जाट सहित अन्य पिछड़े वर्ग के पिछड़ेपन पर शासन ने कमेटी गठित की, report 3 महीने में

कमेटी जाट सहित पिछड़े वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन का आंकलन

 

By: Anil Ankur

Published: 07 Jun 2018, 08:43 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश शासन ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जाट सहित पिछड़े वर्ग के पिछड़ेपन को लेकर दाखिल रिट याचिका में पारित आदेशों एवं निर्णय के तहत सन्दर्भ बिन्दुओं पर विचार करने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। यह समिति जाट जाति सहित अन्य पिछड़े वर्ग की जातियों, वर्गों के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन का आंकलन करने के लिए गठित की गयी है।

प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश कुमार गुप्ता द्वारा इस सम्बन्ध में गठित की गई कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री राघवेन्द्र कुमार होंगे जबकि श्री जे0पी0 विश्वकर्मा, आईएएस (सेवानिवृत्त), प्रोफेसर भूपेन्द्र विक्रम सिंह, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय तथा श्री अशोक राजभर, अधिवक्ता (आजमगढ़) सदस्य बनाये गये हैं।
कमेटी द्वारा निर्धारित बिन्दुओं पर विचार कर आख्या तीन महीने में शासन को प्रस्तुत की जायेगी। कमेटी जिन निर्धारित बिन्दुओं पर विचार करेगी उनमें पिछड़े वर्ग के कल्याणार्थ उत्तर प्रदेश सरकार की समस्त योजनाओं, व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का विश्लेषण, वर्तमान परिस्थितियों में पिछड़े वर्ग के अन्तर्गत विभिन्न वर्गों/जातियों की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति का आंकलन, उत्तर प्रदेश में निर्धारित आरक्षण व्यवस्था के अधीन शैक्षणिक क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के विभिन्न वर्गों/जातियों की भागीदारी का आंकलन, उत्तर प्रदेश में निर्धारित आरक्षण व्यवस्था के अन्तर्गत सरकारी सेवाओं में पिछड़े वर्ग की विभिन्न जातियों की भागीदारी का आंकलन, पिछड़े वर्ग के अन्तर्गत विभिन्न वर्गों/जातियों के संदर्भ में आरक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने हेतु अन्य राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन एवं इस सम्बन्ध में विभिन्न उच्च न्यायालयों एवं उच्च्तम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त का उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय का उद्देश्य प्राप्त करने हेतु उपयोग किये जाने हेतु सुझाव, पिछड़े वर्ग के कल्याणार्थ राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही समस्त योजनाओं को सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से और प्रभावी एवं उद्देश्यपरक बनाये जाने हेतु संस्तुतियां उपलब्ध कराया जाना, पिछड़े वर्ग के विभिन्न वर्गों/जातियों के लिए आरक्षण व्यवस्था को सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से और प्रभावी एवं उद्देश्यपरक बनाये जाने हेतु संस्तुतियां उपलब्ध कराया जाना तथा अन्य बिन्दु, जिसे राज्य सरकार समय-समय पर संदर्भित करना चाहे, शामिल हैं।

Anil Ankur Desk/Reporting
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