया है। अधिकारी का कहना है कि जल्द ही खदान की अन्य तालाबों को भी चिह्नित कर मछली पालन के उपयोग में लाया जाएगा।
बॉक्स: ७ हजार मीट्रिक टन प्रतिवर्ष उत्पादन
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले की २३०० तालाबों व स्थानीय नदियों से प्रतिवर्ष मछली का उत्पादन लगभग ७ हजार मीट्रिक टन है। इन आंकड़ों में प्रतिवर्ष बढोत्तरी ही हो रही है। जिले में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष लगभग ५०० करोड़ बीज(स्पाम) तैयार किए गए हैं।
वर्सन:
जिपं कार्यालय से जलस्तर युक्त तालाबों की जानकारी मांगी गई है। तालाब चयन कर मछली पालन किया जाएगा। इससे मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही पालको व ग्रामीणों को रोजगार व आय की प्राप्ति होगी।
शिवेन्द्र सिंह परिहार, सहायक संचालक मत्स्य विभाग अनूपपुर।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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