गंदगी और गाद से अमरकंटक में पटा नर्मदा नदी का तल, सूखने की कगार पर पहुंची जलधारा

अधिकारियों की अनदेखी में नर्मदा हुई बदहाल, स्मार्ट सिटी और अमरकंटक विकास प्राधिकरण योजना फेल

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 20 Feb 2021, 11:35 AM IST

अनूपपुर। नर्मदा के प्रति अपनी धार्मिक अस्था रखते हुए देश के राष्ट्रपति से लेकर उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ अनेक प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों व अन्य बड़ी हस्तियों ने अमरकंटक में नर्मदा बचाने का बार बार संकल्प दोहराया। धार्मिक आयोजन कर प्रदेशवासियों से इसके बचाने की अपील की। बावजूद सालोंभर पानी से लबालब रहने वाली जीवनदायिनी नर्मदा दिनोंदिन सिकुड़ती और सूखती जा रही है। वनों की कटाई और नदी से लगातार निकल रही रेत ने नदी की जलधारा को प्रभावित किया है। वहीं नगरीय क्षेत्रों की गंदगी लगातार मिलने और अधिकारियों की सफाई के प्रति अनदेखी ने इसे बदहाल कर दिया है। हालात यह है कि अपने उद्गम स्थल पर ही नर्मदा सूखने के कगार पर पहुंच गई है। कई दशकों से नदी की तल में बैठे गाद(सिल्ट) की सफाई नहीं की गई। साथ ही नगरीय क्षेत्र से उतर रही गंदगी को भी रोका नहीं गया। यहीं नहीं नर्मदातट से सटे पक्के निर्माण ने इनकी जलधारा को सकरी बना दिया है। परिणाम स्वरूप सिल्ट की लगभग ५-६ फीट मोटी परत में नर्मदा कुंड से पुष्कर सरोवर में उतरने वाली जलधारा उथल हो गया। और जलधाराओं को सरोवर में बंाधी गई डैम भी देखभाल के अभाव में टूट गई। वर्तमान हालत यह है रामघाट पर श्रद्धालुओं के लिए स्नान के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है। प्रशासन ८ लाख से अधिक खर्च कर स्थानीय आश्रमों की मदद से सफाई में जुटा है। सिल्ट को बाहर निकाला जा रहा है। वहीं नर्मदा कुंड में भी सफाई नहीं होने के कारण पानी का जलस्तर नीचे हो रहा है। इससे पूर्व २०१५ में तत्कालीन प्रशासन ने कुंड की सफाई कराई थी। जिसके बाद सफाई का कार्य नहीं हुआ है।
अमरकंटक की नर्मदा उद्गम स्थल को संरक्षित करने चार बड़ी परियोजनाएं बनाई गई। जिसमें अमरकंटक विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी परियोजना, सीवेज टीटमेंट प्लांट और केन्द्रीय स्तर की प्रसाद योजना शामिल है। लेकिन ४९.९८ करोड़ की प्रस्तावित प्रसाद योजना को छोडक़र तीन अन्य परियोजनाएं फेल हो गई। अमरकंटक विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हुआ। वहीं वर्ष २०१८ में सीएम ने विकास के लिए घोषणा करते हुए अमरकंटक को स्मार्ट सिटी बनाने 15.5० करोड़ रूपए खर्च, 12.56 करोड़ रूपए की लागत से जल प्रदाय योजना, 18.6 करोड़ रूपए की लागत से सीवरेज प्लांट, अमरकंटक नगर परिषद की स्वच्छता के लिए 2.22 करोड़, तथा अधोसंरचना विकास के लिए 3 करोड़ रूपए देने की घोषणा की थी। लेकिन इनमें स्मार्ट सिटी योजना मूत्र्त रूप नहीं ले सका और १८.६ करोड़ की लगात से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित नहीं हो सके।
बॉक्स: अगस्त से पूर्व श्रद्धालुओं को नहीं मिल सकेगा स्नान के लिए रामघाट
वर्तमान में नदी से गाद निकालने का कार्य कराया जा रहा है। इसमें अनुमान है कि जुलाई-अगस्त माह से पूर्व पुष्कर डैम रामघाट पर श्रद्धालुओं को स्नान का मौका नहीं मिल पाएगा। नदी की गाद सफाई के साथ डैम को भी सुधारा जा रहा है। इसमें पुष्कर डैम में जलभराव में चार से पांच माह का समय लगेगा।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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