मप्र. की वन सीमा लांघ वापस छत्तीसगढ़ लौटा हाथियों का दल

वनमंडलाधिकारी ने सर्वेक्षण के दिए निर्देश, पूर्व नुकसान हुए मुआवजे के इंतजार में किसान

अनूपपुर। 16 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ की सीमा लांघकर मप्र. की वन सीमा में प्रवेश किया 18 हाथियों का दल कोतमा, व जैतहरी वनपरिक्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों को लांघ पुन: २० अक्टूबर को छत्तीसगढ़ की सीमा में लौट गए हैं। २० अक्टूबर को हाथियों के दल के पीछे लगे वनविभाग की निगरानी दल को मप्र.-छग की सीमावर्ती गांव वेंकटनगर-मरवाही सीमा पर हाथियों की चहल कदमी नहंी दिखी। वनविभाग ने सम्भावना जताई है कि सम्भवत: हाथियों का दल पुन: छग की सीमा में प्रवेश कर गया है। हालांकि हाथियों के वापसी को लेकर वनविभाग सतर्क है। इसके लिए कोतमा, जैतहरी में ४०-४५ की तादाद में वनकर्मियों को चौकसी में लगाया है। वनमंडला अधिकारी एमएस भगदिया का कहना है कि अबतक हाथियों ने लगभग ६ गांवों की सीमा में लगी खेतों को रास्ता बनाते हुए आवाजाही की है। इनमें कुछ खेतों को अधिक नुकसान हुआ है, जबकि कुछ को आशिंक। इस दौरान किसी जनहानि की घटना नहीं हुई। लेकिन हाथियों का दल अब छग की सीमा में वापसी कर गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार १६ अक्टूबर को १८ हाथियों का दल बोरीखांड के जंगल से छिरमिरी बगडुगरा गांव के रास्ते मप्र. की सीमा मे ंप्रवेश किया था। जिसके बाद कोतमा के पोंडी बीट में रात गुजारने के बाद केवई नदी पार करते हुए पडौर, धुरवासिन, जैतहरी के कुकुरगोरा, धनगवां के झंडी गांव, कुसुमहाई, क्योंटार, रोहिला कछार, चोई, बीड़, कदमसरा गांव के क्षेत्रोंं में विचरण किया। इसके लिए वनविभाग सीसीएफ एके जोशी के साथ वनमंडलाधिकारी अनूपपुर एमएस भगदिया, उपमंडलाधिकारी सहित परिक्षेत्र रेंजर व सहायकों की टीम निगरानी में जुटी रही। जिसमें सिंगरौली के हादसे को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने कर्मचारियां को हाथियों से दूरी बनाकर रहने के निर्देश दिए। साथ ही गांव की सीमा से दूर रखते हुए उसे वापस छग की सीमा में लौटाने की रणनीति बनाई। फिलहाल हाथियों की वापसी से वनविभाग ने राहत महसूस की है। लेकिन सम्भावनाएं फिर से वापसी की बन रही है।
एक ओर जहां हाथियों के दल ने इस वर्ष भी आधा दर्जन गांव के खेतों में विचरण कर फसलो ंको नुकसान पहुंचाया है। वहंी वर्ष २०१८ के दौरान भी १८ हाथियों के दल द्वारा जिले के चारों विकासखंड में विचरण करते हुए फसलों को नुकसान पहुंचाया था। इसमें कोतमा, जैतहरी, अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ के पांच सैकड़ा से अधिकं किसानों के हजारों एकड़ की धान सहित अन्य खरीफ की फसलें बर्बाद हो गई थी। कोतमा और जैतहरी के लिए लगभग साढे पांच लाख की मुआवजा राशि मुआवजा के रूप में वितरित करवाया गया। लेकिन अब भी अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ के दौ सैकड़ा से अधिक प्रभावित किसान क्षतिपूर्ति राशि के इंतजार में रह गए। इन किसानों को मुआवजा नहीं मिला। जानकारी के अनुसार शेष किसानों में अनूपपुर विकासखंड से लगभग १९० किसान तथा पुष्पराजगढ़ से २६ किसान प्रभावितों की श्रेणी में रह गए। उसके पूर्व कोतमा के लिए राजस्व विभाग द्वारा लगभग ५.२५ लाख और जैतहरी के लिए लगभग१.२५ लाख रूपए का क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराया गया था।
बॉक्स: खेतों का नहीं किया निरीक्षण, प्रतिवेदनों के आधार पर मुआवजा
प्रभावित किसानों के निरीक्षण का कार्य पटवारी और बीटगार्ड को दिया गया था। लेकिन राजस्व विभाग के पटवारियों ने खेतों में हुए नुकसान का बिना मौके निरीक्षण किए किसानों के प्रतिवेदनों के आधार पर मुआवजा राशि तय कर दी। इसमें अधिकांश किसानों को राजस्व विभाग यह कह आवेदन निरस्त कर दिया गया कि उनका नुकसान २० प्रतिशत से कम हुआ।
वर्सन:
कलेक्टर से चर्चा में सभी किसानों को मुआवजा प्रदान की जानकारी दी गई है। हमारी तरफ से जो प्रतिवदेन भेजे गए राजस्व विभाग ने प्रावधानों के अनुसार २५ प्रतिशत नुकसान के उपर का मुआवजा प्रदान किया है।
एमएस भगदिया, वनमंडलाधिकारी अनूपपुर।

Rajan Kumar Gupta
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