भगवान भरोसे मरीज: प्राथमिक से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन, कागजों में सुविधाएं रह गई अधूरी

दर्जनों गांव के मरीज हो रहे बेहाल, डॉक्टरों व स्टाफों के अभाव में नहीं मिल रहा स्वास्थ्य सेवाएं

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 05 Sep 2020, 06:00 AM IST

अनूपपुर। मप्र-छग की सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में शामिल ग्राम कोठी की प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का छह माह पूर्व उन्नयन कर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया, ताकि आसपास के लगभग दो दर्जन गांवों के मरीजों को कोतमा व बिजुरी स्वास्थ्य आने से राहत मिल सके। साथ ही दोनों मुख्य स्वास्थ्य केन्द्रों पर मरीजों के दवाब को कम करते हुए बीमार मरीजों को कम समय में स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया जा सके। लेकिन कोतमा विधायक द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयनित हुई स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन कागजों तक सीमित होकर रह गया। यहां सीएचसी जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं तो दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की सुविधाएं भी अधूरी रह गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के उन्नयन के बाद यहां ४ मेडिकल अधिकारी, २ पीजीएमओ, २ विशेषज्ञ, सहित ६ स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफों की ड्यूटी लगाई गई। लेकिन आश्चर्य उन्नयित हुई स्वास्थ्य केन्द्र में विशेषज्ञ तो दूर एक डॉक्टर की भी उपस्थिति नहीं है। यहां तक ६ स्टाफ नर्स में एक भी स्टाफ नर्स की उपस्थिति अबतक नहीं हो सकी है। हालंाकि बीएमओ कोतमा का कहना है कि डॉक्टरों की कमी में एक डॉक्टर की उपस्थित रखी गई है, साथ ही दो एएनएम को रखा गया है। लेकिन हालात यह है कि यहां न तो एएनएम और ना ही डॉक्टर नजर आते हैं। स्वास्थ्य केन्द्र पर सन्नाटा पसरा हुआ है। अंजाने में आसपास गांव के ग्रामीण इलाज के लिए आते भी है तो वहां न तो डॉक्टर और ना ही स्टाफ नर्स नजर आती है। जिसके कारण मरीजों व परिजनों को बिना इलाज ही वापस लौटना पड़ रहा है।
बॉक्स: रोस्टर में एक डॉक्टर दो स्वास्थ्य केन्द्र
जानकारी के अनुसार बिजुरी में पदस्थ डॉक्टर की ही ड्यूटी कोठी स्वास्थ्य केन्द्र के लिए लगाया गया है। यह व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रोस्टर में बनाया गया है। जिसमें डॉक्टर रात के समय अगर बिजुरी में ड्यूटी करता है तो अगली सुबह उसे कोठी में करना होगा। यानि २४ घंटे दो स्वास्थ्य केन्द्र। यहां अधिकारियों ने बिना वैकल्पिक व्यवस्थाएं बनाए एक डॉक्टर को दो स्वास्थ्य केन्द्र की जिम्मेदारी सौंप दी है।
बॉक्स: इलाज के लिए मनेन्द्रगढ़ का रूख
ग्रामीणों का कहना है कि कोठी प्राथमिक स्वास्थ्य के बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया। लेकिन सब कुछ कागजों में ही रहा। न तो डॉक्टर की सुविधा बढ़ी और ना ही स्टाफों को उपलब्ध कराया गया है। जिसके कारण यहां के मरीज मनेन्द्रगढ़ जाने को विवश है। क्योंकि कोठी से बिजुरी १२ किलोमीटर, मलगा पीएचसी ३० किलोमीटर और कोतमा सीएचसी ३५ किलोमीटर से अधिक की दूरी है। जबकि कोठी से सटे उमरदर, मझौली, मंटोलिया, तरसीली, गुलीडांड, अकरिया, भलमुड़ी, छतई सहित अन्य गांव हैं।
वर्सन:
स्वीकृत पदों के अनुसार चिकित्सक और स्टाफों की कमी है। फिलहाल एक चिकित्सक को तैनात किया गया है। साथ ही दो एएनएम भी हैं।
केएल दीवान, बीएमओ कोतमा।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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