गांव में छूला के उगने वाला ज्यादा पेड़, नाम पड़ा छूलकारी

लाल रंग के फूल से गर्मियों में दिखता है अलग स्वरूप, पत्तों का बनता है दोना पत्तल

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 23 Sep 2021, 12:00 PM IST

अनूपपुर। जैतहरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम छूलकारी का नाम इस गांव में ज्यादा संख्या में उगने वाले छूले के पेड़ की वजह से पड़ा था। जिसमें आज भी गांव में अधिक संख्या में यह पेड़ नजर आते हैं। धार्मिक आयोजनों में इसकी लकड़ी के उपयोग के साथ गरीब परिवारों के दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने के कारण ग्रामीण आज भी इसके संरक्षण में आग्रणी पहल कर रहे हैं। गांव के वृद्धों के साथ अब ग्रामीण युवाओं ने भी इसके संरक्षण में भूमिका निभा रहे हैं। बताया जाता है कि इस गांव में 10 वार्ड है, जिनमें लगभग 1500 की आबादी निवासरत है । ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पूर्व में ज्यादा संख्या में छूले के पेड़ उगा करते थे, आबादी बढऩे के साथ इन पेड़ों में कुछ की कटाई हुई। लेकिन आज भी गांव में इन पेड़ों की संख्या कम नहीं हुई है। इन्हीं पेड़ों की वजह से गांव का नाम भी छूला पड़ा है। अब गांव के युवा इन पेड़ों की सुरक्षा और लोगों से इसकी कटाई नहंी करने की अपील भी कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण बिहारी लाल बताते हैं कि ग्रामीणों के द्वारा छूले के पत्ते का उपयोग दोने पत्तल बनाने के रूप में किया जाता है। इसके साथ ही इसका विक्रय भी ग्रामीण करते हैं। जिससे यह कुछ ग्रामीणों की आजीविका का साधन भी बना हुआ है।
बॉक्स: गर्मियों में दिखता है अलग स्वरूप
ग्रामीणों ने बताया कि छूले के पेड़ में गर्मियों के मौसम में गुलाबी रंग का फूल लगता है। जिसमें गुलाबी रंग के फूल से पूरा गांव ही रंगीन नजर आता है। जिसके कारण दूर से देखने पर छूले से घिरे इस गांव की सुंदरता अलग ही दिखाई पड़ती है।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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