हिंदी जनभाषा है, इससे विचारों की सहज अभिव्यक्ति संभव

गैर हिंदी भाषा के विशेषज्ञों ने भी हिंदी के विकास में दिया अहम योगदान,

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 05 Sep 2019, 03:34 PM IST

अनूपपुर। केंद्र सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे हिंदी पखवाड़े 1 से15 सितंबर के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के राजभाषा अनुभाग के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर प्रमुख शिक्षाविदों ने हिंदी को जनभाषा बताते हुए कहा कि हिंदी भारत के सपनों की भाषा है जिसकी मदद से विचारों की अभिव्यक्ति सहजता से की जा सकती है। हिंदी पखवाड़े का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि हिंदी भाषा एवं साहित्य केंद्र, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार दुबे ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक हुए सभी जन आंदोलनों में हिंदी की प्रमुख भूमिका रही है। इतना लंबा सफर हिंदी ने आत्मीयता, जन समर्थन और संप्रेषणशीलता के साथ जारी रखा है। उन्होंने कहा कि हिंदी 56 भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है और आज भी हिंदी भाषायी राज्यों के साथ गैर हिंदी भाषायी क्षेत्रों में भी हिंदी पर उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में हिंदी सभी के सपनों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बन गई है। विशिष्ट अतिथि लुप्त प्राय: भाषा केंद्र के प्रो. दिलीप सिंह ने कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका सहित विकसित देशों में 17वीं शताब्दी में हिंदी में किए गए कार्य आज भी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने भाषा के तुलनात्मक अध्ययन और इस दिशा में निरंतर शोध की आवश्कता पर बल दिया। निदेशक (अकादमिक) प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने कहा कि हिंदी संप्रेषण का सशक्त माध्यम होने के साथ ही रोजगार की भाषा भी बन गई है। उन्होंने राजभाषा हिंदी की प्रशासनिक, धार्मिक, साहित्य और सामाजिक संदर्भ में महत्वता को रेखांकित किया। डीन प्रो. खेमसिंह डहेरिया ने कहा कि देश के गैर हिंदी भाषायी क्षेत्रों में भी हिंदी को सहजता के साथ स्वीकार किया जा रहा है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. रेनू सिंह ने हिंदी और अनुवाद के महत्व पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय की हिंदी अधिकारी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम के तहत पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता, फोटोग्राफी, स्वरचित रचना, कवि सम्मेलन आदि का आयोजन किया जाएगा। इसमें श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

Rajan Kumar Gupta Desk
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